Is 'Maggi' Really Healthy: जब खाना बनाने का बिलकुल मन न करे तो हम '2 मिनट में मैगी नूडल्स' बनाकर खा लेते हैं. आजकल बच्चों की यह पहली पसंद बन चुकी है. लेकिन, हेल्थ एक्सपर्ट इसको ठीक नहीं मानते हैं. बता दें कि, हर दिल अजीज मैगी में कई ऐसे तत्व हैं जो सेहत के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकते हैं. डाइटिशियन प्रीती पांडे से जानिए इसके नुकसान-
जानिए, क्या 2 मिनट में बनने वाली मैगी सच में फायदेमंद है या सेहत से समझौता. (Canva)
Is ‘Maggi’ Really Healthy: जब खाना बनाने का बिलकुल मन न करे तो हम ‘2 मिनट में मैगी नूडल्स’ बनाकर खा लेते हैं. आजकल बच्चों की यह पहली पसंद बन चुकी है. मैगी की पंच लाइन ही है- ‘टेस्ट भी हेल्थ भी’. इसलिए लगभग हर उम्र के लोगों को इसका स्वाद काफी पसंद होता है. लेकिन, हेल्थ एक्सपर्ट इसको ठीक नहीं मानते हैं. बता दें कि, हर दिल अजीज मैगी में कई ऐसे तत्व हैं जो सेहत के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो, लेड यानी सीसा व्यक्ति के शरीर के लिए धीमा जहर के बराबर माना जाता है. ये न और हार्ट जैसे अहम अंगों को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाता है. इसके सेवन से बच्चों के आईक्यू लेवल पर भी असर पड़ सकता है. इसीलिए एक्सपर्ट इससे बचने की सलाह देते हैं. अब सवाल है कि आखिर, मैगी सेहत के लिए कैसे नुकसानदायक? मैगी के अधिक सेवन से सेहत को क्या नुकसान हैं? इस बारे में India News को बता रही हैं अपोलो मेडिक्स हॉस्पिटल लखनऊ की डाइटिशियन प्रीती पांडे-
मैगी में सीसा (लेड) होता है, जोकि बेहद हानिकारक तत्व है. यह तत्व हमारे शारीरिक और मानसिक विकास के लिए धीमा जहर की तरह काम करता है. अमूमन लेड की मात्रा पेंट्स, सौन्दर्य प्रसाधनों और बैटरियों में होती है. साल 2015 में मैगी में लेड होने की बात सामने आई थी. जब केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकीय अनुसंधान संस्थान ने मैगी के नमूनों की जांच की थी तो उसमें लेड की मात्रा आवश्यकता से ज्यादा पायी गई थी. खाद्य मानकों के आधार पर किसी भी खाद्य पदार्थ में 2.5 PPM की मात्रा में लेड को हानिकारक नहीं माना गया है. लेकिन सैंपल में लेड की मात्रा मानक से अधिक पायी गई थी.
गौरतलब है कि भारत में तय मानक के अनुसार, किसी फूड प्रॉडक्ट में लेड की मात्रा 2.5 पीपीएम तक ही होनी चाहिए, लेकिन मैगी में इसकी मात्रा काफी हो सकती है. यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के मुताबिक, खून में लेड की किसी भी मात्रा को सेफ नहीं माना जा सकता. रिसर्च के मुताबिक लेड खून, मांसपेशियों और हड्डियों में जमने लगता है और धीरे-धीरे अपना असर दिखाता है. हालांकि, अब हो सकता है कि कंपनियों ने इसमें कुछ सुधार किया हो.
आईक्यू लेवल पर असर: लेड का इस्तेमाल सेहत के लिए बेहद घातक है. चौंकाने वाली बात यह है कि, 6 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए लेड उनके दिमाग पर बुरा असर डालता है. ऐसा होने से उनका आईक्यू लेवल प्रभावित हो सकता है.
किडनी-नर्वस सिस्टम पर असर: मैगी का सबसे बुरा असर किडनी और नर्वस सिस्टम पर पड़ता है. हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि इसमें मौजूद लेड मानव शरीर के लिए जानलेवा साबित होता है. यह जहां किडनी को खराब करता है वहीं ये तंत्रिका तंत्र के लिए भी काफी घातक साबित होता है.
बच्चों में चिड़चिड़ापन: एक्सपर्ट कहते हैं कि, लेड के इस्तेमाल से बच्चों का स्वभाव चिड़चिड़ा रहने लगता है. छोटे बच्चों में बोलने की दिक्कत सामने आती है. इसके साथ ही हड्डियों और मांसपेशियों की ग्रोथ में भी कमी आ सकती है.
फर्टिलिटी पर असर: बच्चों को छोड़ दें तो बड़े भी अगर उनके लिए भी लेड काफी खतरनाक है. ये पुरुषों और महिलाओं में बांझपन की समस्या पैदा करता है. यही नहीं, यह पाचन, हाई बीपी की समस्या भी बढ़ाता है. गर्भवती महिलाओं के बच्चे के लिए बेहद नुकसानदायक है.
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