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ज्वालामुखी फट रहे, धरती कांप रही… 2025 में बढ़ रहे खतरों ने वैज्ञानिकों की नींद उड़ाई

Volcanic Eruptions: 2025 में धरती की व्यवस्थाएं बहुत ज्यादा और एक साथ कई खतरों का सामना कर रही हैं जैसे बड़े ज्वालामुखी विस्फोट, तेज भूकंप, जंगल की आग और भयंकर बाढ़.

Science News: इथियोपिया में 12,000 साल में एक बार होने वाला ज्वालामुखी फटा, जिससे राख भारत और चीन तक फैल गई. भारी मॉनसून बारिश की वजह से भारत और पाकिस्तान के कई इलाकों में भयंकर बाढ़ आ गई. इंडोनेशिया में पिछले 30 दिनों में 1,400 से ज़्यादा भूकंप आए. कैलिफ़ोर्निया में लगी भयानक जंगल की आग ने 500 से ज़्यादा लोगों की जान ले ली. इन दिक्कतों के अलावा हाल ही में धरती ने 20 सालों में सबसे ताकतवर सोलर तूफ़ान देखा.

धरती के नीचे क्या हो रहा है?

ये कुछ ऐसी भयानक घटना हैं जिन्होंने धरती को हिला दिया है, और 2025 अभी खत्म नहीं हुआ है. साइंटिस्ट्स का कहना है कि 2025 में धरती के सिस्टम पर जो बहुत ज़्यादा दबाव है, वह किसी प्लैनेटरी कोलैप्स का संकेत नहीं है. बल्कि यह कुदरती बदलावों और इंसानों की वजह से हुए बदलावों का मिला-जुला नतीजा है.

सीस्मिक एक्टिविटी और खतरे

इस साल भी भूकंप आते रहे. ये भूकंप पैसिफिक ओशन के रिंग ऑफ़ फायर के आसपास तेज झटकों के रूप में आए. जिससे घनी आबादी वाले इलाके भी हिल गए. लेकिन पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि दुनिया भर में बड़े भूकंपों की संख्या में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है. औसतन हर साल धरती पर 7 या उससे ज़्यादा मैग्नीट्यूड के लगभग 15 भूकंप आते हैं, और इस साल भी इनकी संख्या लगभग इतनी ही है.

भारत और पाकिस्तान में बाढ़ का कारण

भारत और पाकिस्तान में भारी बारिश हुई. ऐसा इसलिए है क्योंकि गर्म एटमॉस्फियर ज़्यादा नमी लाता है, जिससे बादल फटते हैं और लंबे समय तक बाढ़ आती है. इससे नदियां शहर के नाले और पहाड़ी ढलानें भर गईं. मलेशिया और थाईलैंड में भी ऐसी ही घटना हुईं.

क्या इन घटनाओं के बीच कोई लिंक है?

साइंटिस्ट यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या क्लाइमेट चेंज समय के साथ भूकंप और ज्वालामुखियों पर असर डाल सकता है. जब बर्फ पिघलती है, रिज़र्वॉयर भर जाते हैं, या बहुत ज़्यादा बारिश होती है, तो जमीन की सतह पर वजन बदल जाता है. यह वजन जमीन के नीचे की दरारों और मैग्मा डिपॉज़िट पर दबाव को थोड़ा, लेकिन शायद काफ़ी हद तक बदल देता है.

इन घटनाओं से क्या पता चलता है?

इन घटनाओं से पता चलता है कि जमीन की प्लेटें धीरे-धीरे और लगातार गर्मी छोड़ रही हैं, जिससे भूकंप और ज्वालामुखी बढ़ रहे है. सूरज कभी शांत होता है तो कभी ज़्यादा खतरनाक. इससे कभी-कभी पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड और टेक्नोलॉजी पर असर पड़ता है. हमारा क्लाइमेट सिस्टम अब 1°C से ज़्यादा गर्म हो गया है, जिससे पानी से जुड़े बदलाव जैसे बाढ़, तूफ़ान, सूखा और जंगल की आग हो रही है.

Mohammad Nematullah

मोहम्मद नेमतुल्लाह, एक युवा पत्रकार हैं. इन्होंने आईटीवी नेटवर्क में इंटर्नशिप की और अब इंडिया न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रहे हैं. इन्हें सामाजिक मुद्दों और राजनीति के अलावा अन्य विषयों पर भी लिखने में पारंगत हासिल है. इनका मानना है कि पत्रकारिता का असली मकसद सच्ची और साफ़ जानकारी लोगों तक पहुंचाना हैं.

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