Piles Cure Without Surgery Tips: ये सच है कि, आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल ने कई बीमारियों को जन्म दिया है. बवासीर (Piles) ऐसी ही बीमारियों में से एक है. आज इस बीमारी से पीड़ितों की फेहरिस्त लंबी है. बता दें कि, बवासीर की बीमारी को आयुर्वेद में इसे ‘अर्श रोग’ के नाम से जानते हैं. यह गुदा या मलाशय की नसों में सूजन से होती है. ज्यादातर लोग शर्म के कारण इसे छुपाते हैं, जिससे समस्या बढ़ जाती है. यही नहीं, कभी-कभी सर्जरी तक की नौबत आ जाती है. कुल मिलाकर पाइल्स के मरीजों को बेहद दर्द और कष्ट से गुजरना पड़ता है. वैसे तो मेडिकल में इसके लिए दवाएं और सर्जरी जैसे विकल्प मौजूद हैं. लेकिन, राहत की बात यह है कि, आयुर्वेद में इसके प्रभावी और नेचुरल उपाय मौजूद हैं. अब सवाल है कि, क्या बिना सर्जरी के बवासीर को ठीक किया जा सकता है? आयुर्वेद में अर्श रोग का इलाज कैसे होता है? इस बारे में India News को बता रही हैं राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय लखनऊ की डॉ. शचि श्रीवास्तव-
आयुर्वेद में बवासीर का मुख्य कारण क्या है?
आयुर्वेद के अनुसार, बवासीर (अर्श) का मुख्य कारण वात और पित्त दोष का असंतुलन है, जो मुख्य रूप से खराब पाचन (अग्नि की कमी) और पुरानी कब्ज के कारण होता है. इस बीमारी के मुख्य कारण गलत खान-पान (मसालेदार/सूखा भोजन), देर तक बैठकर काम करना और कम चलना-फिरने पर गुदा क्षेत्र की नसों पर दबाव बढ़ाकर मलाशय की नसों में सूजन और रक्त वाहिकाओं में खराबी का कारण बनते हैं.
अर्श रोग का आयुर्वेद में कैसे इलाज होता है?
आयुर्वेदाचार्य कहते हैं कि, अर्श रोग हमेशा वात, पित्त और कफ में असंतुलन के कारण ही होता है. ऐसे में बवासीर का इलाज त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) के संतुलन को बनाए रखने में है. आयुर्वेद में उपचार के दौरान इन दोषों को संतुलित करने पर ध्यान दिया जाता है. ऐसी स्थिति में बिना सर्जरी के बवासीर की परेशानी को खत्म किया जा सकता है.
बिना सर्जरी के बवासीर कैसे ठीक होगी?
हेल्दी डाइट: बवासीर के इलाज के लिए सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है सही आहार का सेवन. यदि आप बवासीर से परेशान हैं, तो तैलीय और मसालेदार खाना न खाएं. इस प्रकार के खाद्य पदार्थ पाचन क्रिया को बिगाड़ सकते हैं, जिससे कब्ज की समस्या बढ़ सकती है. इसके बजाय हरे चने, साबुत अनाज और दया जैसे हल्के और सुपाच्य आहार को अपनी डाइट में शामिल करें. पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ (पानी, जूस आदि) पीएं, ताकि पाचन क्रिया सही रहे.
त्रिफला खाएं: त्रिफला को पाचन और आंतों की सफाई के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है. इसके लिए आप त्रिफला पाउडर को आमला के छिलके के साथ 3 से 5 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ लें. यह उपाय पेट की सफाई करेगा और बवासीर की समस्या को ठीक करने में मदद करेगा.
गुलकंद खाएं: गुलकंद का सेवन बवासीर के इलाज में भी फायदेमंद होता है. यह पाचन को बेहतर बनाता है और आंतों की सूजन को कम करता है. आप गुलकंद को रोज 1 से 2 चम्मच की मात्रा में ले सकते हैं. गुलाब की पंखुड़ियों का पेस्ट भी दर्द और सूजन में राहत दिलाता है.
इलाज का आसान तरीका
बवासीर के इलाज के लिए सिट्ज बाथ एक बहुत प्रभावी और सरल तरीका है. इसके लिए एक बर्तन में गर्म पानी भरें और उसमें त्रिफला, पीपल और गूलर की छाल का उबाला हुआ पानी डालें. फिर इस पानी में बैठकर कुछ समय आराम से बैठें. इससे गुदा में राहत मिलेगी, सूजन कम होगी और खून आना भी कम हो सकता है. इसके बाद, आप कोई भी तेल (जैसे नारियल तेल) लगा सकते हैं, जो सूजन और दर्द में राहत देता है.
खून आने पर करें यह उपाय
यदि बवासीर में खून आ रहा है या प्रोलाप्स हो रहा है, तो लाजवंती के पौधे का जूस बहुत फायदेमंद हो सकता है. यह जूस ब्लीडिंग को रोकता है और सूजन को कम करता है. इसे ताजे पौधे से निकाला जाता है और इसे दिन में एक या दो बार लिया जा सकता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां डॉक्टर से बातचीत के आधार पर है. हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि किसी आयुर्वेदिक उपाय को अपनाने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरूरी है.)