<
Categories: हेल्थ

क्या है रूमेटिक फीवर? बच्चों के दिल पर क्यों पड़ता है इसका सीधा असर, जानिए लक्षण और बचाव के तरीके

Rheumatic Fever: रूमैटिक फीवर एक खतरनाक बीमारी है. यह तब होती है जब बच्चे का शरीर की इम्यून सिस्टम ज्यादा प्रतिक्रिया करने लगती है.यह आमतौर पर गले के संक्रमण की ठीक से इलाज ना होने के कारण होती है,आइए समझते हैं इसके बारे में विस्तार से.

Rheumatic Heart Disease: रूमेटिक फीवर एक सूजन वाली (इंफ्लेमेटरी) बीमारी है, जो तब हो सकती है जब गले का स्ट्रेप थ्रोट या स्कार्लेट फीवर सही तरीके से ठीक न किया जाए. ये दोनों बीमारियां स्ट्रेप्टोकोकस नाम के बैक्टीरिया से होती हैं. अगर संक्रमण का समय पर और पूरा इलाज न हो, तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गलत तरीके से अपने ही अंगों पर हमला करने लगती है. इसी वजह से दिल, जोड़ों, त्वचा और दिमाग से जुड़े हिस्सों में सूजन आ सकती है.

यह बीमारी अधिकतर 5 से 15 साल के बच्चों में देखी जाती है, लेकिन छोटे बच्चों और बड़ों को भी हो सकती है. अमेरिका जैसे विकसित देशों में यह अब कम पाई जाती है, क्योंकि वहां गले के संक्रमण का जल्दी इलाज हो जाता है.

रूमेटिक फीवर के लक्षण कैसे दिखाई देते हैं?

क्लीवलैंडक्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार रूमैटिक फीवर के लक्षण आमतौर पर गले के संक्रमण के 2 से 4 हफ्ते बाद शुरू होते हैं. यह लक्षण शरीर के अलग-अलग हिस्सों में सूजन के कारण होते हैं. कभी लक्षण हल्के होते हैं, तो कभी गंभीर. कई बार लक्षण आते-जाते भी रहते हैं.इसमें बुखार आना आम है. घुटनों, टखनों, कोहनियों और कलाई में दर्द या सूजन हो सकती है. जोड़ों में गर्माहट और छूने पर दर्द महसूस हो सकता है. कभी एक जोड़ का दर्द दूसरे जोड़ में चला जाता है. सीने में दर्द और बहुत ज्यादा थकान भी महसूस हो सकती है. कुछ बच्चों की स्किन पर हल्का उभरा हुआ या किनारों से अनियमित लाल दानेदार चकत्ते दिखाई दे सकते हैं. स्किन के नीचे छोटे, बिना दर्द वाले गांठ जैसे उभार भी बन सकते हैं.कुछ मामलों में सिडेनहैम कोरिया नाम की स्थिति विकसित हो सकती है. इसमें हाथ, पैर या चेहरे में झटके जैसे अनियंत्रित मूवमेंट होते हैं. बच्चा बिना वजह रोने या हंसने लगे, ऐसा भी हो सकता है.

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

अगर बच्चे को अचानक गले में तेज दर्द, कुछ भी खाने में परेशानी, बुखार, सिरदर्द, पेट दर्द, उल्टी या जी मिचलाना जैसे लक्षण हों, तो इसे सामान्य सर्दी समझकर नजरअंदाज न करें. सही समय पर जांच और इलाज रूमेटिक फीवर से बचा सकता है.

यह बीमारी क्यों होती है?

रूमेटिक फीवर सीधे तौर पर बैक्टीरिया से नहीं, बल्कि शरीर की प्रतिक्रिया से होता है. माना जाता है कि स्ट्रेप बैक्टीरिया शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भ्रमित कर देता है, जिससे वह स्वस्थ ऊतकों पर हमला कर बैठती है. इसका असर खासकर दिल, जोड़ों, त्वचा और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर पड़ सकता है.अगर स्ट्रेप थ्रोट का इलाज तुरंत और पूरा एंटीबायोटिक कोर्स लेकर किया जाए, तो रूमैटिक फीवर होने की संभावना बहुत कम हो जाती है. इसलिए डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं बीच में छोड़ना ठीक नहीं है.

