India News (इंडिया न्यूज), Captain Deepak Singh: जम्मू-कश्मीर के डोडा में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान बुधवार को 25 वर्षीय कैप्टन दीपक सिंह शहीद हो गए थे। उन्होंने आखिरी बार अपनी मां से वीडियो कॉल पर झूठ बोला था कि वह आराम कर रहे हैं, चिंता की कोई बात नहीं है, यहां सब ठीक है। इसके कुछ देर बाद ही वह देश के लिए शहीद हो गए। एक बार फिर देश का एक और जवान भारत मां की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दे गया।
दरअसल, देहरादून के 25 वर्षीय कैप्टन दीपक सिंह जम्मू-कश्मीर के डोडा में एक मिशन के दौरान शहीद हो गए। जम्मू-कश्मीर के डोडा में बुधवार को आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए 25 वर्षीय कैप्टन दीपक सिंह ने अपनी मां से झूठ बोला था कि वह अपनी यूनिट में आराम करने जा रहे हैं। अक्सर ऐसा होता था कि शहीद कैप्टन दीपक अपनी मां से कॉल पर झूठ बोला करते थे ताकि उनकी मां को ज्यादा चिंता न हो। कैप्टन दीपक का पार्थिव शरीर गुरुवार दोपहर करीब 1 बजे जम्मू से देहरादून एयरपोर्ट लाया गया।
Captain Deepak Singh
बता दें कि, शहीद दीपक सिंह के पिता महेश सिंह का हाल ही में एक बयान सामने आया जिसमें उन्होंने बताया कि शहीद दीपक सिंह जम्मू-कश्मीर से अपने माता-पिता से वीडियो कॉल पर बात करता था और हमेशा अपनी मां से हर बात पर झूठ बोलता था। शहीद के पिता के मुताबिक दीपक अक्सर कहता था कि मां सब ठीक है… शांति, मैं आराम कर रहा हूं। दीपक के पिता का कहना है कि वह अक्सर वर्दी की शर्ट उतारने के बाद बनियान पहनकर अपनी मां से बात करता था, ताकि मां को लगे कि बेटा आराम कर रहा है और मां ज्यादा परेशान न हो। आपकी जानकारी के लिए यह जानना भी जरूरी है कि शहीद कैप्टन के पिता महेश सिंह उत्तराखंड पुलिस के रिटायर्ड इंस्पेक्टर हैं। शहीद के पिता ने अपने बयान में कहा कि हालांकि, एक पूर्व पुलिसकर्मी होने के नाते मैं दीपक के जूते और पैंट को देखता था, जिससे पता चलता था कि वह ड्यूटी पर है। चूंकि शहीद कैप्टन दीपक सिंह के पिता भी पुलिसकर्मी थे, इसलिए वह अपने बेटे की बात आसानी से समझ जाते थे।
आईएमए से स्नातक करने के बाद कैप्टन दीपक सिंह ने अपने माता-पिता से वादा किया था कि राष्ट्रीय राइफल्स में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद वह शादी करेंगे। शहीद दीपक सिंह की शादी कुछ ही समय में होने वाली थी। उनके पिता ने बताया कि वह दो बहनों के इकलौते भाई थे। घर में जश्न का माहौल था। एक तरफ शादी की तैयारियां चल रही थीं, वहीं दूसरी तरफ शहीद दीपक सिंह की बड़ी बहन ने बेटे को जन्म दिया था। घर में सभी उत्साहित थे, तभी अचानक शहीद दीपक सिंह की शहादत की खबर आई।
देहरादून में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर पुलिस कर्मियों की कई परेड देखने के बाद दीपक को सेना में जाने की प्रेरणा मिली, जहां उनका परिवार पुलिस क्वार्टर में रहता था। देहरादून के पीआरओ (डिफेंस) लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों समेत गणमान्य लोगों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ शहीद जवान को अंतिम विदाई दी। सूत्रों के मुताबिक शहीद दीपक सिंह के अंतिम संस्कार के दौरान भारी भीड़ उमड़ी थी और श्रद्धांजलि के दौरान कई बड़े नेता भी मौजूद थे, वहीं मुख्यमंत्री धामी ने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा उत्तराखंड इस समय परिवार के साथ खड़ा है। हमारी सरकार उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करेगी।
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