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जो छोड़ दिया इन 3 चीजों का सेवन, फड़फड़ा उठेगा शरीर, सौ घोड़ों जितनी आएगी फूर्ति, बस आज से ही अपना लें ये शानदार टिप्स!

Sadhguru Health Tips: सद्गुरु जग्गी वासुदेव अक्सर लोगों को योग और आयुर्वेदिक तरीकों के आधार पर स्वस्थ रहने के गुर सिखाते हैं। वह शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कई तरह के हेल्थ टिप्स भी देते हैं।

BY: Preeti Pandey • UPDATED :
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India News (इंडिया न्यूज),Sadhguru Health Tips: सद्गुरु जग्गी वासुदेव अक्सर लोगों को योग और आयुर्वेदिक तरीकों के आधार पर स्वस्थ रहने के गुर सिखाते हैं। वह शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कई तरह के हेल्थ टिप्स भी देते हैं। ऐसे में उनकी बातें काफी अहम होती हैं। लाखों लोग उनकी सलाह पर काम करते हैं और स्वस्थ भी रहते हैं। इस बार अपने प्रवचन में उन्होंने शरीर में ऊर्जा लाने का नुस्खा बताया है। सद्गुरु बताते हैं कि कुछ चीजें शरीर में जड़ता लाने की क्षमता रखती हैं तो कुछ पेट में गैस बनाती हैं।

जब पेट में गैस बनने लगती है तो वो सिर्फ पेट में ही नहीं रहती बल्कि पूरे सिस्टम में घुसकर शरीर की ऊर्जा को बाधित करती है। इसलिए अगर आप अपने शरीर में गैस न बनने दें तो ये खुद को ऊर्जावान बनाने का सबसे अच्छा तरीका हो सकता है। इसके लिए सद्गुरु 3 चीजों को न खाने की सलाह देते हैं। खासकर जो लोग बड़ा काम करना चाहते हैं, विद्यार्थी हैं या साधक हैं, उन्हें वो ये चीजें जरूर करने की सलाह देते हैं।

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Sadhguru Health Tips: जो छोड़ दिया इन 3 चीजों का सेवन

ये 3 चीजें खाना बंद कर दें

जड़ वाली सब्जियां

सद्गुरु कहते हैं कि अगर आप हमेशा ऊर्जा से भरपूर रहना चाहते हैं तो जड़ वाली सब्जियां खाना बंद कर दें. जैसे कि मूली, गाजर, शलजम आदि. इसका मतलब ये नहीं है कि ये सब्जियां अच्छी नहीं हैं बल्कि ये प्राणशून्य हैं. ये तामस सब्जियां हैं. ये शरीर में जड़ता पैदा करती हैं. आपको आलस्य महसूस होता है. विद्यार्थियों और साधकों को ये सब्जियां बिल्कुल नहीं खानी चाहिए क्योंकि ये नींद और आलस्य लाती हैं. इन सब्जियों को खाने के बाद जैसे ही आप किताब खोलेंगे तो आपको नींद आने लगेगी. आपको थकान और आलस्य महसूस होने लगेगा.

डेयरी उत्पाद

सद्गुरु कहते हैं कि दूध या दूध से बने उत्पाद आपके शरीर में आलस्य भर देंगे. ये चीजें शरीर में जड़ता पैदा करती हैं. इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि डेयरी उत्पादों में एक खास पदार्थ होता है जो मलाशय से चिपक जाता है. इन चीजों को कृत्रिम तरीके से निकाला जाता है और कपड़ों को चिपकाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. ये पानी में घुलनशील नहीं है. इसलिए जब ये मलाशय से चिपकता है तो बहुत गैस बनाता है. ऐसे में जो मल आसानी से सिस्टम से बाहर आ जाना चाहिए, वो बाहर नहीं आ पाता। इसे खाने से शरीर और दिमाग की सतर्कता कम हो जाती है। अगर आप दही-चावल खाएंगे तो आपको कुछ ही देर में नींद आने लगेगी। ऐसे में आपको शरीर में सुस्ती और थकान महसूस होगी। आप ऊर्जावान महसूस नहीं करेंगे।

मांस

सद्गुरु कहते हैं कि यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है कि अगर आप कच्चा मांस खाते हैं, तो आपके सिस्टम से इसे बाहर निकलने में 70 से 72 घंटे लगते हैं। पका हुआ मांस सिस्टम से बाहर निकलने में 50 से 54 घंटे लगते हैं। लेकिन अगर आप पका हुआ शाकाहारी भोजन खाते हैं, तो इसे सिस्टम से बाहर निकलने में 24 से 30 घंटे लगते हैं। अगर आप कच्चा शाकाहारी भोजन खाते हैं, तो इसे सिस्टम से बाहर निकलने में 12 से 15 घंटे लगते हैं। जबकि अगर आप कोई भी फल खाते हैं, तो इसे सिस्टम से बाहर निकलने में केवल 1.5 से 3 घंटे लगते हैं।

क्योंकि अगर खाना लंबे समय तक आपकी भोजन नली में रहेगा, तो यह गैस बनाएगा और यह आपके पूरे सिस्टम में जड़ता लाएगा। पेट में गैस पूरे सिस्टम में आपके प्राण वायु के खिलाफ काम करेगी। इससे समय के साथ सांस लेने, सोचने और सूंघने की क्षमता कम हो जाएगी और आप उत्साह खो देंगे। इसलिए अगर आप अपने शरीर को ऊर्जावान बनाए रखना चाहते हैं, तो मांस खाना हमेशा के लिए बंद कर दें। यह कोई धार्मिक कारण नहीं बल्कि वैज्ञानिक आधार है।

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फिर क्या करें

सद्गुरु कहते हैं कि शुद्ध भोजन करें। जितना ज़्यादा शाकाहारी भोजन खाएँगे और जितना ज़्यादा खुद पका हुआ खाना खाएँगे, उतना ज़्यादा फ़ायदेमंद होगा। हल्का पका हुआ पूरा खाना खाएँ। जो भी पकाएँ, उसे एक घंटे के अंदर खा लें। ख़ास तौर पर तैयार किया गया खाना 4 घंटे के अंदर खा लें। इसके बाद पका हुआ खाना न खाएँ। इससे साँस लेने और सोचने की प्रक्रिया प्रभावित होगी। साथ ही दो खाने के बीच कम से कम 6 से 8 घंटे का अंतर रखें।

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