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Home > मनोरंजन > इस गाने को गाते समय रफी साहब के गले से बहने लगा खून, सॉन्ग का नाम सुन फूट पड़ेंगे आंसू; जानें नाम

इस गाने को गाते समय रफी साहब के गले से बहने लगा खून, सॉन्ग का नाम सुन फूट पड़ेंगे आंसू; जानें नाम

Song Secrets: मोहम्मद रफी ने बॉलीवुड की दुनिया में अपनी आवाज में कई ऐसे संगीत दिए, जो अमर हो गए. एक गाना ऐसा था, जिसे गाते समय रफी साहब के गले से खून निकलने लगा था. चलिए जानते हैं सॉन्ग का नाम.

Written By: Kamesh Dwivedi
Last Updated: April 12, 2026 12:32:12 IST

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साल 1952 में आई एक फिल्म के लिए मोहम्मद रफी ने एक गाना गाया, जिसके लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी. बताया जाता है कि इस गाने के लिए रफी साहब ने 15 दिनों तक कई घंटे रियाज किया. फिर रिकॉर्डिंग करते समय गायक के गले से खून तक बहने लगा था. यह गाना सुनने के बाद लोगों को आंसू निकल पड़ते हैं. आखिर कौन सा है ये गाना?

कौन सा है सॉन्ग?

यह गाना 1952 में आई फिल्म ‘बैजू बावरा’ का है. गाने का नाम है ‘ओ दुनिया के रखवाले’. मोहम्मद रफी की आवाज में गाए गए इस गाने को नौशाद ने संगीतबद्ध किया था. वहीं इसके बोल लिखे थे, शकील बदायुनी. फिल्म में मुख्य भूमिका में भारत भूषण और मीना कुमारी मौजूद थे. 

क्या है फिल्म का किस्सा?

इस गाने के रोचक किस्से के जिक्र म्यूजिक डायरेक्टर नौशाद जी की बायोग्राफी ‘नौशाद नामा द लाइफ एंड म्यूजिक ऑफ नौशाद’ में भी किया गया है. फिल्म ‘बैजू बावरा’ में मोहम्मद रफी साहब ने ‘ओ दुनिया के रखवाले’ गाना गाया था. इस गाने के लिए रफी साहब ने कड़ी मेहनत की थी. उन्हें इस गाने के लिए लगभग 15 दिनों तक घंटों घंटों बैठकर रियाज करना पड़ता था , क्योंकि इस गाने के लिए उन्हें अपनी आवाज को काफी ऊंचे स्केल पर रखना पड़ता था. कहते हैं कि गाने की रिकॉर्डिंग के खत्म होने तक मोहम्मद रफी साहब के गले से खून तक बहने लगा था. उनके गले की हालत काफी खराब हो गई थी. बताया जाता है कि इस गाने के कई दिनों बात तक मोहम्मद रफी ने कोई गाना नहीं गाया. इतना ही नहीं, रफी साहब ने कभी अपनी समस्या को लेकर किसी को नहीं बताया. यही रफी साहब की पहचान थी. 

फिल्म के बारे में

विजय भट्ट द्वारा निर्देशित फिल्म ‘बैजू बावरा’ हिंदी संगीतमय रोमांटिक ड्रामा फिल्म है. यह फिल्म प्रकाश पिक्चर्स द्वारा निर्मित है. इस फिल्म की कहानी की बात करें, तो मुगल सम्राट अकबर की राजसभा में एक युवा संगीतकार बैजू, जो अपने पिता की मृत्यु के लिए तानसेन को दोषी मानता है. बदला लेने के लिए उस्ताद तानसेन को संगीत में द्वन्द के लिए चुनौती देता है. इसी आधार पर कहानी आगे बढ़ती है.

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Written By: Kamesh Dwivedi
Last Updated: April 12, 2026 12:32:12 IST

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साल 1952 में आई एक फिल्म के लिए मोहम्मद रफी ने एक गाना गाया, जिसके लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी. बताया जाता है कि इस गाने के लिए रफी साहब ने 15 दिनों तक कई घंटे रियाज किया. फिर रिकॉर्डिंग करते समय गायक के गले से खून तक बहने लगा था. यह गाना सुनने के बाद लोगों को आंसू निकल पड़ते हैं. आखिर कौन सा है ये गाना?

कौन सा है सॉन्ग?

यह गाना 1952 में आई फिल्म ‘बैजू बावरा’ का है. गाने का नाम है ‘ओ दुनिया के रखवाले’. मोहम्मद रफी की आवाज में गाए गए इस गाने को नौशाद ने संगीतबद्ध किया था. वहीं इसके बोल लिखे थे, शकील बदायुनी. फिल्म में मुख्य भूमिका में भारत भूषण और मीना कुमारी मौजूद थे. 

क्या है फिल्म का किस्सा?

इस गाने के रोचक किस्से के जिक्र म्यूजिक डायरेक्टर नौशाद जी की बायोग्राफी ‘नौशाद नामा द लाइफ एंड म्यूजिक ऑफ नौशाद’ में भी किया गया है. फिल्म ‘बैजू बावरा’ में मोहम्मद रफी साहब ने ‘ओ दुनिया के रखवाले’ गाना गाया था. इस गाने के लिए रफी साहब ने कड़ी मेहनत की थी. उन्हें इस गाने के लिए लगभग 15 दिनों तक घंटों घंटों बैठकर रियाज करना पड़ता था , क्योंकि इस गाने के लिए उन्हें अपनी आवाज को काफी ऊंचे स्केल पर रखना पड़ता था. कहते हैं कि गाने की रिकॉर्डिंग के खत्म होने तक मोहम्मद रफी साहब के गले से खून तक बहने लगा था. उनके गले की हालत काफी खराब हो गई थी. बताया जाता है कि इस गाने के कई दिनों बात तक मोहम्मद रफी ने कोई गाना नहीं गाया. इतना ही नहीं, रफी साहब ने कभी अपनी समस्या को लेकर किसी को नहीं बताया. यही रफी साहब की पहचान थी. 

फिल्म के बारे में

विजय भट्ट द्वारा निर्देशित फिल्म ‘बैजू बावरा’ हिंदी संगीतमय रोमांटिक ड्रामा फिल्म है. यह फिल्म प्रकाश पिक्चर्स द्वारा निर्मित है. इस फिल्म की कहानी की बात करें, तो मुगल सम्राट अकबर की राजसभा में एक युवा संगीतकार बैजू, जो अपने पिता की मृत्यु के लिए तानसेन को दोषी मानता है. बदला लेने के लिए उस्ताद तानसेन को संगीत में द्वन्द के लिए चुनौती देता है. इसी आधार पर कहानी आगे बढ़ती है.

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