गृहमंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में नक्सलवाद को खत्म करने को लेकर भाषण दिया. इसमें उन्होंने नक्सलवाद और नक्सलवादियों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जो गोली चलाएगा उन्हें उसकी कीमत भी चुकानी होगी. जो बंदूक डाल देगा, उन्हें पुनर्वास कराया जाएगा.
नक्सलवाद पर गृह मंत्री अमित शाह का भाषण
Home Minister Speech on Naxalism: गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खात्मे के लिए 31 मार्च की डेडलाइन तय की थी. अब वो तारीख आने वाली है. इसी विषय पर गृह मंत्री ने लोकसभा में चर्चा की. लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर चर्चा शिवसेना के मंत्री सांसद डॉक्टर श्रीकांत शिंदे ने शुरू की. इसके बाद गृह मंत्री ने बोलना शुरू किया और विपक्षी दल कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि विकास को वामपंथी उग्रवाद ने पहुंचने ही नहीं दिया भोले भाले आदिवासियों के हाथों में बंदूकें थमा दीं.
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 1970 से 2004 के बीच में माओवाद फैला था. इस दौरान केवल 4 साल छोड़कर पूरे समय कांग्रेस की सरकार रही. माओवादियों ने इंदिरा गांधी को समर्थन दिया था. सत्ता के समर्थन के बगैर रेड कॉरिडोर संभव ही नहीं था. जिन हथियारों से नक्सलवादियों ने हमला किया जाता था, उनमें से 92 प्रतिशत हथियार पुलिस से लूटे होते थे. उन्होने कहा कि ये लोग कहते हैं कि इनके साथ अन्याय हो रहा है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप हथियार उठा लेंगे और संविधान को नहीं मानेंगे.
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर में लाल आतंक की परछाई थी, इसलिए वहां विकास नहीं हो पाया.राजकुमार रौत जैसे साथी कह रहे हैं कि आदिवासियों का विकास नहीं हुआ. 70 में से 60 साल तो कांग्रेस की सरकार रही और फिर क्यों विकास नहीं हुआ? आज आप हिसाब दीजिए कि आपने विकास क्यों नहीं किया? वहां के लोग 20 से ज्यादा सालों तक गरीबी में रहे. 20 हजार से ज्यादा युवा मारे गए. इन सबका जिम्मेदार कौन है?
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने देश के सामने स्वीकार किया था कि सबसे बड़ी आंतरिक समस्या हथियारी माओवाद है. इसके बावजूद भी कांग्रेस कुछ नहीं कर पाई. नरेंद्र मोदी की सरकार में बहुत से शुभ कार्य हुए हैं. नक्सलमुक्त भारत भी इसी में हो रहा है. हम नक्सल मूवमेंट के खात्मे को नंबर एक पर रखेंगे. अब तक 706 नक्सली मारे गए हैं. उन्होंने कहा कि नक्सलवाद को खत्म करने में सीएपीएफ, कोबरा, छत्तीसगढ़ पुलिस और आदिवासी बाशिंदों को इसका श्रेय जाता है. अगर उनका सहयोग न होता, तो ये मुमकिन नहीं था.
उन्होंने कहा कि अन्याय से लड़ने के और तरीके होते है. यह तरीके लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार करते हैं. माओवाद नक्सलियों के दिन लद गए हैं. 20 हजार लोग मारे गए हैं. भारत में माओवादी विचारधारा अपना एजेंडा खो बैठी. भोले भाले आदिवासियों को इनफॉर्मर बताकर फांसी दे दी गई. नक्सलियों ने पैरेलल सरकार चलाई चुनाव नहीं होने दिए सरपंच वह चुनते थे.
साथ ही गृहमंत्री ने नक्सलवादियों के लिए एक मैसेज छोड़ा कि आप हथियार डालिए सरकार आपका पुनर्वास करेगी. कुछ लोगों का पुनर्वास कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि हमने केवल उन्हीं लोगों से चर्चा की, जिन्होंने हथियार डाले और जिसने गोली चलाईं, उसका जवाब गोलियों से दिया गया.
गृहमंत्री अमित शाह ने जवान शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इस समस्या के कारण हजारों युवा मारे गए. कई जवान भी शहीद हो गए. पूरे सदन की ओर से मैं उन सभी को श्रद्धांजलि देता हूं. उन्होंने कहा कि माओवादी विचारधारा जो है, उसका विकास से कोई लेना-देना नहीं है.
