16 फरवरी को मनाया जाने वाला 'किक डे' शारीरिक हिंसा नहीं, बल्कि जीवन से नकारात्मकता को 'किक' करने का दिन है. भारत समेत अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में लोकप्रिय यह दिन टॉक्सिक रिश्तों, बुरी आदतों और पुरानी यादों को पीछे छोड़कर आत्म-सम्मान के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है.
किक डे का मतलब लात मारना नहीं, बल्कि अपनी लाइफ से नेगेटिविटी को बाहर निकालना है
वैलेंटाइन वीक के प्यार भरे दिनों के बाद अब ‘एंटी-वैलेंटाइन वीक’ की शुरुआत हो चुकी है. 15 फरवरी को ‘स्लैप डे’ मनाने के बाद, आज यानी 16 फरवरी को ‘किक डे’ मनाया जा रहा है. यह दिन उन लोगों के लिए बेहद खास है जो अपने जीवन से नकारात्मकता को बाहर निकालकर एक नई शुरुआत करना चाहते है.
किक डे मुख्य रूप से अपनी जिंदगी से नकारात्मकता (Negativity) को बाहर निकालने के लिए मनाया जाता है. वैलेंटाइन वीक के प्यार भरे दिनों के बाद, ‘एंटी-वैलेंटाइन वीक’ का यह दूसरा दिन हमें पुराने और कड़वे रिश्तों से आगे बढ़ने की हिम्मत देता है. इसका असली मकसद किसी को चोट पहुंचाना नहीं, बल्कि उन बुरी यादों, टॉक्सिक रिश्तों और पुरानी आदतों को अपनी लाइफ से ‘किक’ करना है जो हमें दुखी करती है. यह दिन हमें खुद की खुशी और आत्म-सम्मान (Self-respect) को सबसे ऊपर रखने की सीख देता है, ताकि हम एक नई शुरुआत कर सकें.
‘किक डे’ मुख्य रूप से भारत और इसके आसपास के देशों में युवाओं के बीच काफी मशहूर है. हालांकि यह कोई सरकारी या आधिकारिक त्योहार नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया की वजह से अब यह अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों में भी काफी पसंद किया जाता है. दुनिया भर में जो लोग वैलेंटाइन डे को पसंद नहीं करते या अपने पुराने रिश्तों का दुख भुलाना चाहते है, वे इस दिन को एक मजेदार तरीके से मनाते है और सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं शेयर करते है.
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