किन लोगों में खतरा ज्यादा होता है?

कुछ बच्चों में आनुवंशिक कारणों से इसका खतरा थोड़ा ज्यादा हो सकता है. भीड़भाड़, गंदगी और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी वाले इलाकों में स्ट्रेप संक्रमण जल्दी फैलता है, जिससे रूमैटिक फीवर का खतरा बढ़ सकता है.

इससे क्या समस्याएं हो सकती हैं?

रूमेटिक फीवर की सूजन कुछ हफ्तों से लेकर महीनों तक रह सकती है. कुछ मामलों में दिल को लंबे समय तक नुकसान पहुंच सकता है, जिसे रूमैटिक हार्ट डिजीज कहा जाता है. दिल के वाल्व संकरे हो सकते हैं, ठीक से बंद नहीं हो सकते या कमजोर पड़ सकते हैं. इससे आगे चलकर हार्ट फेलियर या धड़कन की अनियमितता जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

बचाव कैसे करें?

रूमेटिक फीवर से बचने का सबसे अच्छा तरीका है गले के संक्रमण का समय पर इलाज. अगर डॉक्टर एंटीबायोटिक दें, तो पूरा कोर्स खत्म करें. बीच में दवा बंद करना खतरा बढ़ा सकता है.सही समय पर इलाज, साफ-सफाई और लक्षणों को गंभीरता से लेना ही इस बीमारी से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के लिए दी जा रही है. इंडिया न्यूज सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.

Shivashakti narayan singh

मूल रूप से चन्दौली जनपद के निवासी शिवशक्ति नारायण सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है. वर्तमान में वे इंडिया न्यूज़ के साथ कार्यरत हैं. एस्ट्रो (ज्योतिष) और लाइफ़स्टाइल विषयों पर लेखन में उन्हें विशेष रुचि और अनुभव है. इसके अलावा हेल्थ और पॉलिटिकल कवरेज से जुड़े मुद्दों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करते हैं.तथ्यपरक, सरल और पाठकों को जागरूक करने वाला कंटेंट तैयार करना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है.डिजिटल मीडिया में विश्वसनीय और प्रभावी पत्रकारिता को लेकर वे निरंतर अभ्यासरत हैं.

Share
Published by
Shivashakti narayan singh

Recent Posts

भाभी बीजेपी सरकार में मंत्री, ननद कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहीं निकाय चुनाव; आखिर कौन हैं नयनाबा जडेजा?

Naina Ba Jadeja Profile: गुजरात में हो रहे निकाय चुनाव को लेकर रवींद्र जडेजा की…

Last Updated: April 12, 2026 18:06:39 IST

ब्रह्म मुहूर्त में उठना किस बात का संकेत है? जानिए 3 बड़ी वजहें जो बदल सकती हैं आपकी सोच

Brahma Muhurat Significance: शास्त्रों के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त का समय बेहद पवित्र और ऊर्जा से…

Last Updated: April 12, 2026 18:02:12 IST

अंकुरित आलू सेहत लिए धीमा जहर! खाने से दिल की धड़कन हो सकती तेज, इन गंभीर बीमारियों का भी खतरा

Sprouted Potatoes Disadvantage: रोजमर्दा में इस्तेमाल होने वाले आलू और प्याज यदि सही तरीके से…

Last Updated: April 12, 2026 17:47:42 IST

कठिन परिश्रम ने दिलाई सफलता, बार-बार असफल होने पर भी नहीं मानी हार, 33वीं रैंक के साथ IAS बनने का सपना किया पूरा

राजस्थान के छोटे‑से कस्बे फलोदी से आए मयंक पुरोहित ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025…

Last Updated: April 12, 2026 17:27:32 IST