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Zakat vs Fitra: इस्लाम में जकात और फितरा क्या होता है? इस बार कितना देना होगा फितरा और जकात, जानें दोनों में अंतर

Ramadan 2026: इस्लाम धर्म की मान्यता के अनुसार, रमजान केवल इबादत का ही नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की मदद का भी महीना माना जाता है. इसलिए इस पाक महीने में जकात और फितरा देने का विशेष महत्व बताया गया है. ऐसे सवाल है कि आखिर, इस्लाम में जकात और फितरा क्या होता है? जकात और फितरा दोनों में अंतर क्या है? इस बार फितरा और जकात कितना देना होगा? आइए जानते हैं इस बारे में-

Ramadan 2026: इस्लामी कैलेंडर का सबसे पाक महीना रमजान 2026 का दौर जारी है. दुनिया भर के मुसलमानों के लिए रमजान सबसे खास त्योहारों में से एक है. रमजान या रमदान इस्लामिक कैलेंडर का नवां महीना है. मुसलमान इस पूरे महीने रोज़ा रखते हैं और अपना ज्यादा से ज्यादा समय अल्लाह की इबादत में बिताते हैं. इस्लाम धर्म की मान्यता के अनुसार, रमजान केवल इबादत का ही नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की मदद का भी महीना माना जाता है. इसलिए इस पाक महीने में जकात और फितरा देने का विशेष महत्व बताया गया है. ऐसे सवाल है कि आखिर, इस्लाम में जकात और फितरा क्या होता है? जकात और फितरा दोनों में अंतर क्या है? इस बार फितरा और जकात कितना देना होगा? आइए जानते हैं इस बारे में-

इस्लाम में जकात और फितरा क्या है?

दावते इस्लामी वेबसाइट के अनुसार, इस्लाम कहता है कि ईद का त्योहार अमीर और गरीब सभी के लिए है. कोई भी व्यक्ति आर्थिक तंगी के कारण खुशियों से वंचित न रहे, इसलिए जकात और फितरा के जरिए जरूरतमंदों की सहायता की जाती है. जानकारी के लिए बता दूं कि, फितरा और जकात एक ही चीज नहीं हैं. दोनों में काफी अंतर है. जकात कुल जमा संपत्ति का 2.5% होती है. इसे साल में कभी भी दिया जा सकता है. जबकि, फितरा हर व्यक्ति के लिए तय रकम होती है. इसे ईद की नमाज से पहले देना जरूरी होता है.

जकात की रकम कैसे तय होती है?

इस्लाम के जानकार मोहम्मद मतीन बताते हैं कि, जकात इस्लाम का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है. इसका सीधा फंडा है कि, आपकी कुल संपत्ति का 2.5 फीसदी हिस्सा. अगर किसी मुसलमान के पास 60 हजार रुपये की नकदी या उतनी कीमत के जेवरात हैं, तो उन पर जकात और फितरा अदा करना फर्ज माना गया है. कहने का मतलब है कि, सालभर की बचत का 2.5 प्रतिशत हिस्सा गरीब और जरूरतमंदों को देना अनिवार्य है. जकात हमेशा गोपनीय रूप से दी जानी चाहिए, ताकि लेने वाले के आत्मसम्मान को ठेस न पहुंचे.

जकात कौन और किसे देता है?

जकात देना हर हैसियतमंद (सक्षम) मुस्लिम व्यक्ति पर फर्ज (जरूरी) है. वैसे तो जकात पूरे साल में कभी भी दी जा सकती है. लेकिन, ज्यादातर लोग रमजान के महीने में ही जकात निकालते हैं. असल में ईद से पहले जकात अदा करने का रिवाज है. जकात गरीबों, विधवाओं, अनाथ बच्चों या किसी बीमार व कमजोर व्यक्ति को दी जाती है. महिलाओं या पुरुषों के पास अगर सोने चांदी के गहनों के रूप में भी कोई संपत्ति होती है, तो उसकी कीमत के हिसाब से भी जकात दी जाती है.

फितरा की रकम देना जरूरी क्यों?

इस्लाम के जानकार बताते हैं कि, जकात-अल-फ़ित्र ईद-अल-फ़ित्र की नमाज से पहले दिया जाने वाला एक जरूरी दान है. रमजान के अंत में, मुसलमानों पर फितरा देना अनिवार्य है. यह दान अल्लाह का शुक्र अदा करने का प्रतीक है. फितरा में हर व्यक्ति को एक तय रकम दान करनी होती है. ताकि गरीब और जरूरतमंद लोग भी ईद की खुशी मना सकें.

रमजान 2026 में कितना देना होगा फितरा?

दावते इस्लामी वेबसाइट के अनुसार, रमजान 2026 में फितरा की दर पिछले साल से अलग होगी. इसका कारण यह है कि फितरा की दर आमतौर पर खजूर, किशमिश या गेहूं के मूल्य के आधार पर तय की जाती है, और यह राशि उन मुसलमानों के लिए अनिवार्य है जो इसे अदा करने के पात्र हैं. वे चाहें फितरा ऑनलाइन अदा करें या व्यक्तिगत रूप से जमा करें. अगर देखा जाए तो, भारत में रमजान 2026 के लिए फितरा (सदका-ए-फितर) की राशि प्रति व्यक्ति लगभग 80 से 100 रुपये के बीच मानी जा रही है. यह रकम करीब 2 किलो से 2.5 किलो गेहूं या उसकी कीमत के बराबर होती है.

Lalit Kumar

9 साल से ज्यादा के लंबे करियर में ललित कुमार ने दैनिक जागरण, दैनिक भाष्कर, हिन्दुस्तान और नेटवर्क 18 जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, समाज, कला व संस्कृति के अलावा जटिल स्वास्थ्य विषयों और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं का विश्लेषण उनकी विशेषता है। खबरों का डीप एनालिसिस उनकी पहचान है। हर खबर को आसान भाषा में पाठक तक पहुंचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वर्तमान में वे देश के सबसे बड़े मीडिया संस्थानों में एक इंडिया न्यूज (डिजिटल) में लाइफस्टाइल, हेल्थ, धर्म और एस्ट्रो टीम का हिस्सा हैं।

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