Pharaoh marriage: क्या आपने कभी फराओ के बारे में सुना है. बता दें कि प्राचीन मिस्र में, अलग-अलग राजवंशों के शासकों को ‘फ़राओ’ (Pharaohs) के नाम से जाना जाता था.जानकारी के मुताबिक यहां राजा और रानी अक्सर भाई-बहन होते थे. खास तौर पर, एक भाई और एक बहन. राजा खुद को देवता मानता था, और अपनी बहन-रानी को देवी. बता दें कि ऐसी शादियों को उनकी परंपरा का एक ज़रूरी हिस्सा माना जाता था. इतना ही नहीं इस प्रथा को उनके धर्म और उनके शासन, दोनों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता था.
क्यों करता था भाई बहन से शादी
मिस्र में एक अनोखी परंपरा निभाई जाती थी. बता दें कि मिस्र में, इन शादियों के पीछे का मकसद रोमांटिक प्यार नहीं, बल्कि राजनीतिक सत्ता और पारिवारिक धन-संपत्ति को हमेशा के लिए सुरक्षित रखना होता था. जानकारी के मुताबिक मिस्र के शाही परिवार का मानना था कि भाई-बहनों के बीच शादी से उनके खून की शुद्धता बनी रहेगी और फ़राओ की सत्ता की वैधता हमेशा कायम रहेगी. साथ ही उनके धर्म और जाति के लोग तेजी से बढ़ेंगे. भाई-बहन की शादी के ऐसे उदाहरण सिर्फ़ मिस्र तक ही सीमित नहीं थे; इन्हें प्राचीन यूनान, जापान, हवाई और यूरोप के हैब्सबर्ग परिवारों में भी देखा जा सकता है. हालाँकि, ईसाई धर्म के संदर्भ में, इस प्रथा को अनैतिक माना जाता था. ये शादियाँ मुख्य रूप से सत्ता की राजनीति के कारण ही जारी रहीं.
इन राजाओं ने की अपनी बहनों से शादी
मिस्र की पौराणिक कथाओं के मुताबिक, देवता ओसिरिस और देवी आइसिस भाई-बहन थे. आपस में शादी करने से उनके बेटे होरस का जन्म हुआ. जिसे फ़राओ का ही साक्षात रूप माना जाता था. इसी वजह से, शाही परिवार ने इस परंपरा को हमेशा से ही गहरा धार्मिक महत्व दिया और आगे तक कायम रखा. कई राजवंशों के राजाओं जैसे खुफ़ू, खाफ़्रे और मेनकाउरे ने अपनी ही बहनों से शादी की. नतीजतन, बाद के राजवंशों में यह प्रथा और भी ज़्यादा प्रचलित हो गई. इसका सबसे मशहूर उदाहरण तुतनखामुन का है, जिसने अपनी बहन अंखेसेनमुन से शादी की थी.