Metformin Works in Brain: दुनियाभर में डायबिटीज से पीड़ितों की फेहरिस्त लंबी है. एक आंकड़ों के मुताबिक, 17 फीसदी डायबेटिक मरीजों के साथ इस रोग में भारत पहले नंबर पर है. इसीलिए भारत को डायबिटीज की राजधानी कहा गया है. यह बीमारी इतनी खतरनाक है कि, हाई ब्लड शुगर की वजह से शरीर के कई अंग गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, HbA1c टेस्ट रिपोर्ट 5.7 से कम हो, तो ही इसे नॉर्मल माना जा सकता है. लेकिन, 6.5 या इससे अधिक आने पर मरीज को डायबेटिक माना जाएगा. इससे बात साफ है कि, टाइप-2 डायबिटीज की पहचान के लिए केवल HbA1c टेस्ट पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है. टाइप 2 डायबिटीज की स्थिति में डॉक्टर आमतौर पर मेटफॉर्मिन लेने की सलाह देते हैं. लेकिन, हाल ही में हुए एक रिसर्च ने सभी चौंका दिया.
हाल ही में हुए एक शोध में टाइप-2 डायबिटीज मरीजों के लिए कुछ महत्वपूर्ण जानकारी है. यह स्टडी टाइप 2 डायबिटीज कंट्रोल करने वाले मेटफॉर्मिन सॉल्ट को लेकर है. इसको लेकर जहां एक तरफ डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छी खबर है, वहीं दूसरी तरफ एक बड़ा खतरा भी मंडरा रहा है. अब सवाल है कि आखिर, मेटफॉर्मिन सॉल्ट क्या है? टाइप 2 डायबिटीज में मेटफॉर्मिन कितनी कारगर? मेटफॉर्मिन का दिमाग पर क्या असर? क्या मेटफॉर्मिन के कोई नुकसान भी हैं? इस बारे में India News को बता रहे हैं अपोलो हॉस्पिटल नोएडा के सीनियर एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. बीके रॉय-
क्या कहती है नई रिसर्च
साइंस डेली की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 60 वर्षों से अधिक समय से, मेटफॉर्मिन टाइप 2 मधुमेह के लिए प्राथमिक उपचार रहा है, फिर भी वैज्ञानिक इसके काम करने के तरीके को पूरी तरह से नहीं समझ पाए हैं. Baylor College of Medicine के शोधकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर अब मेटफॉर्मिन के प्रभावों के पीछे एक गंभीर कारक की पहचान की है. दावा है कि, मेटफॉर्मिन सिर्फ शरीर के अंगों (जैसे लीवर) पर ही नहीं, बल्कि दिमाग (ब्रेन) के जरिए भी ब्लड शुगर को नियंत्रित करती है. अब तक माना जाता था कि मेटफॉर्मिन मुख्य रूप से लीवर में ग्लूकोज (शुगर) बनने की प्रक्रिया को कम करके काम करती है. लेकिन, नई रिसर्च में पता चला है कि, मेटफॉर्मिन ब्रेन में एक खास सिग्नलिंग पाथवे को सक्रिय करती है. यह पाथवे शरीर में शुगर लेवल को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है. यानी दवा का असर ‘ब्रेन-टू-बॉडी’ सिस्टम के जरिए भी होता है.
Rap1 प्रोटीन और दिमाग की भूमिका
शोध में एक छोटे प्रोटीन Rap1 पर ध्यान दिया गया है. बता दें कि, यह प्रोटीन दिमाग के VMH (Ventromedial Hypothalamus) में मौजूद होता है. मेटफॉर्मिन इस Rap1 की गतिविधि को कम करके ब्लड शुगर घटाने में मदद करती है.
मेटफॉर्मिन सॉल्ट क्या है?
डॉ. रॉय के मुताबिक, मेटफॉर्मिन टाइप 2 मधुमेह के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दवा है. यह टाइप 2 डायबिटीज रोगी के ब्लड शुगर को कंट्रोल करती है और शरीर को इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में मदद करती है. इस दवा का सेवन करते समय, स्वास्थ्य सेवा प्रदाता आपके आहार और व्यायाम में बदलाव करने का सुझाव दे सकते हैं.
मेटफॉर्मिन मस्तिष्क में कैसे करता काम?
टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) एक लंबे समय तक चलने वाली गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता (इंसुलिन प्रतिरोध) या पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता है. ऐसा होने से ब्लड में ग्लूकोज (शुगर) का स्तर बढ़ जाता है. यह आमतौर पर जीवनशैली, मोटापे और अनुवांशिक कारणों से होता है, जिसे हेल्दी डाइट, व्यायाम और दवा से कंट्रोल किया जा सकता है.
क्या मेटफॉर्मिन के नुकसान भी हैं?
डॉ. बीके रॉय कहते हैं कि, टाइप 2 डायबिटीज में दी जाने वाली दवाओं में मेटफॉर्मिन सबसे ऊपर है. हालांकि, हम डॉक्टर जब भी किसी को इस दवा की सलाह देते हैं तो कुछ एहतियात के साथ. क्योंकि, मेटफॉर्मिन (Metformin) के नुकसान और साइड इफेक्ट्स भी होते हैं. बता दें कि, मेटफॉर्मिन लेने की सबसे आम समस्या जी मिचलाना, दस्त, गैस, पेट फूलना और पेट खराब होना है. कहने का सीधा मतलब है अगर आप इसको ठीक तरह से नहीं लेंगे आपका जीआई डिस्टर्ब हो जाएगा. वहीं, अन्य साइड इफेक्ट्स की बात करें तो, मेटफॉर्मिन लेने पर विटामिन बी12 कमी हो सकती है.
डॉक्टर की सलाह
डॉक्टर कहते हैं कि, लिवर, किडनी और हार्ट के मरीजों को इस दवा को लेने से बचना चाहिए, या डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए. क्योंकि, मेटफॉर्मिन लेने से शरीर में लैक्टिक एसिड जमा हो जाता है, जिससे थकान, सांस लेने में तकलीफ, बेहोशी और मांसपेशियों में तेज दर्द हो सकता है. यही नहीं, कभी-कभार इस दवा को लेने से कई बार वजन में हल्की कमी, सिरदर्द या स्किन पर दाने भी हो सकते हैं.
डॉ. रॉय कहते हैं कि, हम टाइप 2 डायबिटीज मरीज को मेटफॉर्मिन सहूलियत के साथ लेने की सलाह देते हैं. सबसे पहले मरीज का विटामिन बी12 की जांच करता हूं, क्योंकि भारत में इस विटामिन की कमी होना बहुत कॉमन है. अगर किसी मरीज में विटामिन बी12 की कमी होती है तो पहले उसकी कमी पूरी करते हैं. इसके बाद साल में कम से कम 1 बार तो विटामिन बी12 की जांच जरूर करने की सलाह देते हैं.