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प्रीमेच्‍योर डिलीवरी के लिए रहें तैयार..! अगर प्रेग्नेंसी में करेंगी मोबाइल का यूज, सीमित स्क्रीन टाइम ही समझदारी

Mobile Phone During Pregnancy: डॉक्टर कहती हैं कि, प्रेग्‍नेंसी के दौरान मोबाइल फोन के अधिक इस्‍तेमाल से पेट में पल रहे बच्‍चे के विकास पर बुरा असर पड़ता है. कई बार, प्रीमेच्‍योर डिलीवरी तक की नौबत आ सकती है. अब सवाल है कि आखिर, प्रेग्‍नेंसी के दौरान मोबाइल के अधिक यूज से बच्‍चे को क्‍या नुकसान हो सकते हैं? इस बारे में बता रही हैं एम्स की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. ज्योत्सना देवी-

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: February 27, 2026 14:41:26 IST

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Mobile Phone During Pregnancy: गर्भावस्था एक खूबसूरत यात्रा है, जिसमें कई शारीरिक और भावनात्मक बदलाव होते हैं. इसलिए इस दौरान हेल्थ एक्सपर्ट तमाम चीजों से सावधानी बरतने की सलाह देते हैं. मोबाइल का यूज भी ऐसी ही चीजों में से एक है. आज के डिजिटल युग में, गर्भवती माताएं अक्सर खुद को स्क्रीन के समय में डूबी हुई पाती हैं, चाहे वह काम के लिए हो, आराम के लिए हो या फिर कनेक्ट रहने के लिए. ये आदत ने सिर्फ एक मां को, बल्कि की सेहत को भी बिगाड़ सकती है. डॉक्टर कहती हैं कि, प्रेग्‍नेंसी के दौरान मोबाइल फोन के अधिक इस्‍तेमाल से पेट में पल रहे बच्‍चे के विकास पर बुरा असर पड़ता है. कई बार, प्रीमेच्‍योर डिलीवरी तक की नौबत आ सकती है. गौर करने वाली बात ये है कि, केवल मां ही नहीं, अगर मां के आसपास भी कोई वायरलेस चीजों का अधिक इस्‍तेमाल कर रहे हैं तो भी इसका असर भ्रूण में पल रहे बच्‍चे की सेहत पड़ सकता है. अब सवाल है कि आखिर, प्रेग्‍नेंसी के दौरान मोबाइल के अधिक यूज से बच्‍चे को क्‍या नुकसान हो सकते हैं? इस आदत से कैसे करें बचाव? इस बारे में India News को बता रही हैं एम्स रायबरेली की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. ज्योत्सना देवी-

गर्भावस्था में स्क्रीन टाइम सीमित करना जरूरी क्यों?

डॉक्टर कहती हैं कि, अत्‍यधिक मोबाइल रेडिएशन में अगर गर्भवती मां रहती है तो जन्‍म के बाद बच्‍चे को जीवन भर बिहेवियर प्रॉब्‍लम से गुजरना पड़ता है. बता दें कि, चमकीले नीले रंग की आयताकार स्क्रीन को घूरते रहने से आपकी आंखों को नुकसान पहुंच सकता है. एक अध्ययन से पता चला है कि जो गर्भवती महिलाएं सेल फ़ोन का बहुत ज़्यादा उपयोग करती हैं, उनके बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्याएं होने की संभावना अधिक होती है. यही नहीं, गर्भ में पल रहे बच्‍चे के मानसिक विकास पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है.

वायरलेस डिवाइस सेहत पर कैसे करती वार?

जब हम मोबाइल, लैपटॉप या किसी भी तरह के वाइफाई या वायरलेस डिवाइस के संपर्क में आते हैं तो इससे हर वक्‍त इलेक्‍ट्रोमैग्‍नेटिक रेडियो वेव्‍स निकलते रहते हैं. ये वेव्‍स हमारे शरीर के डीएनए को डैमेज करने की क्षमता रखते हैं और हमारे शरीर में बन रहे जीवित सेल्‍स के मोलक्‍यूल्‍स को बदल सकते हैं. जिसका असर लॉग टर्म काफी खतरनाक हो सकता है. चूंकि भ्रूण हर वक्‍त ग्रोथ कर रहा है ऐसे में उसके डीएनए और लीविंग सेल्‍स आसानी से इसकी चपेट में आ सकते हैं.

अधिक मोबाइल यूज भ्रूण के लिए कैसे खतरनाक?

अलग-अलग शोधों में पाया गया कि मोबाइल के इस्‍तेमाल से बच्‍चे की सेहत पर क्या असर पड़ेगा. लेकिन, एक्सपर्ट कहती हैं कि, अगर मां और बच्‍चा 24 घंटे मोबाइल रेडिएशन के बीच है तो बच्‍चे की मेमोरी, ब्रेन ग्रोथ, प्री मेच्‍योर डिलीवरी और बिहेवियर में खतरनाक रूप से समस्‍या आ सकती है. प्री और पोस्‍ट डिलीवरी के बाद ऐसे बच्‍चों में हाइपरटेंशन की समस्‍या हो सकती है जो समय के साथ बढ़ती जाती है. यही नहीं, बच्‍चे की भाषा, संचार पर भी इसका बुरा असर पड़ता है.

इस तरह करें बचाव

  • घर में जहां तक हो सके वाई फाई या ब्‍लूटूथ उपकरणों का इस्‍तेमाल कम करें.
  • बेहतर होगा अगर आप मोबाइल की बजाय लैंड लाइन फोन का इस्‍तेमाल करें.
  • रेडियो, माइक्रोवेव, एक्‍सरे मशीन आदि से दूरी बनाएं.
  • मोबाइल टावर आदि के आस पास घर ना लें.

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