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Modi 3.0: गठबंधन मजबूरी या जरूरी? 2019 के रोडमैप पर ही उतरी मोदी सरकार

Rajesh kumar • LAST UPDATED : June 11, 2024, 3:42 pm IST

India News(इंडिया न्यूज),Modi Government 2024: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी टीम बना ली है। रक्षा मंत्रालय राजनाथ सिंह को, गृह मंत्रालय अमित शाह को, विदेश मंत्रालय एस जयशंकर को और केंद्रीय वित्त मंत्रालय निर्मला सीतारमण को दिया गया है। मोदी सरकार 3.O में भाजपा ने सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (CCS) से संबंधित मंत्रालयों को अपने पास रखा है जो राष्ट्रीय हित और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अहम फैसले लेती है। इस तरह नरेंद्र मोदी ने पुराने मंत्रालयों को अपनी भरोसेमंद कोर टीम को सौंपकर साफ कर दिया है कि गठबंधन के बावजूद एनडीए सरकार 2019 के रोडमैप पर आगे बढ़ेगी।

पीएम मोदी लगातार कहते रहे हैं कि उनका तीसरा कार्यकाल बड़े फैसलों से भरा होगा। पिछले 10 साल का काम तो बस ट्रेलर है। तीसरी बार सत्ता संभालते ही पीएम मोदी ने अपनी कैबिनेट का गठन और विभागों का बंटवारा कर दिया। उन्होंने रक्षा, विदेश, गृह और वित्त जैसे सभी हाई प्रोफाइल मंत्रालय अपने पास रखे हैं। इसमें स्वास्थ्य, परिवहन, शिक्षा, कपड़ा, ऊर्जा, शहरी विकास, कृषि, वाणिज्य, ऊर्जा, शिपिंग और जलमार्ग, उपभोक्ता और नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, पर्यावरण, पर्यटन, महिला और बाल विकास, श्रम-रोजगार, खेल, कोयला और खनन और जल शक्ति मंत्रालय शामिल हैं।

अधिकांश मंत्रियों के पुराने विभाग

मोदी सरकार के अधिकांश मंत्रियों के पुराने विभाग बरकरार रखे गए हैं। पीएम मोदी ने सीसीएस से जुड़े खास तौर पर रक्षा, गृह, विदेश मामले और वित्त जैसे मंत्रालयों में कोई बदलाव नहीं किया है। 2004 से 2014 तक कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने इन चार महत्वपूर्ण मंत्रालयों को अपने पास रखा था। कांग्रेस की मनमोहन सरकार यूपीए सहयोगियों के पूर्ण समर्थन से सत्ता में थी। इसके बावजूद कांग्रेस ने इन चार महत्वपूर्ण मंत्रालयों को अपने पास रखा।

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जब सरकार बनी तो इन मंत्रालयों को गठबंधन सहयोगियों के बीच बांट दिया गया। 1999 में वाजपेयी सरकार में भी सीसीएस से जुड़े कई मंत्रालय सहयोगी दलों के पास चले गए थे, लेकिन 2014 से 2019 तक नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दोनों कार्यकालों में चारों मंत्रालय भाजपा के पास ही रहे, क्योंकि पार्टी के पास पूर्ण बहुमत था। हालांकि इस बार नतीजों के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि इनमें से एक या दो मंत्रालय गठबंधन के सबसे बड़े सहयोगी टीडीपी और जनता जेडीयू के खाते में जा सकते हैं। पीएम मोदी ने बिना कोई बदलाव किए चारों मंत्रालय अपने पास रखे हैं और इनकी कमान पुराने नेताओं को सौंपी है। इसके जरिए साफ संदेश दिया गया है कि गठबंधन सरकार के बावजूद उनके तीसरे कार्यकाल में भी उतनी ही तेजी से फैसले लिए जाएंगे, जितने पहले दो कार्यकालों में लिए गए थे। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना, नागरिकता कानून को लागू करना बड़े फैसलों में गिना जाता है। पुराने मंत्रालयों को अपनी भरोसेमंद कोर टीम को सौंपकर पीएम ने साफ कर दिया कि पिछली नीतियों को ही आगे बढ़ाया जाएगा। गठबंधन सरकार होने के बावजूद भाजपा अपनी नीतियों से किसी तरह का समझौता नहीं करेगी।

सीसीएस के चारों मंत्रालय भाजपा के पास

राष्ट्रीय हित और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अहम फैसले लेने वाले सीसीएस के चारों मंत्रालय भाजपा ने अपने पास रखे हैं। इसका सीधा सा मकसद यह है कि भले ही सरकार गठबंधन के बल पर हो, लेकिन मोदी सरकार बिना किसी दबाव के राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसले ले सकेगी। इसके अलावा जनता में छवि और चुनावी संभावनाओं को मजबूत करने की रणनीति भी है। राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और मजबूत शासन ऐसे विषय हैं, जिन पर भाजपा चुनावी एजेंडा भी तय करती रही है। मोदी सरकार ने पिछले दो कार्यकाल में अपने काम से अपनी छवि मजबूत की है, जिसे वह हर कीमत पर बरकरार रखना चाहती है।

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भाजपा भले ही इस बार अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर पाई हो, लेकिन एनडीए सहयोगियों के बल पर वह तीसरी बार सरकार बनाने में कामयाब रही। ऐसे में गठबंधन की राजनीति अप्रत्याशित होती है, यहां सहयोगियों की प्राथमिकताएं अलग-अलग होती हैं। इस वजह से सरकार अक्सर नीतिगत निष्क्रियता का शिकार हो जाती है। देशभर में सबके लिए एक समान कानून बनाना भाजपा के एजेंडे में रहा है। भाजपा ने अपने 2024 के घोषणापत्र में इस विषय को रखा था। उत्तराखंड में इसे लागू करके भाजपा ने लिटमस टेस्ट कर लिया है और अब एनडीए के तीसरे कार्यकाल में वह यूसीसी को आगे बढ़ाने पर जोर दे सकती है। यूसीसी के मुद्दे पर सहयोगी दलों को आम सहमति बनानी होगी। इसी भाजपा ने एक देश एक चुनाव का वादा किया है। मोदी सरकार तीसरे कार्यकाल में इसे लागू करने पर जोर दे सकती है। ऐसे में मोदी सरकार ने अहम मंत्रालय अपने पास रखकर बड़ा राजनीतिक दांव चल दिया है।

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