Kidney failure after delivery: दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में डिलीवरी के बाद एक युवा महिला की किडनी अचानक खराब हो गई और क्रिएटिनिन 7.0 mg/dL तक पहुंच गया. इमरजेंसी डायलिसिस के बाद जांच में एटिपिकल हेमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम (aHUS) की पहचान हुई. डॉक्टरों ने Eculizumab से इलाज शुरू किया, जिसके बाद प्लेटलेट्स, हीमोग्लोबिन और किडनी की कार्यक्षमता में सुधार हुआ और क्रिएटिनिन करीब 1.4 mg/dL तक आ गया.
डिलीवरी के बाद किडनी फेल
Kidney failure after delivery: बच्चे को जन्म देने के बाद मां और नवजात की सेहत पर खास नजर रखी जाती है, लेकिन प्रसव के बाद कुछ महिलाओं में ऐसी गंभीर मेडिकल जटिलताएं भी सामने आ सकती हैं, जिनका असर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है. दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां डिलीवरी के बाद एक युवा महिला की किडनी ने अचानक काम करना लगभग बंद कर दिया. हालत इतनी गंभीर हो गई कि उसका क्रिएटिनिन करीब 7.0 mg/dL तक पहुंच गया और किडनी को सपोर्ट देने के लिए इमरजेंसी डायलिसिस करनी पड़ी. जांच के बाद महिला में एक दुर्लभ बीमारी की पहचान हुई और डॉक्टरों ने Eculizumab दवा से इलाज शुरू किया. इसके बाद उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार आया और क्रिएटिनिन करीब 1.4 mg/dL तक पहुंच गया.
सर गंगाराम अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. वैभव तिवारी ने Aajtak.in को बताया कि बच्चे की डिलीवरी के बाद महिला के किडनी फंक्शन में अचानक गिरावट आने लगी थी. जांच में क्रिएटिनिन बढ़ा हुआ मिला, जबकि प्लेटलेट्स और हीमोग्लोबिन में भी खतरनाक स्तर तक कमी देखी गई. महिला की हालत को देखते हुए डॉक्टरों को किडनी को सपोर्ट देने के लिए इमरजेंसी डायलिसिस करनी पड़ी. डॉक्टरों के सामने चुनौती यह थी कि डिलीवरी के आसपास कई गंभीर बीमारियों के लक्षण एक-दूसरे से मिल सकते हैं. ऐसे में केवल शुरुआती लक्षणों के आधार पर बीमारी की सही वजह तक पहुंचना आसान नहीं था. मेडिकल टीम ने महिला के कई परीक्षण किए और इसके बाद जेनेटिक टेस्टिंग भी कराई गई.
जांच में महिला को एटिपिकल हेमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम यानी aHUS होने का पता चला. यह एक दुर्लभ स्थिति है, जिसमें शरीर की कंप्लीमेंट सिस्टम से जुड़ी असामान्य सक्रियता के कारण छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है और उनमें छोटे-छोटे रक्त के थक्के बनने लगते हैं. इसका असर खासतौर पर किडनी पर पड़ सकता है. इस बीमारी की वजह से महिला के खून से जुड़े पैरामीटर भी तेजी से प्रभावित हो रहे थे. प्लेटलेट्स और हीमोग्लोबिन में गिरावट के साथ किडनी की कार्यक्षमता भी काफी कम हो गई थी. बीमारी की सही पहचान होने के बाद डॉक्टरों के लिए इलाज की दिशा स्पष्ट हुई.
बीमारी की पहचान के बाद डॉक्टरों ने महिला का इलाज Eculizumab दवा से शुरू किया. यह दवा C5 नाम के प्रोटीन को ब्लॉक करती है और कंप्लीमेंट सिस्टम के उस हिस्से को रोकने में मदद करती है, जो रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने की प्रक्रिया में भूमिका निभाता है. इलाज के बाद महिला के प्लेटलेट्स और हीमोग्लोबिन में धीरे-धीरे सुधार आने लगा. इसके साथ ही किडनी की कार्यक्षमता भी बेहतर होने लगी. शुरुआत में जहां क्रिएटिनिन करीब 7.0 mg/dL तक पहुंच गया था और इमरजेंसी डायलिसिस की जरूरत पड़ी थी, वहीं उपचार के बाद यह करीब 1.4 mg/dL तक आ गया. महिला को दोबारा डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ी.
डॉ. वैभव के मुताबिक, aHUS जैसी रेयर स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती बीमारी की समय पर पहचान करना है. प्रसव के बाद होने वाली कमजोरी को कई बार सामान्य मान लिया जाता है, लेकिन कुछ लक्षण गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं. अगर डिलीवरी के बाद महिला को पेशाब कम आने लगे, अचानक शरीर में सूजन हो, बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो, सांस फूलने लगे, ब्लड प्रेशर बढ़ जाए या प्लेटलेट्स कम पाए जाएं, तो इसे केवल सामान्य पोस्टपार्टम कमजोरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे लक्षणों में समय पर मेडिकल जांच जरूरी हो सकती है, क्योंकि कुछ गंभीर स्थितियों में शुरुआती पहचान और सही इलाज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
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