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एक ही दिन में दो बड़े इस्तीफे! बंगाल के गवर्नर आनंद बोस और लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंदर गुप्ता ने छोड़ा पद, क्या है वजह?

CV Ananda Bose Resignation: पश्चिम बंगाल के गवर्नर सी.वी. आनंद बोस और लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंदर गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-03-05 20:28:46

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CV Anand Bose and LG Kavinder Gupta Resignation: पश्चिम बंगाल से इस समय की सबसे बड़ी पॉलिटिकल खबर सामने आ रही है. गवर्नर सी.वी. आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि, उनके इस्तीफे का कारण अभी तक ऑफिशियली नहीं बताया गया है.
वहीं दूसरी तरफ लद्दाख से यह खबर आ रही है कि लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंदर गुप्ता ने निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया.

कविंदर गुप्ता ने क्यों दिया इस्तीफा?

कविंदर गुप्ता ने लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर का पद संभालने के करीब नौ महीने बाद ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. गुप्ता ने 18 जुलाई, 2025 को शपथ ली थी, और वे केंद्र शासित प्रदेश के तीसरे LG बने थे. गुप्ता ने अपने निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया है. उनके कार्यकाल के दौरान इलाके में अशांति बढ़ रही थी, जहां लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस जैसे सिविल सोसाइटी ग्रुप और संगठन राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची की सुरक्षा और स्थानीय लोगों के लिए नौकरी में आरक्षण के लिए विरोध कर रहे थे.

सीवी आनंद ने क्यों दिया इस्तीफा?

सीवी आनंद बोस ने 17 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था. फिलहाल उनके इस्तीफा देने की कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है. इस इस्तीफे से पश्चिम बंगाल की राजनीति में गरमागरम बहस छिड़ गई है. राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, और इस समय राज्यपाल का इस्तीफा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, न तो राजभवन और न ही केंद्र सरकार ने इस फैसले के बारे में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया है. उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस मामले पर और जानकारी सामने आ सकती है.

सीवी आनंद का बंगाल सरकार से कैसा था संबंध?

बंगाल के गवर्नर के तौर पर सीवी आनंद कई मुद्दों पर राज्य सरकार, खासकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से उनके टकराव की खबरें खूब आती थीं. यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर की नियुक्ति, अलग-अलग बिलों पर साइन करने और एडमिनिस्ट्रेटिव मामलों को लेकर राजभवन और राज्य सरकार के बीच अक्सर मतभेद होते थे.
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार और राष्ट्रपति भवन जल्द ही इस मामले में ऑफिशियल जानकारी जारी कर सकते हैं. संवैधानिक प्रक्रिया के तहत, गवर्नर का इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजा जाता है. इस्तीफा स्वीकार होने के बाद, नए गवर्नर की नियुक्ति होने या किसी दूसरे गवर्नर को अतिरिक्त चार्ज दिए जाने की संभावना है.

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Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-03-05 20:28:46

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CV Anand Bose and LG Kavinder Gupta Resignation: पश्चिम बंगाल से इस समय की सबसे बड़ी पॉलिटिकल खबर सामने आ रही है. गवर्नर सी.वी. आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि, उनके इस्तीफे का कारण अभी तक ऑफिशियली नहीं बताया गया है.
वहीं दूसरी तरफ लद्दाख से यह खबर आ रही है कि लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंदर गुप्ता ने निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया.

कविंदर गुप्ता ने क्यों दिया इस्तीफा?

कविंदर गुप्ता ने लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर का पद संभालने के करीब नौ महीने बाद ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. गुप्ता ने 18 जुलाई, 2025 को शपथ ली थी, और वे केंद्र शासित प्रदेश के तीसरे LG बने थे. गुप्ता ने अपने निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया है. उनके कार्यकाल के दौरान इलाके में अशांति बढ़ रही थी, जहां लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस जैसे सिविल सोसाइटी ग्रुप और संगठन राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची की सुरक्षा और स्थानीय लोगों के लिए नौकरी में आरक्षण के लिए विरोध कर रहे थे.

सीवी आनंद ने क्यों दिया इस्तीफा?

सीवी आनंद बोस ने 17 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था. फिलहाल उनके इस्तीफा देने की कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है. इस इस्तीफे से पश्चिम बंगाल की राजनीति में गरमागरम बहस छिड़ गई है. राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, और इस समय राज्यपाल का इस्तीफा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, न तो राजभवन और न ही केंद्र सरकार ने इस फैसले के बारे में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया है. उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस मामले पर और जानकारी सामने आ सकती है.

सीवी आनंद का बंगाल सरकार से कैसा था संबंध?

बंगाल के गवर्नर के तौर पर सीवी आनंद कई मुद्दों पर राज्य सरकार, खासकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से उनके टकराव की खबरें खूब आती थीं. यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर की नियुक्ति, अलग-अलग बिलों पर साइन करने और एडमिनिस्ट्रेटिव मामलों को लेकर राजभवन और राज्य सरकार के बीच अक्सर मतभेद होते थे.
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार और राष्ट्रपति भवन जल्द ही इस मामले में ऑफिशियल जानकारी जारी कर सकते हैं. संवैधानिक प्रक्रिया के तहत, गवर्नर का इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजा जाता है. इस्तीफा स्वीकार होने के बाद, नए गवर्नर की नियुक्ति होने या किसी दूसरे गवर्नर को अतिरिक्त चार्ज दिए जाने की संभावना है.

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