Aniruddhacharya Maharaj: कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. बता दें कि, वे पर्सनलिटी राइट्स को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे थे. कोर्ट ने अनिरुद्धाचार्य महाराज के मामले की सुनवाई करते हुए पहले उनकी मांग को माना फिर शंकराचार्य का हवाला देते हुए लताड़ भी लगाई. जानिए कोर्ट ने क्या कहा.
जानिए, अचानक क्यों चर्चा में अनिरुद्धाचार्य.
Aniruddhacharya Maharaj Goes to HC: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 मार्च 2026 को जमानत दे दी थी. लेकिन, अब कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज की चर्चा का विषय बन गए हैं. बता दें कि, अनुरुद्धाचार्य आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. बता दें कि, बॉलीवुड सेलेब्स के बाद अनिरुद्धाचार्य महाराज ने पर्सनलिटी राइट्स को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए शिकायत में शामिल सभी वीडियो/लिंक्स को यूट्यूब से हटाने का आदेश दिया है.
कथावाचक अनिरुद्धाचार्य का पक्ष पेश करने वाले वकील ने बताया कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उनके नाम और वीडियो का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है. यही नहीं, कुछ जगहों पर उनके वीडियो या AI से बने कंटेंट को इस तरह दिखाया जा रहा है जैसे वह खुद बोल रहे हों. मगर ऐसा बिलकुल नहीं है. वकील की दलील है कि, सोशल मीडिया जो सर्कुलेट हो रहा है, उसके चलते लोग कथावाचक को गंभीरता से नहीं लेंगे.
गूगल की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जहां तक यूट्यूब का सवाल है, अगर कोई वीडियो या कंटेंट एआई-जनरेटेड या गलत तरीके से बनाया गया है, तो उसे हटाया जा सकता है. गूगल ने कहा कि जिन लिंक की शिकायत अनिरुद्धाचार्य की ओर गई है, उनमें से कुछ फैन पेज के वीडियो भी हैं. इन वीडियो में अनिरुद्धाचार्य के कुछ पुराने बयान दिखाए गए हैं, जिनमें महिलाओं या विज्ञान से जुड़ी टिप्पणियों पर लोग आलोचना या सवाल उठा रहे हैं. हालांकि इसके साथ ही कथावाचक को राहत देते हुए कोर्ट ने सामाग्री को हटाने का आदेश दे दिया है.
इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि इस मामले के लिए वृंदावन का होने के बावजूद दिल्ली हाईकोर्ट का रुख क्यों किया, क्यों सभी को दिल्ली से इतना प्यार है. हाईकोर्ट की तरफ से कहा गया कि देश में और भी अदालतें हैं. अगर वो आदेश पास करेंगी तो क्या गूगल उसे नहीं मानेगा. कलकत्ता से लेकर इलाहाबाद और लखनऊ की अदालतें क्या इसमें आदेश पास नहीं कर सकतीं. दिल्ली से आपको इतना प्रेम क्यों है.
जस्टिस तुषार राव गेड़ेला ने अनिरुद्धाचार्य महाराज से कहा कि आप तो धार्मिक गुरु हैं और आपको तो आलोचना, प्रशंसा या पहचान जैसी बातों से प्रभावित नहीं होना चाहिए. आपको तो इन सबसे ऊपर होना चाहिए. कोर्ट ने आदि शंकराचार्य का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने कभी आलोचना करने वालों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा नहीं किया है, क्योंकि वे असहमति रखने वालों से तर्क करते है, बहस करते हैं बल्कि कोर्ट में आकर केस नहीं करते. ऐसे में जब तक कोई बात वास्तव में मानहानिकारक हो, तब तक केवल असहमति को गलत नहीं माना जा सकता. अब मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी.
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