82
सच्चा प्यार समय और मृत्यु से भी परे होता है, और इस बात को एक पति ने सच कर दिखाया है. अपनी दिवंगत पत्नी की याद को हमेशा के लिए जीवित रखने के लिए, एक शख्स ने ₹65 लाख (6.5 मिलियन) की भारी लागत से एक शानदार मंदिर का निर्माण करवाया है. बिहार के बालकिशुन राम ने अपनी दिवंगत पत्नी शारदा देवी की याद में ₹65 लाख की लागत से एक भव्य मंदिर बनवाया है. रिटायरमेंट के पैसों से बना यह मंदिर उनके अटूट प्रेम का प्रतीक है. पत्नी के त्याग और संघर्ष को सम्मान देने के लिए उन्होंने वहां उनकी प्रतिमा स्थापित कर इसे ‘श्रद्धा का मंदिर’ बनाया है.
रिटायरमेंट की पूरी पूंजी और ‘चाय’ का अनोखा भोग
बालकिशुन राम ने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई और रिटायरमेंट के मिले ₹65 लाख को अपनी पत्नी की याद में समर्पित कर दिया. उन्होंने केवल मंदिर ही नहीं बनवाया, बल्कि वह अपनी पत्नी को आज भी अपने पास महसूस करते है. शारदा देवी को चाय बहुत पसंद थी, इसलिए बालकिशुन राम रोज सुबह नियम से उनकी प्रतिमा के सामने एक प्याली गरम चाय रखते है. इसके अलावा, वह अपनी पत्नी की मूर्ति को हर दिन ताजे फूल चढ़ाते है और सुबह-शाम ठीक उसी तरह पूजा करते है जैसे किसी भगवान की जाती है.
पत्नी के गहनों से शुरू हुआ था कामयाबी का सफर
इस मंदिर को बनवाने के पीछे एक भावुक संघर्ष छिपा है. बालकिशुन बताते है कि एक समय ऐसा था जब उनके पास पढ़ाई और घर चलाने के पैसे नहीं थे. तब उनकी पत्नी शारदा देवी ने बिना सोचे-समझे अपने सोने के गहने बेच दिए थे ताकि बालकिशुन अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें और नौकरी पा सकें. आज वे जिस सम्मानजनक पद से रिटायर हुए है, उसका पूरा श्रेय वे अपनी पत्नी के उसी बलिदान को देते है. इसी अहसान और प्यार को चुकाने के लिए उन्होंने इस ‘प्रेम के मंदिर’ का निर्माण करवाया है.
आधुनिक दौर का ‘ताजमहल’
लोग इस मंदिर की तुलना ताजमहल से कर रहे है. जिस तरह शाहजहां ने मुमताज के लिए मकबरा बनवाया था, उसी तरह इस शख्स ने अपनी पत्नी की प्रतिमा स्थापित कर उसे एक मंदिर का रूप दिया है. उनका कहना है कि मेरी पत्नी मेरे लिए भगवान समान थी, और यह मंदिर उसे मेरी तरफ से एक छोटा सा तोहफा है.