JEE IIT Success Story: सच्ची लगन के आगे गरीबी और बीमारी भी हार गईं. उत्तराखंड के योगेश सिंह जीना ने कठिन हालात से लड़ते हुए अपने सपने को जिया और आज IIT बॉम्बे में पढ़ाई कर रहे हैं.
JEE IIT Success Story: अगर कुछ कर गुजरने की सच्ची लगन हो, तो सीमित आर्थिक संसाधन और शारीरिक परेशानियां भी रास्ता नहीं रोक पातीं. उत्तराखंड के योगेश सिंह जीना (Yogesh Singh Jeena) की कहानी इसका जीता-जागता उदाहरण है, जिन्होंने कठिन हालात के बावजूद अपने सपने को नहीं छोड़ा और आज IIT बॉम्बे में पढ़ाई कर रहे हैं.
उत्तराखंड के छोटे से गांव सिरसा में पले-बढ़े योगेश ने बचपन में ही इंजीनियर बनने का सपना देख लिया था. उनके पिता ऑटो-रिक्शा चलाते हैं और मां खेती-बाड़ी से परिवार का सहारा हैं. सीमित आमदनी के चलते कोचिंग या महंगे संसाधन उनके लिए संभव नहीं थे, लेकिन सपनों की उड़ान ऊंची थी.
19 साल की उम्र में योगेश को एंकिलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस नामक गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा, जिसमें रीढ़ और जोड़ों में तेज दर्द व अकड़न रहती है. कई बार हालात ऐसे थे कि वे खुद बिस्तर से भी नहीं उठ पाते थे. इस बीमारी का असर उनकी 12वीं की पढ़ाई और अंकों पर भी पड़ा.
योगेश ने हरगोविंद सुयाल सरस्वती विद्या मंदिर से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की. उन्होंने JEE मेन और JEE एडवांस्ड दोनों क्वालिफाई किए, लेकिन 12वीं में कम अंकों के कारण IIT में एडमिशन नहीं मिल सका. वर्ष 2023 में उन्हें 74.8 प्रतिशत अंक मिले थे. हालांकि वे स्टेट बोर्ड के टॉप 20 प्रतिशत में थे, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से उस समय कॉलेज जाना संभव नहीं हो पाया.
निराश होने के बजाय योगेश ने एक ड्रॉप ईयर लेने का फैसला किया. यह साल सिर्फ परीक्षा की तैयारी के लिए नहीं, बल्कि सेहत सुधारने और आत्मविश्वास वापस पाने के लिए भी था. उन्होंने ठान लिया कि IIT का सपना अधूरा नहीं छोड़ेंगे.
कोचिंग की फीस देना संभव नहीं था, इसलिए योगेश ने YouTube और सेल्फ-स्टडी को अपना हथियार बनाया. चुनिंदा शैक्षणिक चैनलों से पढ़ाई की और पूरे साल अनुशासन के साथ तैयारी की. मैथ्स और फिजिक्स उनके मजबूत विषय थे, जबकि केमिस्ट्री पर उन्होंने अतिरिक्त मेहनत की. सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी और रोज़ाना 10–12 घंटे पढ़ाई की.
योगेश ने रिवीजन को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया. हर हफ्ते किताबें बंद कर जो याद था, उसे लिखते और कमजोर टॉपिक्स पर दोबारा काम करते. इस आदत ने उनके कॉन्सेप्ट मजबूत किए और आत्मविश्वास बढ़ाया. JEE परीक्षा के दौरान उन्होंने पहले फिजिक्स, फिर केमिस्ट्री और अंत में मैथ्स हल की. आसान सवालों को पहले निपटाकर समय और मानसिक दबाव दोनों को संतुलित रखा.
लगातार मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर योगेश सिंह जीना आज IIT बॉम्बे में एनवायरनमेंटल साइंस एंड इंजीनियरिंग में BTech कर रहे हैं. उनकी कहानी हर उस छात्र के लिए प्रेरणा है जो सीमाओं के बावजूद सपने देखने का साहस रखता है.
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