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JEE Exam में करना है अच्छा स्कोर, तो इन बातों पर करें फोकस, IIT में एंट्री हो जाएगी आसान

JEE 2026 Exam Preparation: अगर आप जेईई की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और कम सिलेबस के साथ जेईई मेंस एग्जाम में अच्छा स्कोर करना चाहते हैं, तो दिए गए बातों को गौर से पढ़ें.

JEE 2026 Exam Preparation: इस दौर में ज़्यादातर JEE अभ्यर्थियों के मन में एक ही चिंता होती है कि क्या पूरा सिलेबस सच में कवर हो पाया है? यह चिंता बिल्कुल स्वाभाविक है, लेकिन सच्चाई यह है कि JEE Main में टॉप रैंक हासिल करने वाले छात्र हर टॉपिक नहीं पढ़ते, बल्कि वही पढ़ते हैं जो सबसे ज़्यादा स्कोर दिलाता है. परीक्षा नज़दीक आने पर सबसे बड़ा लक्ष्य होना चाहिए कम समय में अधिकतम अंक कैसे सुनिश्चित किए जाएं. इसका सबसे असरदार तरीका है हाई-वेटेज और बार-बार पूछे जाने वाले चैप्टर्स पर रणनीतिक फोकस.

पिछले कई वर्षों के JEE Main पेपर्स साफ संकेत देते हैं कि कुछ टॉपिक्स लगातार दोहराए जाते हैं. सवालों की भाषा बदल सकती है, लेकिन उनके पीछे का कॉन्सेप्ट लगभग वही रहता है. इसलिए स्मार्ट तैयारी का पहला नियम यही है कि पहले ज्यादा वेटेज वाले चैप्टर्स, बाद में कम महत्व वाले. यही रणनीति समय और मेहनत दोनों की बचत करती है.

फिजिक्स के इन टॉपिक्स पर कर सकते हैं फोकस

फिजिक्स की बात करें तो मॉडर्न फिजिक्स, करंट इलेक्ट्रिसिटी, सेमीकंडक्टर, कम्युनिकेशन सिस्टम, वर्क-एनर्जी-पावर और सिंपल सर्कुलर मोशन बेहद भरोसेमंद टॉपिक्स माने जाते हैं. इनसे आने वाले सवाल अक्सर एक तय पैटर्न पर आधारित होते हैं. यदि फॉर्मूले और बेसिक कॉन्सेप्ट साफ हैं, तो इन प्रश्नों को कम समय में और कम गलती के साथ हल किया जा सकता है. इन चैप्टर्स से जुड़े पिछले वर्षों के सवालों की नियमित प्रैक्टिस बेहद जरूरी है.

केमिस्ट्री है स्कोरिंग सब्जेक्ट

केमिस्ट्री को सही रणनीति से पढ़ा जाए तो यह सबसे बड़ा स्कोरिंग सब्जेक्ट बन सकती है. केमिकल काइनेटिक्स, रेडॉक्स रिएक्शन, सॉल्यूशंस, इलेक्ट्रोकेमिस्ट्री, जनरल ऑर्गेनिक केमिस्ट्री, नेम्ड रिएक्शंस और p-ब्लॉक एलिमेंट्स से लगातार प्रश्न पूछे जाते हैं. इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री में बार-बार रिवीजन फायदेमंद होता है, ऑर्गेनिक में रिएक्शन मैकेनिज्म और लॉजिक की समझ ज़रूरी है, जबकि फिजिकल केमिस्ट्री में सही फॉर्मूला और सटीक कैलकुलेशन अहम भूमिका निभाते हैं.

मैथ्स के इन चैप्टर्स पर रखें ध्यान

मैथ्स में भी कुछ चैप्टर्स साल दर साल दोहराए जाते हैं, जैसे सीक्वेंस एंड सीरीज़, क्वाड्रेटिक इक्वेशंस, प्रोबेबिलिटी, ट्रिग्नोमेट्री, डिफरेंशिएशन, डेफिनिट इंटीग्रल और कोऑर्डिनेट ज्योमेट्री. सवाल देखने में नए लग सकते हैं, लेकिन उनका ढांचा जाना-पहचाना होता है. पैटर्न समझते ही कठिन प्रश्न भी आसान लगने लगते हैं.

स्टूडेंट्स के लिए एक सीधा एक्शन प्लान होना चाहिए. सबसे पहले हाई-वेटेज चैप्टर्स की पहचान करें, उन्हें प्राथमिकता दें और रोज़ 30 से 40 पिछले साल के सवाल फोकस के साथ हल करें. सच्चाई यह है कि सही टॉपिक्स पर रणनीतिक मेहनत करके 25 से 30 प्रतिशत अंक पहले से सुरक्षित किए जा सकते हैं. परीक्षा करीब है, इसलिए दिशा बदलने का नहीं, बल्कि उसे सही करने का समय है. ज़्यादा पढ़ाई नहीं, सही पढ़ाई ही JEE Main में सफलता की असली चाबी है.

Munna Kumar

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