अमित शाह ने कहा कि हम जब आजाद हुए, तो हमें सत्यमेव जयते वाक्य मिला. वहीं माओवाद का ध्रुव वाक्य ‘सत्ता बंदूक की नली से निकलती है’ है. इन लोगों का लोकतंत्र पर कोई विश्वास नहीं है. यहां बहुत से लोग कह रहे हैं कि अन्याय है, तो वो अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं. क्या लड़ने का यही तरीका है?
अमित शाह ने सदन में उन लोगों को लताड़ लगाई, जो माओवादियों की तुलना शहीद भगत सिंह और बिरसा मुंडा से करते हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने शहीद भगत सिंह और बिरसा मुंडा से उनकी तुलना की. लेकिन वो लोग तिलका मांझ और बिरसा मुंडा को अपना आदर्श नहीं मानते हैं. इन्होंने माओ को आदर्श कहा और इनमें से भी वे फॉरेन से आयात करते हैं.
अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों ने मूवमेंट के लिए बस्तर क्यों चुना? देश लंबी गुलामी से आजाद हुआ था और रेवेन्यू सीमित था. दूर-दराज इलाकों में स्टेट की पहुंच कम थी और विकास वहां तक नहीं पहुंच सका था. जहां स्टेट पहुंचा ही नहीं था, तो वहां पर अत्याचार की बात कहां से आई. स्टेट से दूर की जगह को उन इलाकों को रेड कॉरिडोर के लिए चुना गया. जो आदिवासी लोग तिलका मांझी और भगवान बिरसा मुंडा को अपना हीरो मानते थे, वो अचानक माओवादियों को हीरो क्यों मानने लगे?
अमित शाह ने कहा कि माओवादियों ने आदिवासियों को बरगलाया. उन्हें लग रहा था कि अगर वो पढ़ लिख गए, तो हमारा साथ नहीं देंगे. उन लोगों ने स्कूल और बैंक जला दिए.आदिवासियों तक विकास को पहुंचने ही नहीं दिया. नक्सलवाद गरीबी के कारण नहीं फैला बल्कि वैचारिक जड़ों के कारण फैला है.
गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद की टाइमलाइन के बारे में बताते हुए कहा कि 1969 में इस आंदोलन की शुरुआत हुई. ये बंगाल के नक्सलबाड़ी से पनपा. 80 का दशक आते-आते ये तीन राज्यों तक फैल गया. 90 के दशक आते-आते यहां विलय हुआ. 2004 में सीपीआई माओवादी का गठन हुआ. 2000 से 2004 इन चार सालों को छोड़कर कांग्रेस की सरकार ही रही. इसके बाद 1970 में एक नारा आया कि अंतरात्मा की आवाज पर मतदान करें.इंदिरा गांधी ने माओवादियों का समर्थन लिया. जब तक वो सत्ता में नहीं थीं, वो भी माओवाद की विचारधारा में गिरफ्त थीं. इसी बीच नक्सलवाद तेजी से फैला. कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि सत्ता के समर्थन के बिना ये रेड कॉरिडोर संभव ही नहीं था.
रूस में जब सरकार बनी तभी भारत में सीपीएम बनी जिसकी प्रेरणा ही दूसरा देश रहा हो वह हमारे देश का समर्थन कैसे करेगा. सीपीआई थी फिर सीपीएम क्यों आई चीन में, जब सरकार बनी तो सीपीआई एम भारत में बनी. वामपंथी दलों का उद्देश्य सशस्त्र क्रांति था और संसद का विरोध करना था.
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवादी वोट से नहीं बुलेट से सत्ता चाहते हैं. कई राज्यों में नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म हो चुका है. 31 मार्च ,2026 तक देश को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य दिया था. बिहार 2024 से पहले नक्सलवाद से मुक्त हुआ. सुरक्षा बल बढ़ाए आधुनिक हथियार दिए बुलेट प्रूफ गाड़ियां दी गई. 4839 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और इनमें से 2218 को जेल में डाला गया. 706 नक्सलवादियों को हमने मार दिया. हमने हथियार उठाने वालों का सफाया किया.
Gold Rate Today 20 October 2026: दशहरे पर सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है.…
Mandsaur Ravan Tradition: मध्य प्रदेश के मंदसौर में रावण को मंदोदरी का मायका होने के…
Salman Khan vs Lawrence Bishnoi: देवेंद्र बुढ़िया ने सलमान खान को मुकाम जाकर माफी मांगने…
Happy Dussehra 2026 Wishes in Hindi: दशहरा 2026 बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक…
Delhi Dussehra Traffic Advisory 20 Oct 2026: दशहरा पर दिल्ली-NCR में सुरक्षा कड़ी रहेगी और…
Petrol Diesel Price Today 20 October 2026: 20 अक्टूबर 2026 को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में…