<
Categories: देश

इंसानी आंत में पाए जाने वाली बैक्टीरिया ने ही कैसे इंदौर में मचाई तबाही? 398 मरीज अस्पताल में भर्ती; जानें क्या है पुलिस चौकी कनेक्शन

Indore Water Crisis: अधिकारियों कि माने तो दूषित पानी की वजह से अभी तक 398 मरीज अस्पताल में भर्ती कराए जा चुके हैं. वहीं इसमे से 256 मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं.

Indore Water Crisis: भारत का सबसे साफ शहर कहे जाने वाले इंदौर के पहचान पर ही बड़ा दाग लग गया है. मानव जिवन के लिए सबसे जरूरी चीजों में से एक पानी की शुद्धता को लेकर पूरे इंदौर में हंगामा मचा हुआ है. गंदे पानी की वजह से शहर में डायरिया मे गंभीर रूप ले लिया. जिसके वजह से कई लोग बिमार पड़ गए हैं.

अधिकारियों कि माने तो दूषित पेय जल की वजह से अभी तक 398 मरीज अस्पताल में भर्ती कराए जा चुके हैं. वहीं इसमे से 256 मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं. जबकि 142 मरीजों का इलाज अभी भी जारी है. वहीं इनमे से 11 मरीजों की हालत बेहद खराब है जिसके वजह से उन्हे ICU में रखा गया है.

4 दिसंबर (रविवार) को अधिकारियों ने बताया कि अब हालात अब कंट्रोल में है. लगातार निगरानी की जा रही है. भारत के सबसे साफ शहर में इस घटना ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है. 

कितने लोगों की हुई मौत?

प्रशासन ने अब तक 6 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है. हालांकि, इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने मृतकों की संख्या 10 बताई है. स्थानीय लोगों का दावा है कि 6 महीने के बच्चे समेत 16 लोगों की मौत हुई है.

कैसे दूषित हुआ पीने का पानी?

शुरुआती लैब टेस्ट में ई.कोलाई और क्लेबसिएला जैसे क्लासिक फेकल बैक्टीरिया का पता चला है. ये माइक्रोब्स पेट में नुकसान नहीं पहुंचाते लेकिन जब ये पीने के पानी में घुसकर कमजोर लोगों को इंफेक्ट करते हैं तो जानलेवा हो सकते हैं.

अधिकारियों का कहना है कि नर्मदा पीने के पानी की पाइपलाइन का एक लीक हिस्सा भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास टॉयलेट और सीवेज लाइन के ठीक नीचे या बगल से गुजर रहा था. माना जा रहा है कि इंसानी गंदगी वाला सीवर का पानी इस लीक से रिसकर पीने की सप्लाई में आ गया, जिससे घनी आबादी वाले इलाके में नल का पानी खराब हो गया.

लोगों ने कई दिनों तक बदबूदार और रंगहीन पानी की शिकायत की जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग उल्टी, दस्त, पेट दर्द और तेज बुखार के साथ अस्पतालों में आने लगे.

पानी में बैक्टीरिया

पानी के सैंपल के शुरुआती एनालिसिस में फेकल कोलीफॉर्म का पता चला है जिसमें ई.कोलाई और क्लेबसिएला शामिल हैं ये बैक्टीरिया आमतौर पर सीवर के पानी में पाए जाते हैं जो इंसानी कचरे से खराब हो गए हैं.

ये बैक्टीरिया आमतौर पर इंसानी आंत में बिना किसी नुकसान के रहते हैं, लेकिन जब ये साफ किए गए पीने के पानी में मौजूद होते हैं तो खतरनाक फेकल प्रदूषण का संकेत देते हैं.

ई. कोलाई और उससे जुड़े पेट के बैक्टीरिया के पैथोजेनिक स्ट्रेन एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस का कारण बन सकते हैं, जिससे बहुत ज़्यादा पानी वाला या खून वाला दस्त, उल्टी और तेज़ी से डिहाइड्रेशन हो सकता है. बच्चों और बुज़ुर्गों को ये ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं.

