Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने BCCI से जुड़े एक मामले में बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने अनुराग ठाकुर पर BCCI में कोई भी पदभार संभालने के लिए लगाए गए बैन को हटा दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अब अनुराग ठाकुर BCCI से जुड़े मामलों में भाग लेने के लिए स्वतंत्र हैं. दरअसल, बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसमें उन्होंने SC के आदेश के अनुच्छेद 25 (ii) के तहत लगाए गए बैन को हटाने की मांग की थी. इस याचिका पर सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई की. कोर्ट ने BCCI से जुड़े एक मामले में अपने जनवरी 2017 के आदेश में संशोधन करते हुए अनुराग ठाकुर को राहत दी है. बता दें कि साल जनवरी 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर को BCCI के कामकाज से ‘सीज एंड डिसिस्ट’ यानी पूरी तरह से दूर रहने का निर्देश दिया था. तत्कालीन सीजेआई टी.एस. ठाकुर की अगुवाई वाली पीठ ने अनुराग ठाकुर को BCCI अध्यक्ष पद से हटाया था. उनके साथ ही सेक्रेटरी अजय शिर्के को भी पद से हटाया गया था.
अदालत ने खत्म किया बैन
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अनुराग ठाकुर की याचिका पर सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट ने ध्यान दिया कि उस समय अनुराग ठाकुर ने बिना किसी शर्त के न्यायालय के सामने माफी मांगी थी. अनुराग ठाकुर की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट पीएस पटवालिया ने कोर्ट में कहा कि यह बैन पिछले 9 साल से जारी है. अगर इसे हटाया नहीं गया, तो इससे गंभीर कठिनाइयां हो सकती हैं. इस पर सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि यह बैन आजीवन प्रतिबंध नहीं था. कोर्ट ने ठाकुर की बिना शर्त की माफी को ध्यान में रखते हुए माना कि अब बैन लगाना जरूरी नहीं है, इसमें ढील दी जा सकती है.
अनुराग ठाकुर BCCI में करेंगे वापसी!
दरअसल, साल 2017 में लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू न करने की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर को पद से हटाया था. लोढ़ा कमेटी के नियमों में आयु सीमा और सरकारी पद जैसे कई कड़े प्रावधान शामिल थे. अब सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर पर लगे 9 साल पुराने बैन को हटा लिया है. इसका मतलब है कि अब वे BCCI के मामलों में भाग ले पाएंगे और बोर्ड से जुड़े कामकाज और बैठक में शामिल हो सकेंगे. बता दें कि अनुराग ठाकुर को 2 मई 2016 को BCCI का अध्यक्ष चुना गया था. जनवरी 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अनुराग ठाकुर को उनके पद से हटा दिया गया था. साथ ही उन्हें बोर्ड के कामकाज और अन्य सभी मामलों से दूर रहने का निर्देश दिया गया था.