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Women’s Day 2026: 30 साल के बाद महिलाएं जरूर कराएं ये चेकअप, गंभीर बीमारियों खतरा होगा कम, देखें जरूरी टेस्ट

International Women’s Day 2026: दुनियाभर में आज यानी 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day 2026) मनाया जा रहा है. यह दिन समाज को याद दिलाता है कि महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार, सम्मान और अवसर मिलने चाहिए. अगर बात सेहत की करें तो हर महिला को 30 साल की उम्र पार करते ही हर 6 माह में एक बार रुटीन चेकअप जरूर करवाना चाहिए. अब सवाल है कि आखिर 30 की उम्र के बाद रुटीन चेकअप क्यों कराना चाहिए? इस बारे में बता रही हैं गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा पाठक-

International Women’s Day 2026: दुनियाभर में आज यानी 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day 2026) मनाया जा रहा है. यह दिन समाज को याद दिलाता है कि महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार, सम्मान और अवसर मिलने चाहिए. बता दें कि, इस दिन की जड़ें 20वीं सदी की शुरुआत में महिलाओं के श्रमिक आंदोलनों से जुड़ी हैं. ऐसे में महिलाओं से जुड़ी तमाम बातें होती हैं. अगर बात सेहत की करें तो यह एक ऐसा विषय है, जिसे किसी दिन विशेष पर नहीं, हर रोज होनी चाहिए. क्योंकि, एक नारी ही तो है जो पारिवारिक और ऑफिस की जिम्मेदारी निभाते-निभाते खुद का ध्यान रखना भूल जाती हैं. लेकिन, अगर आप ऐसा करती हैं तो यकीन मानिए आप गलत कर रही हैं. हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, स्वस्थ महिला समाज का आईना होती है. इसलिए हर महिला को 30 साल की उम्र पार करते ही हर 6 माह में एक बार रुटीन चेकअप जरूर करवाना चाहिए. अब सवाल है कि आखिर 30 की उम्र के बाद रुटीन चेकअप क्यों कराना चाहिए? 30 के बाद किन बीमारियों का रहता है खतरा? क्या सावधानी रखनी चाहिए? इस बारे में India News को बता रही हैं नोएडा की सीनयर मेडिकल ऑफिसर एवं गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा पाठक- 

30 के बाद रुटीन चेकअप क्यों जरूरी?

डॉ. पाठक कहती हैं कि, 30 की उम्र के बाद हर माह रुटीन चेकअप से आपकी आयु लंबी हो जाएगी. दरअसल, समय पर चेकअप होने से किसी भी गंभीर बीमारी का आपको सामना नहीं करना पड़ेगा. बता दें कि, आजकल बहुत ही कम लोग रुटीन मेडिकल चेकअप करवाते हैं. इसी का नतीजा है कि, युवाओं में शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां 35 तक की आयु में हो जाती हैं. 

बीमारियों का खतरा क्यों बढ़ा?

डॉक्टर कहती हैं कि, हर व्यक्ति को इस बात को समझना होगा कि, वर्तमान में हम पेस्टिसाइट से मिला हुआ खाना खा रहे हैं. जो ऑक्सीजन हमारे अंदर जा रही है, वह पूरी तरह से शुद्ध नहीं है. शारीरिक गतिविधि बेहद कम हो चुकी है. ऐसे में कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए यदि आप भी 30 वर्ष की उम्र पार चुके हैं तो रुटीन चेकअप जरूर कराएं.

30 के बाद सेहत के प्रति अधिक सजगता क्यों?

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल की वजह से युवा अपनी सेहत के प्रति जागरूक नहीं हैं. बीमारी पता लगने के बाद भी कई लोग नियमित व अनुशासित रूप से दवाई तक नहीं लेते हैं. अगर बात किडनी ट्रांस्प्लांट की करें तो 100 में से 40 प्रतिशत ऐसे मरीज हैं, जो दवाई लेना छोड़ देते हैं. नतीजा, एक या दो वर्ष में फिर से किडनी में समस्या आने लगती है. इसमें सबसे ज्यादा औसत युवाओं का है. किडनी के ट्रांस्प्लांट वाले व्यक्ति को नियमित दवाई लेना बहुत जरूरी है. दवा लेने में भी सबसे ज्यादा लापरवाही युवा ही दिखाते हैं.

देर से शादी करने पर गर्भाशय पर पड़ सकता असर

डॉक्टर का मानना है कि अब उम्र सीमा बीत जाने के बाद लोग शादी कर रहे हैं. हर युवा जोड़ा करीब 30 से 35 वर्ष के बीच शादी कर रहा है. इससे महिला का गर्भाशय उतना बेहतर नहीं होता. गर्भधारण के बाद गर्भस्थ शिशु के अंगों का विकास होता है, लेकिन आंतरिक अंग कमजोर होने की वजह से बच्चों में किडनी से जुड़े केस सामने आ रहे हैं. नवजात बच्चे का उस तरह से विकास नहीं हो पा रहा है, जैसे कि एक निश्चित उम्र में शादी करने वाली महिला द्वारा जन्मे बच्चे में होना चाहिए.

30 की उम्र के बाद कौन-कौन से टेस्ट जरूरी

पैप स्मीयर (Pap Smear) और HPV टेस्ट: इस टेस्ट के जरिए सर्विक्स में होने वाले असामान्य बदलावों का पता चलता है. 21 साल की उम्र के बाद हर 3 साल में यह टेस्ट करवाना चाहिए. 30 साल के बाद डॉक्टर की सलाह पर इसके साथ HPV टेस्ट भी जोड़ा जा सकता है.

मैमोग्राफी (Mammography): ब्रेस्ट कैंसर का शुरुआती स्टेज पर पता चलने से इलाज सफल होने की संभावना लगभग 100% तक होती है. 40 साल की उम्र के बाद हर साल या दो साल में एक बार मैमोग्राफी जरूर करवाएं.

थायरॉइड फंक्शन टेस्ट (TFT): यह टेस्ट खून में T3, T4 और TSH के स्तर को मापता है. थायराइड असंतुलन फर्टिलिटी को भी प्रभावित कर सकता है. आमतौर पर 30 की उम्र के बाद साल में एक बार जांच जरूर करानी चाहिए.

बोन डेंसिटी टेस्ट (DEXA Scan): यह टेस्ट हड्डियों की मजबूती और कैल्शियम की कमी को मापता है. इससे भविष्य में फ्रैक्चर के जोखिम को कम किया जा सकता है. 50 साल की उम्र के बाद या मेनोपॉज के लक्षण शुरू होने पर यह टेस्ट जरूर करवाएं.

ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल (Diabetes & Cholesterol): इस टेस्ट के जरिए कोलेस्ट्रॉल के स्तर का पता चलता है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद करता है. वहीं, ब्लड शुगर टेस्ट डायबिटीज की पहचान करता है. 30 के बाद साल में कम से कम एक बार ये दोनों टेस्ट जरूर कराएं.

Lalit Kumar

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