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Home > हेल्थ > Piles Cure: खूनी या बादी… कौन सी बवासीर ज्यादा खतरनाक? कैसे होती बीमारी की शुरुआत, किन चीजों का करें परहेज

Piles Cure: खूनी या बादी… कौन सी बवासीर ज्यादा खतरनाक? कैसे होती बीमारी की शुरुआत, किन चीजों का करें परहेज

Internal vs External Piles: बवासीर से पीड़ितों की फेहरिस्त लंबी है. बता दें कि, बवासीर की बीमारी को आयुर्वेद में इसे 'अर्श रोग' के नाम से जानते हैं. बवासीर दो तरह की होती है. पहली खूनी बवासीर और दूसरी बादी बवासीर. अब सवाल है कि, कौन सी बवासीर ज्यादा खतरनाक होती है? पाइल्स की कैसे होती है शुरुआत? इस बारे में बता रही हैं डॉ. शचि श्रीवास्तव-

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: March 15, 2026 17:13:20 IST

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Internal vs External Piles: आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल में सेहतमंद रह पाना बड़ी चुनौती है. तमाम ऐसी बीमारियां जन्म ले रही हैं जो इंसान को अंदर से खोखला बना रही हैं. बवासीर (Piles) ऐसी ही बीमारियों में से एक है. आज इस बीमारी से पीड़ितों की फेहरिस्त लंबी है. बता दें कि, बवासीर की बीमारी को आयुर्वेद में इसे ‘अर्श रोग’ के नाम से जानते हैं. यह गुदा या मलाशय की नसों में सूजन से होती है. ज्यादातर लोग शर्म के कारण इसे छुपाते हैं, जिससे समस्या बढ़ जाती है. यही नहीं, कभी-कभी सर्जरी तक की नौबत आ जाती है. कुल मिलाकर पाइल्स के मरीजों को बेहद दर्द और कष्ट से गुजरना पड़ता है. इससे पीड़ित व्यक्ति को अपने खानपान पर खास ध्यान रखना होता है. बता दें कि, बवासीर दो तरह की होती है. पहली खूनी बवासीर और दूसरी बादी बवासीर. अब सवाल है कि, कौन सी बवासीर ज्यादा खतरनाक होती है? पाइल्स की कैसे होती है शुरुआत? इस परेशानी किन चीजों का सेवन न करें? इस बारे में India News को बता रही हैं राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय लखनऊ की डॉ. शचि श्रीवास्तव-

कैसे होती है बवासीर

आयुर्वेद के अनुसार, बवासीर (अर्श) का मुख्य कारण वात और पित्त दोष का असंतुलन है, जो मुख्य रूप से खराब पाचन (अग्नि की कमी) और पुरानी कब्ज के कारण होता है. इस बीमारी के मुख्य कारण गलत खान-पान (मसालेदार/सूखा भोजन), देर तक बैठकर काम करना और कम चलना-फिरने पर गुदा क्षेत्र की नसों पर दबाव बढ़ाकर मलाशय की नसों में सूजन और रक्त वाहिकाओं में खराबी का कारण बनते हैं. 

कितने तरह की होती है बवासीर

डॉ. शचि श्रीवास्तव कहती हैं कि, बवासीर दो तरह की होती है खूनी बवासीर और दूसरी बादी बवासीर. खूनी बवासीर में मस्से खूनी सुर्ख होते हैं और उनसे ब्लड आता है, जबकि बादी बवासीर में मस्से काले रंग के होते है और मस्सों में दर्द और सूजन की शिकायत होती है. 

कौन सी बवासीर अधिक खतरनाक

एक्सपर्ट की मानें तो, बवासीर खूनी हो या बादी… दर्दनाक दोनों ही हैं. फिर भी, बादी बवासीर आम तौर पर अधिक खतरनाक और दर्दनाक होती है, क्योंकि इसमें थक्के जमने (Thrombosed) से असहनीय दर्द, सूजन और इन्फेक्शन का खतरा होता है. हालांकि, खूनी बवासीर ज्यादा खून बहने पर एनीमिया का कारण बन सकती है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, दोनों जानलेवा नहीं हैं, लेकिन बादी बवासीर ज्यादा परेशानी पैदा करती है. 

बादी और खूनी बवासीर में अंतर क्या

बादी बवासीर: यह गुदा के बाहर होती है और इसमें मल त्याग के समय या बैठने पर बहुत तेज दर्द होता है. इसमें रक्त का थक्का (Blood Clot) जमने के कारण यह अधिक कष्टकारी और इमरजेंसी वाली स्थिति हो सकती है.

