Pakistan-US Media on BRICS Summit 2026: भारत मंडपम से बदल रहा है दुनिया का शक्ति संतुलन. ट्रम्प की चिंता से लेकर भारत के कूटनीतिक 'बैलेंसिंग एक्ट' तक, ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर पश्चिमी मीडिया में चल रही हलचल के पीछे एक ऐसा सच छिपा है जो आम तौर पर खबरों में नहीं दिखाया जा रहा... जानिए आखिर वाशिंगटन को किस बात का डर सता रहा है!
Brics Summit को लेकर पश्चिमी मीडिया में चल रही हलचल के पीछे का सच
दिल्ली का भारत मंडपम इस समय 21 देशों के शीर्ष नेताओं की अगवानी कर रहा है. सुरक्षा के अभेद्य इंतजामों के बीच भारत की अध्यक्षता में हो रहा यह 2026 ब्रिक्स सम्मेलन वैश्विक राजनीति के नए समीकरण गढ़ रहा है. इतने बड़े पैमाने पर दुनिया के दिग्गजों का एक शहर में जुटना यह साफ दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शक्ति का केंद्र अब बदल रहा है.
हालाँकि पश्चिमी दुनिया, विशेषकर अमेरिका और यूरोप में इस सम्मेलन को लेकर एक अजीब सी छटपटाहट देखी जा रही है.
अमेरिकी मीडिया संस्थानों, चाहे ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ हो, ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ या ‘एसोसिएटेड प्रेस’, सबकी पैनी नजर इस बात पर टिकी है कि ब्रिक्स देश अमेरिकी डॉलर की बादशाहत को चुनौती देने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं.
डोनाल्ड ट्रम्प की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और संरक्षणवादी सोच के दौर में ब्रिक्स का यह विस्तार और उसकी बढ़ती आर्थिक ताकत पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के लिए सीधी सामरिक चुनौती बनकर उभर रही है. पश्चिमी विश्लेषक इसे केवल एक आर्थिक बैठक नहीं, बल्कि डॉलर के वर्चस्व को चोट पहुँचाने वाले मंच के रूप में देख रहे हैं.
दूसरी ओर, बीबीसी और डॉयचे वेले जैसे यूरोपीय मीडिया हाउस इसे ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की बढ़ती आवाज और स्वायत्तता के तौर पर रेखांकित कर रहे हैं. पश्चिमी देशों द्वारा संचालित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के समानांतर एक नया विकल्प खड़ा करने की यह कोशिश यूरोप को सोचने पर मजबूर कर रही है. हालाँकि, अपनी घबराहट को छुपाने के लिए यूरोपीय विश्लेषक अक्सर यह तर्क भी देते हैं कि ब्रिक्स कोई एकजुट सैन्य गठबंधन नहीं, बल्कि अलग-अलग हितों वाले देशों का एक ढीला-ढाला मंच है.
पश्चिमी रणनीतिकारों की नजर में भारत की भूमिका इस पूरे सम्मेलन में सबसे महत्वपूर्ण है. अमेरिकी और यूरोपीय थिंक टैंक मानते हैं कि भारत ब्रिक्स के भीतर एक ‘बैलेंसिंग व्हील’ की तरह काम करता है. भारत की मौजूदगी यह सुनिश्चित करती है कि यह मंच चीन और रूस के एजेंडे या अमेरिका-विरोधी प्रचार का जरिया न बन जाए. भारत की ‘बहु-संलग्नता’ (Multi-alignment) की विदेश नीति ने इसे एक मजबूत कूटनीतिक आकार दिया है.
एक तरफ जहाँ रूस और चीन इस मंच का इस्तेमाल पश्चिमी प्रतिबंधों को बेअसर करने और अपनी अलगाव की स्थिति को तोड़ने के लिए कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी पाकिस्तान में इसे लेकर भारी बेचैनी और दुविधा है.
पाकिस्तान के प्रमुख समाचार पत्रों, ‘डॉन’ और ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ में इस बात की काफी टीस दिखती है कि इतनी बड़ी आर्थिक ताकत बनने के बावजूद इस्लामाबाद इस समूह का हिस्सा क्यों नहीं बन पा रहा. पाकिस्तानी विश्लेषक भी अब दबी जुबान में यह स्वीकार करने लगे हैं कि भारत के सख्त विरोध के रहते ब्रिक्स के दरवाजे उनके लिए फिलहाल पूरी तरह बंद हैं.
सम्मेलन में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और वैकल्पिक भुगतान प्रणाली तैयार करने पर हो रही चर्चाओं ने वाशिंगटन और यूरोपीय राजधानियों में आर्थिक हलचल बढ़ा दी है. डर इस बात का है कि अगर वैश्विक व्यापार में डॉलर की निर्भरता घटी, तो पश्चिमी देशों का वित्तीय एकाधिकार खत्म हो जाएगा.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की दिल्ली में मौजूदगी और यूएन सुरक्षा परिषद में सुधारों के उनके समर्थन ने इस सम्मेलन के वजन को और बढ़ा दिया है. पश्चिमी मीडिया इसे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अनिवार्य बदलाव के संकेत के रूप में देख रहा है, जबकि दक्षिण एशिया में इसे भारत के बढ़ते कूटनीतिक कद और ग्लोबल साउथ के निर्विवाद नेता के रूप में देखा जा रहा है.
अमेरिकी और यूरोपीय टीवी चैनलों के प्राइम-टाइम डिबेट्स में ब्रिक्स को वो जगह नहीं मिलती जो नाटो (NATO) या G-7 की बैठकों को दी जाती है. लेकिन ‘रॉयटर्स’, ‘ब्लूमबर्ग’ और ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ जैसे वैश्विक डिजिटल और प्रिंट मीडिया में इस पर व्यापक और गंभीर विश्लेषण छापे जा रहे हैं.
हालाँकि, पश्चिमी मीडिया का एक वर्ग रणनीति के तहत इसे ‘लो-प्रोफाइल’ रखने की कोशिश जरूर करता है, ताकि उनकी आम जनता के बीच यह संदेश न जाए कि पश्चिमी दबदबे को चुनौती देने वाला एक मजबूत और बड़ा वैश्विक विकल्प तैयार हो चुका है.
Viral Video: मुंबई में सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन के ऑफिस में खींचतान देखने को…
गुरुग्राम में बाबा बालक नाथ मंदिर गिराए जाने से तनाव फैल गया है क्योंकि ग्रामीणों…
Who is Chandan Singh Jeena: UKSSSC भर्ती घोटाले में ED की एंट्री से उत्तराखंड की…
एक लिव-इन कपल ने कथित तौर पर मथुरा रेलवे स्टेशन से पांच महीने के बच्चे…
Who is Uditi Singh:उदिति सिंह को करीना कपूर की हमशक्ल भी कहा जाता है. उदिति…
Delhi Gold Price Today | Delhi Mein Sone Ka Bhav Aaj: शादी का सीजन शुरू…