Budget Session 2026: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने रविवार को अपने सभी सांसदों (MPs) के लिए, संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—में एक ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी किया. इस निर्देश में सांसदों को आगामी संसदीय सत्र के दौरान 16 अप्रैल से 18 अप्रैल तक सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा गया है. सदन में उपस्थिति अनिवार्य है, और यह भी स्पष्ट रूप से साफ कर दिया गया है कि इस अवधि के दौरान किसी भी सांसद को कोई छुट्टी नहीं दी जाएगी.
यह निर्देश ऐसे समय में आया है, जब संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र 16 अप्रैल से शुरू होने वाला है. इस सत्र का मुख्य एजेंडा ‘महिला आरक्षण संशोधन विधेयक’ पर चर्चा करना होगा.
थ्री-लाइन व्हिप’ जारी
जारी किए गए पत्र में कहा गया है: “इसके द्वारा लोकसभा और राज्यसभा के सभी BJP सदस्यों के लिए गुरुवार से शनिवार तक—विशेष रूप से 16 अप्रैल से 18 अप्रैल, 2026 तक की अवधि के लिए एक ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी किया जा रहा है. सभी माननीय केंद्रीय मंत्रियों और सदस्यों से अनुरोध है कि वे उपर्युक्त तीन तारीखों पर सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें. सदन में उपस्थिति अनिवार्य है. इस अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की छुट्टी स्वीकृत नहीं की जाएगी. सदस्यों से अनुरोध है कि वे इस व्हिप का कड़ाई से पालन करें और सदन में अपनी निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित करें. हम आपके सहयोग की हृदय से सराहना करते हैं.”
BJP issues a three line whip to all its Lok Sabha MPs to be present in the house on 17th December, 2024 as some important legislative business is to be discussed. pic.twitter.com/lfdQgErwUs
— ANI (@ANI) December 16, 2024
सर्वदलीय बैठक बुलाए
इससे पहले दिन में, कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सरकार से आग्रह किया कि वह महिला आरक्षण विधेयक से संबंधित प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों और परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाए.
उन्होंने आरोप लगाया कि संसद का विशेष सत्र विपक्ष को विश्वास में लिए बिना बुलाया गया है, और चेतावनी दी कि सार्थक चर्चा के लिए जरूरी अहम विवरण अभी भी स्पष्ट नहीं हैं.
मल्लिकार्जुन खड़गे ने लिखा पत्र
पत्र में खड़गे ने लिखा, “मुझे अभी-अभी आपका वह पत्र मिला है, जो 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र के संबंध में है. इस सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा होनी है… यह विशेष सत्र हमें विश्वास में लिए बिना बुलाया गया है, और आपकी सरकार एक बार फिर परिसीमन के संबंध में कोई भी जानकारी दिए बिना ही हमसे सहयोग की अपेक्षा कर रही है. आप इस बात को समझेंगे कि परिसीमन और अन्य पहलुओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी के बिना, इस ऐतिहासिक कानून पर कोई भी सार्थक चर्चा करना असंभव होगा.”