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क्या सच में शरीर से टॉक्सिन्स निकालते हैं डिटॉक्स ड्रिंक्स? न्यूरोलॉजिस्ट से जानें क्यों किडनी और लिवर के लिए खतरनाक हो सकते हैं ये ड्रिंक्स

Health Risks of Detox Drinks: सोशल मीडिया पर इन दिनों 'बॉडी डिटॉक्स' का ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है. कभी चुकंदर का शॉट, कभी करेला-गाजर का जूस, तो कभी लौकी का ड्रिंक-हर हफ्ते कोई नया नुस्खा सामने आ जाता है. दावा किया जाता है कि ये ड्रिंक्स शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालकर लिवर और किडनी को साफ कर देते हैं.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: February 27, 2026 12:53:30 IST

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 Detox Drinks: डिटॉक्स ड्रिंक्स को शरीर से टॉक्सिन्स निकालने और लिवर साफ करने का दावा किया जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार हमारा लिवर और किडनी पहले से ही 24 घंटे शरीर को डिटॉक्स करने का काम करते हैं. इन जूस का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. उल्टा, ज्यादा पोटैशियम, ऑक्सालेट या केवल लिक्विड डाइट किडनी, लिवर और दिल के लिए नुकसानदायक हो सकती है. बेहतर स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, व्यायाम और अच्छी नींद ज्यादा असरदार हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक, हमारा शरीर कोई जाम पाइप नहीं है जिसे बाहर से साफ करने की जरूरत पड़े. यह एक जटिल और स्वयं नियंत्रित जैविक प्रणाली है, जिसमें कई अंग लगातार शरीर को संतुलित रखने का काम करते हैं.

 क्या शरीर को डिटॉक्स ड्रिंक की जरूरत पड़ती है?

डॉ सुधीर कुमार ,न्यूरोलॉजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल्स, हैदराबाद  के अनुसार  असल में, शरीर में पहले से ही ‘डिटॉक्स सिस्टम’ मौजूद है.

  • लिवर: दवाइयों, शराब, हार्मोन और शरीर में बनने वाले अपशिष्ट पदार्थों को प्रोसेस करके उन्हें बाहर निकालने योग्य बनाता है.
  • किडनी : रोजाना लगभग 150 से 180 लीटर रक्त को फिल्टर करती हैं और यूरिया, क्रिएटिनिन व अतिरिक्त नमक जैसे अपशिष्ट बाहर निकालती हैं.

यदि ये अंग सामान्य रूप से काम कर रहे हैं, तो किसी खास जूस की आवश्यकता नहीं होती. और अगर इनमें समस्या है, तो कोई भी घरेलू डिटॉक्स ड्रिंक उसे ठीक नहीं कर सकता.

 क्या डिटॉक्स जूस नुकसान भी पहुंचा सकते हैं?

कुछ मामलों में ऐसे जूस फायदे की जगह खतरे बढ़ा सकते हैं-

  • किडनी रोग में खतरा: चुकंदर, टमाटर और लौकी में पोटैशियम अधिक होता है. ज्यादा पोटैशियम दिल की धड़कन को असामान्य बना सकता है.
  • पथरी की समस्या: चुकंदर और पालक में ऑक्सालेट अधिक होता है, जो किडनी स्टोन का खतरा बढ़ा सकता है.
  • डायबिटीज के मरीजों के लिए जोखिम: जूस बनाने पर फाइबर कम हो जाता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है.
  • लिवर रोग: ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि ये जूस फैटी लिवर या फाइब्रोसिस को ठीक कर सकते हैं.
  • सिर्फ लिक्विड डाइट का खतरा: लंबे समय तक केवल तरल पदार्थ लेने से शरीर में सोडियम की कमी (हाइपोनेट्रेमिया) हो सकती है.

विज्ञान क्या कहता है?

अब तक ऐसा कोई मजबूत क्लीनिकल प्रमाण सामने नहीं आया है जो यह साबित करे कि डिटॉक्स जूस वजन घटाने या शरीर की सफाई में विशेष भूमिका निभाते हैं.

डिटॉक्स के बाद लोग बेहतर इसलिए महसूस कर सकते हैं क्योंकि वे प्रोसेस्ड फूड कम खाते हैं, पानी ज्यादा पीते हैं और कैलोरी कम लेते हैं, न कि इसलिए कि शरीर से कोई विशेष ‘टॉक्सिन फ्लश’ हुआ हो.

 

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Written By: Shivashakti narayan singh
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