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जिस बैट पर पहले लगा था बैन, वही अब होगा लीगल! MCC के फैसले से क्यों मचा हड़कंप, क्या फिर होगा विवाद?

Cricket Bat Rules: क्रिकेट के नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है. ताकि उन बल्लों को भी अनुमति दी जा सके, जिन्हें पहले अवैध माना जाता था. इससे क्या बदलेगा और क्या फिर से पुराने विवादों को ये जन्म देगा. चलिए जानते हैं सब कुछ इस खबर में.

MCC New Rules Of Bat: मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (MCC) ने खेल को आज के दौर के मुताबिक बनाने के लिए क्रिकेट के नियमों में 73 बदलाव करने का ऐलान किया है. MCC का कहना है कि इन बदलावों का मकसद नियमों को आधुनिक क्रिकेट की जरूरतों के अनुसार ढालना है, ताकि खेल समय के साथ चलता रहे। ये नए नियम 01 अक्टूबर से लागू होंगे. इसमें क्रिकेट के बैट्स को लेकर एक बड़ा बदलाव हुआ है, जिसमें लैमिनेटेड बैट्स से खेलने की अनुमति दी जाएगी. जानिए इससे क्या होगा फायदा और नुकसान. 

क्या है ये नया नियम?

क्रिकेट के इस नए नियम के तहत अब उन बल्ले से खेलने की अनुमति दी जाएगी, जो पहले अवैध माने जाते थे. एमसीसी ने क्रिकेट में लकड़ी के तीन टुकड़ों तक से बने लैमिनेटेड बल्ले, जिन्हें टाइप डी बल्ले के रूप में जाना जाता है. उसके उपयोग की अनुमति देगा. आपको बता दें कि इससे पहले टाइप डी बल्ले केवल जूनियर क्रिकेट में ही इस्तेमाल किए जा सकते थे, लेकिन एमसीसी ने कहा कि उसने दुनिया भर में बल्लों की बढ़ती कीमतों को कम करने के प्रयास में यह कदम उठाया है. 

कितने प्रकार के बैट्स बनते हैं?

क्रिकेट बैट्स ज्यादातर चार प्रकार के होते हैं ए, बी, सी और डी. टाइप डी बल्ले आम बल्लों (टाइप A, B, C) से इसलिए अलग होते हैं क्योंकि ये एक ही लकड़ी से नहीं, बल्कि 2–3 लकड़ी के टुकड़ों को जोड़कर बनाए जाते हैं. ऊपर की सतह अच्छी क्वालिटी की विलो की होती है, लेकिन अंदर या पीछे सस्ती लकड़ी (जैसे कश्मीर विलो या दूसरी लकड़ी) लगाई जाती है. इसका मकसद है बल्ले की कीमत कम करना, जबकि पारंपरिक बल्ले पूरी तरह महंगी और एक ही लकड़ी से बनाए जाते हैं.

जब रिकी पोंटिंग का बल्ला बना विवादित

2004 में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर रिकी पोंटिंग ने सिडनी में पाकिस्तान के खिलाफ एक शानदार दोहरा शतक जड़ा. हालांकि, इस मैच में इस्तेमाल किए गए बल्ले को लेकर काफी विवाद खड़ा हो गया. बताया गया कि इस बल्ले के पिछले हिस्से पर कार्बन ग्रेफाइट की एक पतली पट्टी लगी हुई थी. एमसीसी ने आईसीसी से शिकायत की कि इस पट्टी से बल्ले को अतिरिक्त ताकत मिलती है, जो बल्लेबाज के लिए फायदेमंद बाद में यह निर्णय लिया गया कि इस तरह के बल्ले का उपयोग करना अवैध है. हाल ही में बल्ले को लेकर आए नए नियम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि, अब ऐसे बल्लों का उपयोग करना वैध माना जाएगा.

Kamesh Dwivedi

पिछले पांच वर्षों से डिजिटल मीडिया में बतौर लेखक अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इससे पहले Zee News और Amar Ujala में कार्यरत रहे हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में BA और वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय से MA की पढ़ाई की पूरी की. वायरल-ट्रेंडिंग कंटेंट के साथ बॉलीवुड, हॉलीवुड, भोजपुरी, साउथ सिनेमा के अलावा मनोरंजन की अन्य खबरों के लेखन और विश्लेषण में माहिर हैं. साथ ही कई सेलेब्स के इंटरव्यू भी कर चुके हैं. इसके अलावा क्रिकेट, राजनीति के साथ साहित्य का भी गहन अध्ययन करने का शौक है.

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