India News (इंडिया न्यूज), India Bhutan Relations: भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक सोमवार को लखनऊ पहुंचे। चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। वे आज (मंगलवार) लप प्रयागराज महाकुंभ जाएंगे और संगम पर पवित्र त्रिवेणी में स्नान और पूजा करेंगे। इस बीच, आज हम भारत और भूटान के रिश्ते को समझने का प्रयास करेंगे। और ये समझेंगे कि, क्यों भूटान से बेहतर रिश्ता हमारे लिए जरुरी है। दरअसल, 1950 की बात है, जब चीन के सरकारी अखबार में एक लेख छपा था, जिसके अनुसार चीन ‘भूटान को तिब्बत की हथेली की पांच उंगलियों में से एक’ मानता है। यानी उस समय चीन ने तय कर लिया था कि भूटान उसकी हथेली की सिर्फ एक उंगली है।
1958 में चीन ने दूसरे नक्शे में भूटान की कई जमीनों पर दावा किया और भूटान की करीब 300 किलोमीटर जमीन पर कब्जा भी कर लिया। चिंतित भूटान ने तब दशकों पुरानी ब्रिटिश विरासत भारत-भूटान संधि 1949 के अनुच्छेद 2 का सहारा लिया और कहा कि इस स्थिति में भूटान सरकार ने फैसला किया है कि वह विदेशी मामलों के संबंध में भारत सरकार की सलाह के अनुसार निर्देशों का पालन करेगी। तब से भारत भूटान के रक्षा और विदेशी मामलों का प्रभारी है।
India Bhutan Relations (भारत और भूटान के संबंध)
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भारतीय विश्व मामलों की परिषद पर मई, 2016 में प्रकाशित एक शोध ‘भूटान-चीन संबंध और भारत के सामरिक हित’ के शोधकर्ता डॉ. राकेश कुमार मीना के अनुसार, हिमालयी देश भूटान भारत और चीन के बीच स्थित है। तिब्बती संस्कृति, भाषा और इतिहास से गहरे जुड़ाव और चीन और तिब्बत के बीच विवादित संबंधों के कारण इस क्षेत्र में भूटान का भू-रणनीतिक महत्व बहुत बढ़ गया है। आर्थिक रूप से कम विकसित राष्ट्र होने के बावजूद भू-रणनीतिक दृष्टिकोण से भूटान भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
खासकर भारत के ‘चिकन नेक कॉरिडोर’ में स्थित होने और भूटान से नेपाल और बांग्लादेश की कम दूरी के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है। आगे बढ़ने से पहले नीचे दिए गए ग्राफ़िक्स से भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति जान लें। उत्तर और पश्चिम हिमालय में क्षेत्र को लेकर भूटान और चीन के बीच विवाद है। इन विवादित जगहों में सबसे महत्वपूर्ण डोकलाम है। यह भारत, भूटान और चीन के ट्राई-जंक्शन के करीब है। भूटान और चीन दोनों ही इस क्षेत्र पर अपना दावा करते हैं और भारत इस विवाद में भूटान के साथ है।
भूटान के साथ मजबूती से खड़े होने के भारत के अपने कारण हैं। माना जाता है कि डोकलाम पहाड़ी सुरक्षा के लिहाज से भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अगर चीन का प्रभाव यहां बढ़ता है तो यह भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक के लिए खतरा बन सकता है। डोकलाम इलाके पर भूटान और चीन दोनों ही अपना दावा करते हैं और भारत भूटान का समर्थन करता है। भू-रणनीतिक दृष्टि से यह जगह भारत के लिए काफी अहम मानी जाती है। दरअसल, यह सड़क भारतीय जमीन के उस हिस्से के पास बनाई जा रही थी जिसे ‘चिकन नेक’ के नाम से जाना जाता है। यह इलाका भारत को अरुणाचल प्रदेश जैसे उसके उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है।
दोनों देशों के बीच इस टकराव को कई दशकों में सबसे खराब बताया गया और बाद में दोनों देशों ने इलाके से अपने सैनिकों को वापस बुलाना स्वीकार किया। उस समय दिल्ली में अधिकारियों ने कहा था कि चीन ने अपने बुलडोजर और सड़क निर्माण के दूसरे उपकरण हटा लिए हैं। डोकलाम एक ट्राइजंक्शन है जहां भारत, चीन और भूटान की सीमाएं मिलती हैं। वहीं, 2020 में लद्दाख सीमा पर गलवान घाटी संघर्ष में चीन ने धोखा दिया था।
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