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India News(इंडिया न्यूज),China Secret Plan: दुनिया में इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध के बारे में लगातार बातें चल रही है। वहीं दूसरी ओर देखे तो चीन और ताइवान के बीच भी मामले लगातार खराब होते हुए नजर आ रहे है। जानकारी के लिए बता दें कि, अमेरिकी हथियारों से पहले ही यूक्रेन रूस के खिलाफ लड़ रहा है तो अब अमेरिका ने इजरायल के लिए अपने हथियारो का जखीरा खोल दिया। इन दोनों के अलावा चीन और ताइवान का एक और तीसरा फ्रंट भी एक्टिव है जो कि युद्ध के मुहाने पर खड़ा है। यहां भी अमेरिका ताइवान के साथ खड़ा है. जानकारों की मानें तो तीसरा फ्रंट भी जल्दी खुल सकता है और शायद चीन ऐसी ही किसी समय का इंतजार कर रहा था जब अमेरिका अलग अलग फ्रंट पर व्यस्त हो जाए और ऐसा हो भी गया है।
ऐसा कहा जाता है कि, चीन हमेशा से ही मौकापरस्त रहा है। कार्गिल में भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ाई के दौरान जब भारतीय सेना ने लद्दाख के पैंगाग लेक के पास से सैनिकों को कार्गिल मूव किया तो मौके का फायदा उठा कर उसने फिंगर 4 तक सड़क बना डाली थी। तो 1962 में भी चीन ऐसा मौकापरस्ती का नजारा दुनिया को भारत पर जंग थोप कर भी दिखा दिया था. ये वो वक्त था जब सोवियत संघ और अमेरिका के बीच परमाणु युद्ध की नौबत आ गई थी। क्यूबा मिसाइल क्राइसिस या अक्टूबर क्राइसिस के तौर पर भी जाना जाता है।
रूस यूक्रेन युद्ध की शुरुआती दौर में खुद बाइडन ने 1962 के क्यूबा मिसाइल संकट का जिक्र करते हुए कहा था कि मौजूदा समय में ये संकट क्यूबा मिसाइल से ज्यादा चरम पर है. ये वो दौर था जब अमेरिका जैसे सुपर पावर की सांसे अटक गई थी। वजह थी अमेरीका के फ्लोरिडा तट से महज 150 किलोमीटर दूर क्यूबा में सोवियत संघ ने अपने परमाणु मिसाइल तैनात कर दिए थे. जब सोवियत संघ और अमेरिका के बीच ये संकट जारी था तो उसी दौरान चीन ने भारत पर हमला किया.
वहीं बता दें कि, ताइवान को लेकर कोई अलग से कदम उठाया गया तो चीनी आर्मी किसी भी तरह की दया नही दिखाएगी। बता दें कि, ये बयान ये बयान किसी चीनी कमिशन के वाइस चेयरमैन ने बीजिंग जियांदशान फोरम ने कही है। वहीं खबर तो ये भी सामने आ रही है कि, चीनी सेना कभी इसके लिए सहमत नहीं होगी. ताइवान चीन के मूल हितों का केंद्र था. मौजूदा हालात में इस तरह का बयान अपने आप में ही इस बात की तस्दीक करने के लिए काफी हैं कि इशारा किसी ओर है।
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