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चीन ने निकाला H-1B वीजा का तोड़, लॉन्च किया ‘K Visa’; जानिए किसे लुभाने में जुटा ड्रैगन?

China Visa Policy: चीन का नया K वीज़ा 1 अक्टूबर से प्रभावी होगा। इस वीज़ा को अमेरिकी एच-1बी वीज़ा जैसा ही माना जाता है. इसका उद्देश्य युवा, उच्च-कुशल STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) प्रतिभाओं को चीन की ओर आकर्षित करना है.

China K visa: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने H1-B वीज़ा की फीस में बढ़ोतरी कर दी है. यह फीस ₹600,000 से बढ़ाकर ₹88 लाख कर दी गई है. अमेरिकी H1-B वीज़ा को लेकर जहाँ एक ओर चर्चाएँ चल रही हैं, वहीं चीन ने अब एक विकल्प पेश किया है. रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि चीन ने दुनिया भर के युवा और प्रतिभाशाली पेशेवरों, खासकर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में, को आकर्षित करने के लिए एक नई “K वीज़ा” श्रेणी शुरू करने की घोषणा की है.

अगस्त में स्वीकृत इस फैसले से चीन में विदेशियों के प्रवेश और निकास संबंधी नियमों में संशोधन होगा. यह 1 अक्टूबर, 2025 से प्रभावी होगा। K वीज़ा, जिसे कई लोग अमेरिकी H-1B वीज़ा का चीनी संस्करण बता रहे हैं, ऐसे समय में पेशेवर कर्मचारियों को आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है जब दुनिया भर के अन्य देश वीज़ा शुल्क बढ़ा रहे हैं. चीन ने अपने देश में पेशेवरों को आकर्षित करने के लिए यह वीज़ा शुरू किया है.

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इस वीज़ा का उद्देश्य क्या है?

चीन का नया K वीज़ा 1 अक्टूबर से प्रभावी होगा। इस वीज़ा को अमेरिकी एच-1बी वीज़ा जैसा ही माना जाता है. इसका उद्देश्य युवा, उच्च-कुशल STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) प्रतिभाओं को चीन की ओर आकर्षित करना है. चीन ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब अमेरिका जैसे कई देश कार्य वीज़ा नियमों को कड़ा कर रहे हैं.

कौन आवेदन कर सकता है?

यह नया वीज़ा विशेष रूप से विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम करने वाले या अध्ययन करने वाले युवाओं के लिए बनाया गया है पात्र आवेदकों में STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों के स्नातक शामिल हैं, जिन्होंने मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों या शोध संस्थानों से कम से कम स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, और इन संस्थानों में शिक्षण या शोध में लगे युवा पेशेवर भी शामिल हैं.

आवेदकों को चीनी सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों को पूरा करना होगा और आवश्यक दस्तावेज़ (डिग्री प्रमाणपत्र, शोध/रोज़गार का प्रमाण) प्रस्तुत करने होंगे.

इस वीज़ा के क्या लाभ हैं?

इस चीनी वीज़ा के कई लाभ हैं। यह एक तेज़ और सस्ता रास्ता है। आवेदन प्रक्रिया सरल होगी. यह चीनी वीज़ा अमेरिकी वीज़ा की तुलना में तेज़ी से प्रदान किया जाएगा. एक बड़ा बदलाव यह है कि आवेदकों को अब किसी स्थानीय प्रायोजक या चीनी कंपनी की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे विदेशी पेशेवरों के लिए एक बड़ी बाधा दूर हो जाएगी. इसके बजाय, वीज़ा के लिए पात्रता आयु, शिक्षा और कार्य अनुभव पर आधारित होगी.

अब तक, चीन के वीज़ा नियमों में 12 सामान्य वीज़ा श्रेणियाँ शामिल थीं, जिनमें कार्य, अध्ययन, व्यवसाय और पारिवारिक पुनर्मिलन शामिल थे. इस संशोधन के साथ, एक 13वीं श्रेणी, K वीज़ा, जोड़ी गई है.

चीन ने यह वीज़ा युवा विज्ञान और प्रौद्योगिकी स्नातकों के लिए डिज़ाइन किया है। STEM डिग्री (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) वालों को प्राथमिकता दी जाएगी, बशर्ते उन्होंने किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या शोध संस्थान से अपनी पढ़ाई पूरी की हो. इस वीज़ा के ज़रिए, चीन अमेरिका से हज़ारों प्रतिभाशाली पेशेवरों को अपने तकनीकी और शोध उद्योग में शामिल होने के लिए आकर्षित करने की उम्मीद करता है.

कितने विदेशी यात्रा करते हैं?

हाल के वर्षों में, चीन ने वीज़ा-मुक्त प्रवेश और पारगमन छूट का विस्तार किया है। 2025 की पहली छमाही में, चीन में 3.8 करोड़ विदेशी यात्राएँ दर्ज की गईं. इनमें से 1.36 करोड़ वीज़ा-मुक्त प्रविष्टियाँ थीं (पिछले वर्ष की तुलना में 53% अधिक). अमेरिका ने H-1B वीज़ा पर $1,00,000 का वार्षिक शुल्क लगाया है, जिससे भारतीय आईटी पेशेवर चिंतित हैं। हालाँकि, चीन के K वीज़ा को एक विकल्प के रूप में, खासकर दक्षिण एशिया के लोगों के लिए, विचार किया जा रहा है.

यह H-1B वीज़ा से कैसे अलग है?

चीन का K वीज़ा अमेरिकी H-1B वीज़ा से काफी अलग है. पहला, H-1B वीज़ा ज़्यादा महंगा है, जबकि चीन का K वीज़ा विदेशी पेशेवरों के लिए कोई प्रतिबंध नहीं लगाता. इसके लिए स्थानीय काम की आवश्यकता नहीं होती और यह प्रवेश को आसान बनाता है.

चीन के 75 देशों के साथ पारस्परिक और एकतरफा वीज़ा-मुक्त समझौते हैं. राष्ट्रीय आव्रजन प्रशासन के हवाले से, ग्लोबल टाइम्स ने बताया कि इस साल जून तक 38 मिलियन से ज़्यादा विदेशी नागरिकों ने चीन का दौरा किया, जो पिछले साल की तुलना में 30.2% ज़्यादा है. इसमें 13.6 मिलियन वीज़ा-मुक्त प्रवेश शामिल थे.

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Ashish kumar Rai

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