Bodyguard Satellite: भारत अंतरिक्ष में मौजूद अपने सैटेलाइट्स को संभावित खतरों से बचाने के लिए ‘बॉडीगार्ड सैटेलाइट’ बनाने की तैयारी कर रहा है. जानिए आखिर क्या है ये और क्यों पड़ी इसकी जरूरत.
भारत बना रहा बॉडीगार्ड सैटेलाइट
Bodyguard Satellite Explained: भारत अपने सैटेलाइट्स की सुरक्षा के लिए ‘बॉडीगार्ड सैटेलाइट’ बनाने पर काम कर रहा है. यह फैसला 2024 में हुई उस घटना के बाद लिया गया, जब एक दुश्मन अंतरिक्ष यान के साथ टकराव का खतरा पैदा हो गया था, लेकिन सैटेलाइट बाल-बाल बच गया. चलिए जानते हैं इसके बारे में सबकुछ.
बॉडीगार्ड सैटेलाइट खास तरह के अंतरिक्ष यान होते हैं, जिन्हें महत्वपूर्ण और महंगे सैटेलाइट्स की सुरक्षा के लिए बनाया जाता है. ये सैटेलाइट्स अपने आसपास अंतरिक्ष में होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हैं. अगर कोई दूसरा सैटेलाइट या अंतरिक्ष यान बहुत करीब आता है या कोई खतरा पैदा करता है, तो ये उसे तुरंत पहचान लेते हैं. इसके बाद ये अपने मुख्य सैटेलाइट को चेतावनी देते हैं और जरूरत पड़ने पर उसकी कक्षा बदलने या अन्य तरीके से खतरे से बचाने में मदद करते हैं. इस तरह ये अंतरिक्ष में सुरक्षा गार्ड की तरह काम करते हैं.
मीडिया में खबरें चल रही हैं कि भारत अब दो तरह के बॉडीगार्ड सैटेलाइट बना रहा है. पहले प्रकार के सैटेलाइट में एक रोबोटिक भुजा है, जी हां, अंतरिक्ष में एक यांत्रिक भुजा, जो किसी भी खतरनाक सैटेलाइट को पकड़कर दूर धकेल सकती है. दूसरे प्रकार के सैटेलाइट समूह में काम करते हैं. जब कोई छोटा दुश्मन सैटेलाइट किसी भारतीय सैटेलाइट के करीब आने की कोशिश करता है, तो ये बॉडीगार्ड सैटेलाइट उसे एक बॉक्स जैसी संरचना में घेर लेते हैं और उसे दूर धकेल देते हैं. ठीक वैसे ही जैसे किसी नाइट क्लब में बाउंसर होते हैं, लेकिन पृथ्वी से 500 किलोमीटर ऊपर.
दो बड़ी घटनाओं ने भारत को यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया. पहली घटना 2024 में हुई, जब अंतरिक्ष में एक संभावित टकराव से भारत का सैटेलाइट बाल-बाल बच गया. दूसरी और ज्यादा महत्वपूर्ण घटना पिछले साल पाकिस्तान के साथ हुए सैन्य तनाव के दौरान सामने आई. उस समय करीब चार दिनों तक दोनों देशों के बीच तनाव रहा और इस दौरान सैटेलाइट्स ने अहम भूमिका निभाई. इनका इस्तेमाल दुश्मन के ठिकानों का पता लगाने, सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने और रडार सिस्टम की स्थिति जानने के लिए किया गया. लेकिन बाद में भारत के रक्षा मंत्रालय से जुड़े एक शोध समूह ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इस दौरान चीन ने कथित तौर पर पाकिस्तान को सैटेलाइट से मदद दी थी. इससे पाकिस्तान को अपने रडार और वायु रक्षा प्रणालियों को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने में सहायता मिली. इस स्थिति से यह साफ हुआ कि भारत दो मोर्चों पर संघर्ष कर रहा था और एक तीसरा देश अंतरिक्ष से निगरानी कर रहा था। इससे भारत की एक बड़ी कमजोरी सामने आई. भारत के सैटेलाइट तो दुश्मन पर नजर रख सकते थे, लेकिन अगर कोई उन्हें निशाना बनाता, नुकसान पहुंचाता या उनके काम में दखल देता, तो भारत के पास उसे रोकने का कोई ठोस तरीका नहीं था.
भारत से पहले भी कई देश इसमें आगे निकल चुके हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार चीन डॉगफाइटिंग उपग्रहों का परीक्षण कर रहा है, जो उपग्रहों के चारों तरफ से निगरानी करेगा. वहीं जापान ने किलर सैटेलाइट से बचाव के लिए अपने खुद के प्रोटोटाइप बॉडीगार्ड सैटेलाइट का विकास शुरू कर दिया है. इसके अलावा अमेरिका और रूस भी कई प्रयोग कर रहे हैं.
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