Mobile Gaming: हाल ही में गाजियाबाद से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई. जहां तीन नाबालिग बहनों ने ऑनलाइन गेमिंग और मोबाइल के चलते सुसाइड कर लिया. इस घटना ने पैरेंट्स के मन में डर का माहौल पैदा कर दिया है. साथ ही मेंटल हेल्थ को लेकर भी कई सवाल खडे़ हो रहे हैं.
मोबाइल गेमिंग युवाओं और बच्चों को जकड़ रहा
Mental Helath Of Youth: गाजियाबाद में तीन बहनों की आत्महत्या के बाद यह चिंता फिर बढ़ गई है कि ऑनलाइन ट्रेंड्स और सोशल मीडिया का जुनून लोगों को कितना प्रभावित कर सकता है. इस घटना के बाद से इंटरनेट पर एक बहस छिड़ गई है कि क्या ऑनलाइन गेमिंग और मोबाइल बच्चे और युवा को बुरी तरह जकड़ लेते हैं? साथ ही जानिए माता-पिता को किन चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
आज मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. खासकर युवाओं के लिए यह ऐसा हो गया है जैसे हाथ का एक अतिरिक्त अंग हो. लेकिन इसी के साथ युवाओं के दिमाग में चुपचाप एक बदलाव हो रहा है, जो हमेशा अच्छा नहीं होता. मोबाइल गेमिंग, जो पहले सिर्फ समय बिताने और मजे का जरिया था, अब धीरे-धीरे दिमाग और व्यवहार को प्रभावित करने वाला एक मनोवैज्ञानिक तंत्र बनता जा रहा है. बच्चों और युवाओं को मोबाइल और ऑनलाइन गेमिंग मानसिक रूप से प्रभावित कर रहा है.
दुनिया से कटने लगता है
ऑनलाइन गेम सिर्फ मनोरंजन नहीं देते, बल्कि लोगों को एक नई पहचान भी दे देते हैं. जो किशोर असल जिंदगी में शर्मीला होता है, वह गेम में बहादुर योद्धा बन सकता है. जिसे समाज में कोई महत्व नहीं देता, वह आभासी दुनिया में पूरी टीम या सेना का नेता बन जाता है. यह सब सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन इसका एक खतरा भी है. धीरे-धीरे व्यक्ति असली दुनिया से कटने लगता है. परिवार और दोस्तों से रिश्ते कमजोर पड़ जाते हैं और गेम के अंदर बने रिश्ते ज्यादा अहम लगने लगते हैं.
ध्यान भटकना
मोबाइल गेमिंग के सबसे कम चर्चित दुष्प्रभावों में से एक है ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी. तेज गति वाले गेम से दिमाग की सोचने-समझने की शक्ति खत्म हो जाती है.
ऑनलाइन गेमिंग और मोबाइल की लत के कारण युवा और बच्चे पुरी तरह उसी दुनिया में मशगूल हो जाते हैं. इसके कई दुष्प्रभाव भी होते हैं. हो सकता है कि आपका कभी हंसमुख रहने वाला बच्चा अब ज्यादातर समय घर में ही बिताता हो, या उसकी चमक पहले जैसी नहीं रही हो. ये सब संकेत आपको असमंजस में डाल सकता है.
अगर आपके बच्चे में ये लक्षण हैं, तो माता-पिता को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
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