Vijay Thalapathy: तमिलनाडु की कोलाथुर विधानसभा सीट के चुनाव नतीजे को चुनौती देने वाली पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की याचिका को खारिज कर दिया गया है. कोर्ट ने इस याचिका को सुनवाई योग्य नहीं बताया है.
मद्रास हाईकोर्ट ने एम.के स्टालिन की याचिका को खारिज कर दिया.
Vijay Thalapathy: तमिलनाडु की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. मद्रास हाई कोर्ट ने डीएमके अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को बड़ा झटका देते हुए कोलाथुर विधानसभा सीट के चुनाव नतीजे को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी है. स्टालिन ने चुनाव में इस्तेमाल हुई VVPAT पर्चियों की गिनती कराने के साथ-साथ तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) के विधायक वीएस बाबू का चुनाव रद्द करने और खुद को विजेता घोषित करने की मांग की थी.
चीफ जस्टिस एसए धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की बेंच ने स्टालिन की रिट याचिका को ‘सुनवाई योग्य नहीं’ माना. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे गुरुवार को सुनाया गया. इस मामले में चुनाव आयोग (ECI) ने स्टालिन की याचिका का विरोध किया था. आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 329(B) और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 80 का हवाला देते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के नतीजे को चुनौती देने के लिए रिट याचिका नहीं बल्कि चुनाव याचिका दायर करनी होती है.
कोलाथुर विधानसभा सीट का मुकाबला काफी दिलचस्प रहा था. स्टालिन को चुनाव में 74,202 वोट मिले. वहीं TVK के वीएस बाबू ने 82,997 वोट हासिल किए। इस तरह बाबू ने स्टालिन को 8,795 वोटों से मात दी थी. नतीजे घोषित होने के सिर्फ तीन दिन बाद, 4 मई को स्टालिन ने EVM की जांच और सत्यापन की मांग की थी. उनकी दलील थी कि सुप्रीम कोर्ट के 2024 के एक फैसले के तहत दूसरे या तीसरे स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार कुछ EVM की बर्न मेमोरी या माइक्रोकंट्रोलर की जांच की मांग कर सकता है.
स्टालिन की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि चुनाव आयोग ने जांच प्रक्रिया शुरू करने में काफी देरी की. कोलाथुर में इस्तेमाल हुए 286 EVM सेटों में से 14 की जांच 29 जुलाई 2026 को शुरू हुई और 5 अगस्त को पूरी हुई. स्टालिन ने दावा किया कि जांच के दौरान EVM के काम करने में कुछ गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। उन्होंने एक ऐसी घटना का भी जिक्र किया, जिसमें एक यूनिट उनका नाम पहचानने में कथित तौर पर विफल रही. सिब्बल ने तर्क दिया कि जब जांच में देरी चुनाव आयोग की वजह से हुई, तो इसकी जिम्मेदारी स्टालिन पर नहीं डाली जा सकती. हालांकि, मद्रास हाई कोर्ट ने उनकी रिट याचिका खारिज कर दी. कोर्ट के इस फैसले से TVK के वीएस बाबू की कोलाथुर सीट पर जीत फिलहाल बरकरार है.
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