गंभीर मामलों में टॉक्सिन और बहुत ज़्यादा पानी की कमी ज़रूरी अंगों को बंद कर सकती है, जिससे जो "पेट का इन्फेक्शन" शुरू होता है वह तुरंत रिहाइड्रेशन और एंटीबायोटिक्स के बिना जानलेवा हो सकता है.

एक आम बैक्टीरिया कैसे बना जानलेवा?

इंदौर की दुखद घटना दिखाती है कि कैसे आम पेट के माइक्रोब्स जानलेवा बन गए. एक स्ट्रक्चरल खराबी ने सीवेज की लगातार बहती धारा को नगर निगम की मुख्य पाइपलाइन में मिलने दिया, जिससे एक साथ हज़ारों लोग ज़्यादा इन्फेक्शन वाले डोज़ के संपर्क में आ गए.

भीड़भाड़ वाले घर, शिकायतों पर देर से जवाब, और मेडिकल केयर तक शुरुआती पहुंच कम होने का मतलब था कि कई मरीज़ गंभीर डिहाइड्रेशन होने के बाद ही अस्पताल पहुंचे, जिससे मौत का खतरा तेज़ी से बढ़ गया.

एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि जब तक पानी और स्टूल सैंपल की पूरी माइक्रोबायोलॉजिकल रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक शिगेला, साल्मोनेला या विब्रियो कोलेरा जैसे दूसरे सीवेज बैक्टीरिया होने से इनकार नहीं किया जा सकता, जिससे शहरी पानी और सफ़ाई सुरक्षा में सिस्टमिक सुधारों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है.

नर्मदा नदी पर निर्भर हैं इंदौर

बता दें कि इंदौर की पानी की जरूरतें पूरी तरह से नर्मदा नदी पर निर्भर हैं. नगर निगम की पाइपलाइनें 80 किलोमीटर दूर खरगोन जिले के जलूद से नर्मदा का पानी इंदौर लाती हैं और हर दूसरे दिन घरों में सप्लाई करती हैं. नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट पर सिर्फ बिजली के बिल पर ही हर महीने लगभग 25 करोड़ रुपये का खर्च आता है.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

Recent Posts

Anupama Spoiler 18 Feb 2026: गौतम करेगा पराग को बर्बाद, अनुपमा के सामने आएगा रविंदर का सच! TRP में तहलका मचाएगा महाट्विस्ट

Anupama Spoiler 18 Feb 2026: रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) का सीरियल ‘अनुपमा’ टीवी पर जमकर…

Last Updated: February 18, 2026 13:47:32 IST

सूरत के ‘वसूली भाई’ चिराग गोटी का निकला सरेआम जुलूस; रील की निकली हेकड़ी, दहशत फैलाने वाले गुंडे की हवा टाइट!

सूरत पुलिस ने कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले अपराधियों को साफ संदेश देने के…

Last Updated: February 18, 2026 13:48:30 IST

शाही सुगंध से लेकर कैसे बना 1,785 करोड़ के साम्राज्य तक का सफर, यहां जानें मैसूर सैंडल सोप की अनोखी कहानी

मैसूर सैंडल सोप (Mysore Sandal Soap) की यात्रा एक संकट को अवसर में बदलने की…

Last Updated: February 18, 2026 13:38:13 IST

UPI के जरिए अब आसानी से निकाल पाएंगे PF का पैसा, EPFO करेगा नया मोबाइल ऐप लॉन्च, जानें डिटेल

अब यूपीआई के जरिए आप अपने पीएफ के पैसे को सीधा अपने बैंक अकाउंट में…

Last Updated: February 18, 2026 13:36:15 IST

टूटी-फूटी हिंदी और तमिल बनी सहारा, एक-दूसरे की भाषा से अनजान महिलाओं की प्यारी बातचीत, वीडियो वायरल

तमिलनाडु में रहने वाली एक उत्तर भारतीय महिला और उनकी तमिल लैंडलेडी के बीच के…

Last Updated: February 18, 2026 13:30:16 IST

8th Pay Commission: 2.86 से लेकर 3.25 तक बढ़ सकता है फिटमेंट फैक्टर, 18000 से बढ़कर 58500 रुपये हो जाएगी सैलरी

जानकारो की मानें तो 8वां वेतन आयोग लागू होने में अभी समय लग सकता है.…

Last Updated: February 18, 2026 13:29:02 IST