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गौ माता की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई नई पीआईएल, धारा 377 हटने पर उठाए सवाल

Written By: Indianews Webdesk
Last Updated: January 16, 2026 16:50:00 IST

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सूरत (गुजरात) [भारत], जनवरी 16: हिंदूवादी संगठन श्री बजरंग सेना ने गौ-सम्बंधित अत्याचारों पर सख्त दंड की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल सिंह चंदेल द्वारा प्रस्तुत की गई।

  • श्री बजरंग सेना ने गौ सुरक्षा के लिए उठाई आवाज

याचिका में कहा गया है कि गौ माता सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि सनातनियों की आस्था की प्रतीक और राष्ट्रीय माता मानी जाती हैं। पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 के तहत मनुष्य या किसी भी प्राणी के साथ अप्राकृतिक यौनाचार को गंभीर अपराध माना जाता था, जिसमें कम से कम 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा निर्धारित थी। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने भी अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया था कि धारा 377 से केवल समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से हटाया जा रहा है, प्राणियों पर लागू दंड को नहीं हटाया गया था।

लेकिन नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) में धारा 377 को पूरी तरह हटा दिया गया, जिससे अब ऐसे मामलों में सिर्फ एक दिन की कैद या मामूली जुर्माना ही रह गया है। अधिवक्ता चंदेल के अनुसार, “इसी ढील का फायदा उठाकर कुछ लोग हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए गौ माता पर अत्याचार कर वीडियो वायरल कर रहे हैं, क्योंकि अब उन्हें कड़ी सजा का डर नहीं रहा।”

याचिका में यह भी दलील दी गई है कि पिछली बार PETA की ओर से दायर पीआईएल को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज किया था कि ऐसा कानून संसद बनाए। लेकिन बजरंग सेना की मांग है कि गौ माता सामान्य पशु नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का केंद्र हैं, इसलिए उनके लिए अलग और कठोर कानून बनाया जाना आवश्यक है।

श्री बजरंग सेना के बारे में

श्री बजरंग सेना की स्थापना वर्ष 2019 में सूरत में हितेश विश्वकर्मा ने की, जो संस्था के संस्थापक अध्यक्ष हैं। यह एक प्रखर हिंदूवादी संगठन है, जिसका मुख्यालय गुजरात के सूरत में स्थित है और इसकी पहुंच उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में फैली हुई है।

आज संगठन के देशभर में एक लाख से अधिक सदस्य हैं, जो भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लक्ष्य और गौ माता की रक्षा के कार्य में जुटे हुए हैं। यह संगठन हिंदू समाज के हितों की रक्षा और सामाजिक सेवा कार्यों के लिए जाना जाता है।

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

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गौ माता की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई नई पीआईएल, धारा 377 हटने पर उठाए सवाल

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Last Updated: January 16, 2026 16:50:00 IST

सूरत (गुजरात) [भारत], जनवरी 16: हिंदूवादी संगठन श्री बजरंग सेना ने गौ-सम्बंधित अत्याचारों पर सख्त दंड की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल सिंह चंदेल द्वारा प्रस्तुत की गई।

  • श्री बजरंग सेना ने गौ सुरक्षा के लिए उठाई आवाज

याचिका में कहा गया है कि गौ माता सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि सनातनियों की आस्था की प्रतीक और राष्ट्रीय माता मानी जाती हैं। पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 के तहत मनुष्य या किसी भी प्राणी के साथ अप्राकृतिक यौनाचार को गंभीर अपराध माना जाता था, जिसमें कम से कम 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा निर्धारित थी। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने भी अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया था कि धारा 377 से केवल समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से हटाया जा रहा है, प्राणियों पर लागू दंड को नहीं हटाया गया था।

लेकिन नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) में धारा 377 को पूरी तरह हटा दिया गया, जिससे अब ऐसे मामलों में सिर्फ एक दिन की कैद या मामूली जुर्माना ही रह गया है। अधिवक्ता चंदेल के अनुसार, “इसी ढील का फायदा उठाकर कुछ लोग हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए गौ माता पर अत्याचार कर वीडियो वायरल कर रहे हैं, क्योंकि अब उन्हें कड़ी सजा का डर नहीं रहा।”

याचिका में यह भी दलील दी गई है कि पिछली बार PETA की ओर से दायर पीआईएल को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज किया था कि ऐसा कानून संसद बनाए। लेकिन बजरंग सेना की मांग है कि गौ माता सामान्य पशु नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का केंद्र हैं, इसलिए उनके लिए अलग और कठोर कानून बनाया जाना आवश्यक है।

श्री बजरंग सेना के बारे में

श्री बजरंग सेना की स्थापना वर्ष 2019 में सूरत में हितेश विश्वकर्मा ने की, जो संस्था के संस्थापक अध्यक्ष हैं। यह एक प्रखर हिंदूवादी संगठन है, जिसका मुख्यालय गुजरात के सूरत में स्थित है और इसकी पहुंच उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में फैली हुई है।

आज संगठन के देशभर में एक लाख से अधिक सदस्य हैं, जो भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लक्ष्य और गौ माता की रक्षा के कार्य में जुटे हुए हैं। यह संगठन हिंदू समाज के हितों की रक्षा और सामाजिक सेवा कार्यों के लिए जाना जाता है।

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

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