Who is Ranvir Sachdeva: नई दिल्ली (New Delhi) में हो रहा
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 (India AI Impact Summit 2026), कई वजहों से रोज़ाना सुर्खियों में रहता है. लेकिन, एक खास दिलचस्प और प्रेरणा देने वाली बात यह है कि समिट में सबसे कम उम्र के भारतीय कोडर और कीनोट स्पीकर 8 साल के रणवीर सचदेवा हैं, जिन्हें एक होनहार बच्चा कहा जा रहा है. उन्होंने नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहे समिट में बोलने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति के रूप में इतिहास रच दिया, वह सुंदर पिचाई और सैम ऑल्टमैन से भी मिले. रणवीर ने मंच पर बताया कि वह प्राचीन भारतीय सोच को आज के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से कैसे जोड़ते हैं. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें कि रणवीर सचदेवा कौन है और मात्र 8 साल की उम्र में उन्होंने कोडिंग में महारथ कैसे हासिल की.
रणवीर सचदेवा कौन हैं?
रणवीर सचदेवा के टैलेंट ने उन्हें इंडस्ट्री के कुछ सबसे जाने-माने लीडर्स से बातचीत करने का मौका दिया है. समिट में, वह गूगल के CEO सुंदर पिचाई और ओपनAI के CEO सैम ऑल्टमैन से मिले, बाद में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर उन पलों की तस्वीरें शेयर कीं. खालसा वॉक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जब वह नई दिल्ली में ग्रेड 1 के स्टूडेंट थे, तब वह पहले से ही एक एप्पल स्विफ्ट प्रोग्रामर थे और उन्होंने एप्पल के दिल्ली स्टोर के लॉन्च के दौरान एप्पल के CEO टिम कुक को अपनी स्किल्स दिखाईं. रणवीर के पिता, गुरजोत सचदेवा, अपने बेटे की मैथ्स और लॉजिक में जबरदस्त काबिलियत के बारे में बताते हुए गर्व से झूम उठे. उन्होंने यह भी बताया कि जब वह सिर्फ़ पांच साल का था, तो रणवीर अपनी क्लास में सबसे छोटा बच्चा था, जहां ज़्यादातर स्टूडेंट 6-7 साल के होते थे.
जिनेवा, स्विट्जरलैंड में भी भारत का नाम रणवीर सचदेवा ने किया रोशन
खालसा वॉक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ज़बरदस्त टैलेंट न सिर्फ़ रणवीर के परिवार के लिए बल्कि पूरे इंडियन कम्युनिटी के लिए भी गर्व की बात है. उन्हें 2025 में जिनेवा, स्विट्जरलैंड में यूनाइटेड नेशंस के AI फॉर गुड ग्लोबल समिट में सबसे कम उम्र के कीनोट स्पीकर के तौर पर बुलाया गया था, तब वह सिर्फ़ सात (7) साल के थे.
AI पर क्या कहना है रणवीर सचदेवा का?
रणवीर सचदेवा, चाइल्ड प्रोडिजी, टेक्नोलॉजिस्ट, ग्लोबल लेखक ने कहा कि मैं इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में सबसे कम उम्र के कीनोट स्पीकर के तौर पर यहां हूं. मैं इस बारे में बात कर रहा हूं कि मैं पुरानी भारतीय सोच को आज की टेक्नोलॉजी से कैसे जोड़ रहा हूं. मैं उन अलग-अलग तरीकों के बारे में भी बता रहा हूं जिनसे बाकी देश AI बना रहे हैं. मैं इस बारे में बात कर रहा हूं कि भारत AI कैसे बना रहा है. मैं अभी-अभी रिलीज हुए एक भारतीय AI मॉडल का अपना यूज केस शेयर कर रहा हूं और यह भी कि मैं भारत की GDP में कैसे योगदान दे रहा हूं और इसके साथ AI लिटरेसी को कैसे बढ़ावा दे रहा हूं.
एक युवा इंडियन कोडर की यह कहानी न सिर्फ़ इंडिया के युवाओं के ज़बरदस्त पोटेंशियल को दिखाती है, बल्कि एजुकेशन में कोडिंग की इंपॉर्टेंस पर भी ज़ोर देती है.