क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, 2 फरवरी को अरुणाचल प्रदेश पुलिस के हेड कांस्टेबल चिक्सेंग मनपांग का क्षत-विक्षत शव मयोदिया इलाके में मिला था. बाद में पता चला कि जंगल में एक बाघिन ने उन पर हमला किया था. चिक्सेंग मनपांग नामसाई जिले के मनफाइशेंग गांव के रहने वाले थे और रोइंग पुलिस स्टेशन में रेडियो ऑपरेटर के पद पर तैनात थे. यह हमला तब हुआ जब वह अपनी मोटरसाइकिल से यात्रा कर रहे थे. उन पर 2 फरवरी की शाम को हमला हुआ था, और तलाशी अभियान के बाद, पुलिस और वन अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने अगले दिन उनका क्षत-विक्षत शव बरामद किया. उनकी मौत के बाद अब बाघिन का शव मिलने पर अब प्रकृति प्रेमी कई तरह के सावल खड़े कर रहे हैं.
प्रकृति प्रेमियों ने बाघिन के मौत पर खड़े किए सवाल
बता दें कि, घटना के तुरंत बाद, लोअर दिबांग वैली जिला प्रशासन ने सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक एडवाइजरी जारी की, जिसमें मेहाओ वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में बाघों की आवाजाही को देखते हुए रात में यात्रा, खासकर दोपहिया वाहनों से यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया गया. इस खास घटना ने एक बार फिर वन विभाग के कर्मचारियों की कार्यक्षमता और उनकी कथित अक्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
वन विभाग के कामकाज पर उठे गंभीर सवाल
प्रकृति प्रेमी ने वन विभाग के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि वन विभाग पूरी तरह से फेल हो गया है और उनकी अक्षमता के कारण एक पुलिसकर्मी की जान चली गई, और अब जानवर को किसी शरारती तत्व ने मार दिया है. उन्होंने आगे कहा कि कोई नहीं जानता कि पुलिसकर्मी को असल में किसने मारा. सभी को उसी बाघ पर शक है जिसे एक वायरल वीडियो में देखा गया था. इस मामले में ठीक से जांच होनी चाहिए थी, और वन विभाग के अधिकारियों को बाघ को बेहोश करना चाहिए था. उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग के सुस्त और लापरवाह रवैये के कारण बदमाशों ने जानवर को मार डाला. फिलहाल, वन और पुलिस अधिकारी बाघिन की मौत के असली कारण की जांच कर रहे हैं और यह पता लगा रहे हैं कि इसका पिछले हमले से कोई संबंध है या नहीं.