E20 पेट्रोल से पुरानी गाड़ियों का इंजन खराब होने की खबरें कितनी सच हैं? संसद में सरकार ने पुख्ता आंकड़ों और रिसर्च के साथ इस पर सबसे बड़ा खुलासा किया है.
E20 पेट्रोल से पुरानी गाड़ियों का इंजन खराब होने की खबरें कितनी सच हैं? संसद में सरकार ने पुख्ता आंकड़ों और रिसर्च के साथ इस पर सबसे बड़ा खुलासा किया है.
संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन राज्यसभा में एक बेहद अहम जानकारी सामने आई है. केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में E20 पेट्रोल (20% एथनॉल मिक्स पेट्रोल) के इस्तेमाल से गाड़ियों के खराब होने या उनके परफॉर्मेंस में गिरावट आने की कोई पुख्ता शिकायत नहीं मिली है.
सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में उठ रहे तमाम कयासों और चिंताओं को खारिज करते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने लिखित जवाब में कहा, ‘E20 ईंधन के इस्तेमाल से गाड़ियों को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है. इसके इस्तेमाल से इंजन फेल होने, पुर्जों के ज्यादा घिसने या परफॉर्मेंस खराब होने का कोई भी वैज्ञानिक सबूत नहीं मिला है.’
सरकार ने बताया कि सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को ऐसे ही नजरअंदाज नहीं किया गया, बल्कि बकायदा उनकी वैज्ञानिक जांच कराई गई. लैब टेस्टिंग, फील्ड वैलिडेशन और सड़कों पर चल रही गाड़ियों के असल अनुभवों के बाद ही यह नतीजा निकाला गया है कि E20 पेट्रोल का गाड़ियों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ रहा है.
मंत्रालय के मुताबिक, भारत में पिछले साढ़े तीन साल से E15+ (15% से ज्यादा एथनॉल) और पिछले ढाई साल से E19-E20 पेट्रोल की सप्लाई की जा रही है. इस समय देश में करीब 20 करोड़ टू-व्हीलर्स (दोपहिया वाहन) और 3 करोड़ पेट्रोल कारें इसी एथनॉल-ब्लेंडेड ईंधन पर बिना किसी दिक्कत के चल रही हैं.
संसद में सरकार ने जो आंकड़े पेश किए, वे उन लोगों को तसल्ली देने वाले हैं जो एथनॉल मिक्स पेट्रोल से डर रहे थे. देश की एक बड़ी गाड़ी निर्माता कंपनी (OEM) ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 2.84 करोड़ गाड़ियों की सर्विस की. इनमें से डेढ़ करोड़ गाड़ियाँ ऐसी थीं, जो पुरानी थीं और जिन्हें E20 पेट्रोल के लिए सर्टिफाइड नहीं किया गया था. इसके बावजूद, इन गाड़ियों के इंजन में जंग लगने, पुर्जे घिसने या उनकी लाइफ कम होने की एक भी शिकायत सामने नहीं आई. यही कहानी देश की एक बड़ी टू-व्हीलर कंपनी की भी रही.
सबसे बड़ा सवाल यही था कि जो गाड़ियाँ पुरानी हैं, क्या वे इस पेट्रोल को झेल पाएंगी? सरकार ने इस पर से भी पर्दा उठा दिया है. नीति आयोग (NITI Aayog) के तहत बनी एक अंतर-मंत्रालयी समिति (Inter-Ministerial Committee) ने इस पर गहराई से स्टडी की है. इस स्टडी में Indian Oil (IOCL), ARAI, IIP देहरादून और SIAM जैसे देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित संस्थानों की रिसर्च शामिल थी.
प्रयोगशालाओं में हुए टेस्ट और सड़कों पर किए गए ट्रायल्स से यह पूरी तरह साबित हो चुका है कि E20 पेट्रोल से पुरानी गाड़ियों के स्टार्ट होने, उनके चलने (ड्राइवैबिलिटी), माइलेज या इंजन के मेटल और प्लास्टिक के पुर्जों पर कोई भी बुरा असर नहीं पड़ता है.
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