खूनी बवासीर: इसमें मल के साथ चमकदार लाल खून आता है. यह तब तक खतरनाक नहीं है जब तक रक्तस्राव लगातार न हो, जिससे शरीर में कमजोरी या एनीमिया हो सकता है. अगर बवासीर में सूजन, बहुत दर्द, मवाद या बहुत खून आए, तो यह कैंसर या किसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है, ऐसे में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां डॉक्टर से बातचीत के आधार पर है. हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि किसी आयुर्वेदिक उपाय को अपनाने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरूरी है.)

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Internal vs External Piles: आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल में सेहतमंद रह पाना बड़ी चुनौती है. तमाम ऐसी बीमारियां जन्म ले रही हैं जो इंसान को अंदर से खोखला बना रही हैं. बवासीर (Piles) ऐसी ही बीमारियों में से एक है. आज इस बीमारी से पीड़ितों की फेहरिस्त लंबी है. बता दें कि, बवासीर की बीमारी को आयुर्वेद में इसे ‘अर्श रोग’ के नाम से जानते हैं. यह गुदा या मलाशय की नसों में सूजन से होती है. ज्यादातर लोग शर्म के कारण इसे छुपाते हैं, जिससे समस्या बढ़ जाती है. यही नहीं, कभी-कभी सर्जरी तक की नौबत आ जाती है. कुल मिलाकर पाइल्स के मरीजों को बेहद दर्द और कष्ट से गुजरना पड़ता है. इससे पीड़ित व्यक्ति को अपने खानपान पर खास ध्यान रखना होता है. बता दें कि, बवासीर दो तरह की होती है. पहली खूनी बवासीर और दूसरी बादी बवासीर. अब सवाल है कि, कौन सी बवासीर ज्यादा खतरनाक होती है? पाइल्स की कैसे होती है शुरुआत? इस परेशानी किन चीजों का सेवन न करें? इस बारे में India News को बता रही हैं राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय लखनऊ की डॉ. शचि श्रीवास्तव-

कैसे होती है बवासीर

आयुर्वेद के अनुसार, बवासीर (अर्श) का मुख्य कारण वात और पित्त दोष का असंतुलन है, जो मुख्य रूप से खराब पाचन (अग्नि की कमी) और पुरानी कब्ज के कारण होता है. इस बीमारी के मुख्य कारण गलत खान-पान (मसालेदार/सूखा भोजन), देर तक बैठकर काम करना और कम चलना-फिरने पर गुदा क्षेत्र की नसों पर दबाव बढ़ाकर मलाशय की नसों में सूजन और रक्त वाहिकाओं में खराबी का कारण बनते हैं. 

कितने तरह की होती है बवासीर

डॉ. शचि श्रीवास्तव कहती हैं कि, बवासीर दो तरह की होती है खूनी बवासीर और दूसरी बादी बवासीर. खूनी बवासीर में मस्से खूनी सुर्ख होते हैं और उनसे ब्लड आता है, जबकि बादी बवासीर में मस्से काले रंग के होते है और मस्सों में दर्द और सूजन की शिकायत होती है. 

कौन सी बवासीर अधिक खतरनाक

एक्सपर्ट की मानें तो, बवासीर खूनी हो या बादी… दर्दनाक दोनों ही हैं. फिर भी, बादी बवासीर आम तौर पर अधिक खतरनाक और दर्दनाक होती है, क्योंकि इसमें थक्के जमने (Thrombosed) से असहनीय दर्द, सूजन और इन्फेक्शन का खतरा होता है. हालांकि, खूनी बवासीर ज्यादा खून बहने पर एनीमिया का कारण बन सकती है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, दोनों जानलेवा नहीं हैं, लेकिन बादी बवासीर ज्यादा परेशानी पैदा करती है. 

बादी और खूनी बवासीर में अंतर क्या

बादी बवासीर: यह गुदा के बाहर होती है और इसमें मल त्याग के समय या बैठने पर बहुत तेज दर्द होता है. इसमें रक्त का थक्का (Blood Clot) जमने के कारण यह अधिक कष्टकारी और इमरजेंसी वाली स्थिति हो सकती है.

खूनी बवासीर: इसमें मल के साथ चमकदार लाल खून आता है. यह तब तक खतरनाक नहीं है जब तक रक्तस्राव लगातार न हो, जिससे शरीर में कमजोरी या एनीमिया हो सकता है. अगर बवासीर में सूजन, बहुत दर्द, मवाद या बहुत खून आए, तो यह कैंसर या किसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है, ऐसे में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां डॉक्टर से बातचीत के आधार पर है. हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि किसी आयुर्वेदिक उपाय को अपनाने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरूरी है.)

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