Aortic Stenosis Symptoms and Treatment: आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल में हार्ट फेलियर (Heart Failure) के मामले तेजी से बढ़े हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि, बहुत कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. डॉक्टर एओर्टिक स्टेनोसिस (Aortic Stenosis) को एक अहम कारण मानते हैं. यह बीमारी बॉलीवुड के अभिनेता प्रेम चोपड़ा को भी शिकार बना चुकी है. आइए जानते हैं कि आखिर, एओर्टिक स्टेनोसिस बीमारी क्या है? कितनी खतरनाक होती है यह बीमारी?
एओर्टिक स्टेनोसिस क्या है? जो हार्ट फेल की बनती है वजह. (Canva)
Aortic Stenosis Symptoms and Treatment: आजकल लोगों की जैसी दिनचर्या है, हेल्थ एक्सपर्ट इसे सेहत के लिहाज से ठीक नहीं मानते हैं. ऐसी लाइफस्टाइल में हार्ट फेलियर (Heart Failure) के मामले तेजी से बढ़े हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि, बहुत कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. वैसे तो हार्ट फेल कई कारण हो सकते हैं, लेकिन डॉक्टर एओर्टिक स्टेनोसिस (Aortic Stenosis) को एक अहम कारण मानते हैं. जी हां, एओर्टिक स्टेनोसिस हार्ट की एक इतनी गंभीर बीमारी है, जो धीरे-धीरे बढ़ती है. अगर इसके लक्षण पहचानने के बाद इलाज में देरी की गई, तो ये खतरनाक हो सकती है. एओर्टिक स्टेनोसिस की बीमारी बॉलीवुड के अभिनेता प्रेम चोपड़ा को भी शिकार बना चुकी है. इसके चलते अभिनेता को 90 साल की उम्र में ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन (TAVI) प्रोसीजर से गुजरना पड़ा था. अब सवाल है कि आखिर, एओर्टिक स्टेनोसिस बीमारी क्या है? कितनी खतरनाक होती है यह बीमारी?
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एओर्टिक स्टेनोसिस में दिल का एओर्टिक वाल्व सिकुड़ने लगता है और पूरी तरह नहीं खुल पाता. इससे दिल से शरीर के बाकी हिस्सों तक जाने वाला खून रुकने लगता है.इससे दिल की मांसपेशी कमजोर हो सकती है और समय पर इलाज न मिले तो हार्ट फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है. उम्र बढ़ने के साथ दिल के वाल्व पर कैल्शियम जमने लगता है, जिससे वह कड़ा और सख्त हो जाता है.
- वर्कआउट/एक्सरसाइज करते समय सांस लेने में तकलीफ होना
- छाती में दर्द या जकड़न होना.
- सिर हल्का महसूस होना या कभी-कभी बेहोश हो जाना.
- थकान लगना.
- हार्ट की धड़कनें तेज हो जाना या हृदय के धड़कते समय तेज आवाज आना.
- हार्ट में सरसराहट (हार्ट की सामान्य धड़कनों के बीच एक अतिरिक्त धड़कन महसूस करना) महसूस होना.
जब मरीज में सांस फूलना, सीने में दर्द या बेहोशी जैसे लक्षण दिखने लगते हैं, तो तुरंत इलाज की जरूरत होती है वरना मौत का खतरा बढ़ जाता है. शोध से पता चलता है कि लक्षण आने के बाद यदि समय पर वाल्व बदलने की सर्जरी न हो, तो मौत होने के चांस बढ़ जाते हैं. इसलिए समय पर पहचान और जांच बहुत जरूरी है.
एओर्टिक स्टेनोसिस बीमारी की पहचान के लिए ट्रांसथोरैसिक इकोकार्डियोग्राफी (TTE) की जाती है. यह जांच वाल्व का आकार, खून की गति और दबाव जैसी अहम जानकारियां देती है. इसके अलावा ECG, एक्स-रे और अन्य इमेजिंग तकनीकें भी दिल की स्थिति समझने में मदद करती हैं.
उम्रदराज मरीजों के लिए TAVI एक बेहद सुरक्षित और कम दर्द वाला विकल्प माना जाता है. पहले एओर्टिक स्टेनोसिस का इलाज ओपन-हार्ट सर्जरी से होता था, जो अधिक जोखिमभरी और लंबी रिकवरी वाली प्रक्रिया है.जबकि TAVI में पैर की नस के रास्ते एक नया वाल्व दिल तक पहुंचाया जाता है जो कि आसान प्रक्रिया है और मरीज इससे जल्दी रिकवर होकर घर लौट सकता है.
ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इंप्लांटेशन (टीएवीआई) एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया (Minimally Invasive Procedure) है. इसमें पुराने डैमेज वाल्व को हटाए बिना नया वाल्व डाला जाता है. नया वाल्व अस्वस्थ वाल्व के अंदर रखा जाता है. ये प्रोसेस कुछ वैसा ही जैसे धमनी (Artery) में स्टेंट (Stent) लगाने के समान है. एक बार जब नए वाल्व का विस्तार हो जाता है या वह फैल जाता है, तब वह पुराने वाल्व को रास्ते से हटा देता है. इसके बाद प्रतिस्थापित वाल्व (Replace valve) के टिशू ब्लड फ्लो को कंट्रोल करने का काम संभाल लेते हैं.
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