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कब लागू हुआ था पहला पे कमिशन? कितनी बढ़ी थी सरकारी कर्मचारियों की सैलरी

Pay Commission History: जनवरी 1946 में श्रीनिवास वरदाचारी की चेयरमैनशिप में बना पहला पे कमीशन मई 1947 में अपनी रिपोर्ट सौंप गया. इसका मुख्य काम सरकारी कर्मचारियों के लिए सैलरी स्ट्रक्चर को चेक करना और रिकमेंड करना था. कमीशन ने सरकारी स्टाफ के लिए एक अच्छा जीवन स्तर पक्का करने के लिए "लिविंग वेज" का सिद्धांत पेश किया. इसने कम से कम 55 रुपये प्रति महीना और ज़्यादा से ज़्यादा 2,000 रुपये प्रति महीना सैलरी का प्रस्ताव रखा.

Pay Commission History: 1947 में भारत की आज़ादी के बाद से सरकार ने अपने कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर को रिव्यू करने और रिकमेंड करने के लिए कई पे कमीशन बनाए हैं. हर कमीशन ने बदलते आर्थिक माहौल और एडमिनिस्ट्रेटिव जरूरतों को दिखाते हुए कम्पनसेशन फ्रेमवर्क को बनाने में अहम भूमिका निभाई है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर पहले वेतन आयोग से लेकर 7वें वेतन आयोग तक सरकारी कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में कितना बदलाव हो चुका है.

पहला पे कमीशन (1946-1947)

जनवरी 1946 में श्रीनिवास वरदाचारी की चेयरमैनशिप में बना पहला पे कमीशन मई 1947 में अपनी रिपोर्ट सौंप गया. इसका मुख्य काम सरकारी कर्मचारियों के लिए सैलरी स्ट्रक्चर को चेक करना और रिकमेंड करना था. कमीशन ने सरकारी स्टाफ के लिए एक अच्छा जीवन स्तर पक्का करने के लिए "लिविंग वेज" का सिद्धांत पेश किया. इसने कम से कम 55 रुपये प्रति महीना और ज़्यादा से ज़्यादा 2,000 रुपये प्रति महीना सैलरी का प्रस्ताव रखा.

  • चेयरमैन: श्रीनिवास वरदाचार्य.
  • मिनिमम वेज: ₹55 हर महीने.
  • मैक्सिमम वेज: ₹2,000 हर महीने.
  • बेनिफिशियरी: लगभग 15 लाख कर्मचारी

दूसरा पे कमीशन (1957-1959)

एक दशक बाद अगस्त 1957 में, जगन्नाथ दास को चेयरमैन बनाकर दूसरा पे कमीशन बनाया गया. इसने दो साल बाद अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें हर महीने 80 रुपये की मिनिमम सैलरी की सिफारिश की गई.

  • अध्यक्ष : जगन्नाथ दास
  • न्यूनतम वेतन : 80 रुपए प्रति माह की सिफारिश की गई
  • खास बात : समाजवादी प्रतिरूप को अपनाया गया.
  • लाभार्थी : लगभग 25 लाख कर्मचारी.

तीसरा पे कमीशन (1970-1973)

रघुबीर दयाल की अध्यक्षता में तीसरे पे कमीशन ने पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बीच सैलरी में बराबरी पर ज़ोर दिया. अपनी रिपोर्ट में, कमीशन ने पे स्ट्रक्चर में असमानताओं को दूर किया.

  • अध्यक्ष : रघुबीर दयाल
  • न्यूनतम वेतन : 185 रुपए प्रति माह की सिफारिश की गई
  • लाभार्थी : लगभग 30 लाख कर्मचारी.

चौथा पे कमीशन (1983-1986)

जून 1983 में पी एन सिंघल की अध्यक्षता में बनाए गए चौथे पे कमीशन ने चार साल में तीन फेज़ में अपनी सिफारिशें पेश कीं, जिसमें हर महीने 750 रुपये की मिनिमम सैलरी की सिफारिश की गई. इस कमीशन ने परफॉर्मेंस-लिंक्ड पे स्ट्रक्चर शुरू किया.

  • चेयरमैन : पीएन सिंघल
  • न्यूनतम वेतन : 750 रुपए प्रति माह की सिफारिश की गई.
  • लाभार्थी : 35 लाख से अधिक कर्मचारी.

पांचवां पे कमीशन (1994-1997)

9 अप्रैल 1994 को नोटिफाई किए गए पांचवें पे कमीशन की अध्यक्षता जस्टिस एस रत्नावेल पांडियन ने की थी. इसने सरकारी वर्कफोर्स में काफी कमी की सिफारिश की और पे स्केल की संख्या कम करने का प्रस्ताव दिया. कमीशन ने सरकारी ऑफिसों को मॉडर्न बनाने पर फोकस किया.

  • चेयरमैन : न्यायमूर्ति एस. रत्नावेल पांडियन
  • न्यूनतम वेतन : 2,550 रुपए प्रति माह की सिफारिश की गई.
  • लाभार्थी : लगभग 40 लाख कर्मचारी

छठा पे कमीशन (2006-2008)

छठा पे कमीशन, जिसे अक्टूबर 2006 में जस्टिस बी एन श्रीकृष्णा के अंडर बनाया गया था, ने मार्च 2008 में अपनी रिपोर्ट दी. इसने सैलरी में रुकावट को दूर करने और सैलरी स्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए रनिंग पे बैंड और ग्रेड पे का कॉन्सेप्ट पेश किया. इसने परफॉर्मेंस से जुड़े इंसेंटिव पर फोकस किया.

  • चेयरमैन: न्यायमूर्ति बीएन. श्री कृष्ण
  • न्यूनतम वेतन: 7,000 प्रति माह.
  • अधिकतम वेतन: 80,000 रुपए प्रति माह.
  • लाभार्थी : लगभग 60 लाख कर्मचारी

सातवां पे कमीशन

1 जनवरी, 2016 से लागू हुए सातवें पे कमीशन ने सैलरी, अलाउंस और पेंशन में कुल 23.55% की बढ़ोतरी की सिफारिश की. मिनिमम सैलरी 18,000 रुपये प्रति महीना तय की गई, और फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया.

  • अध्यक्ष: न्यायमूर्ति एके माथुर
  • न्यूनतम वेतन : 18,000 रुपए प्रति माह तक बढ़ाया गया.
  • अधिकतम वेतन : 2,50,000 रुपए प्रति माह.
  • लाभार्थी : एक करोड़ से अधिक (पेंशनहोल्डर्स के साथ).

आठवां पे कमीशन (16 जनवरी, 2025 को अनाउंस किया गया)

16 जनवरी 2025 को, यूनियन मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने आठवें पे कमीशन के गठन के लिए सरकार की मंज़ूरी की घोषणा की. हालांकि कुछ खास सिफारिशें अभी पेंडिंग हैं, लेकिन मौजूदा आर्थिक हालात के हिसाब से सैलरी में बड़े बदलाव की उम्मीद है.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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