US Supreme Court trump Tariff Hearing Delay: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (America Supreme Court) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ (Global Tarrif) की वैधता पर एक बड़े फैसले को टाल दिया है. मंगलवार को, कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण मामलों में फैसले सुनाए, लेकिन ट्रंप की टैरिफ नीति से जुड़े इस बहुप्रतीक्षित मुद्दे पर कोई फैसला नहीं दिया. इससे यह साफ हो गया है कि इस मामले को लेकर कानूनी अनिश्चितता बनी रहेगी.
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कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख भी तय नहीं की
सुप्रीम कोर्ट आमतौर पर अपने फैसलों की तारीखें पहले से घोषित नहीं करता है, लेकिन इस बार न तो कोई फैसला सुनाया गया और न ही अगली सुनवाई की तारीख घोषित की गई. इससे पता चलता है कि जज इस संवेदनशील और दूरगामी मुद्दे पर और विचार-विमर्श करना चाहते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्ट ने मंगलवार को तीन अन्य मामलों में फैसले सुनाए, लेकिन टैरिफ मामले को एक बार फिर टाल दिया गया.
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यह पहली बार नहीं है जब इस मुद्दे पर फैसला टाला गया है. पिछले हफ्ते भी, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की ग्लोबल टैरिफ नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कोई फैसला नहीं सुनाया था. बार-बार देरी से यह मामला और भी ज़्यादा चर्चा में आ गया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर अमेरिकी आर्थिक और व्यापार नीति को प्रभावित करता है.
कानूनी अधिकार पर सवाल
5 नवंबर, 2025 को सुनवाई के दौरान पेश की गई दलीलों से यह साफ हो गया कि कोर्ट को इस बात पर गंभीर संदेह है कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप के पास टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार था. ये टैरिफ 1977 के एक कानून के तहत लगाए गए थे जो राष्ट्रपति को आपातकालीन स्थितियों में विशेष शक्तियां देता है. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ट्रंप ने इस कानून की सीमाओं का उल्लंघन किया, जबकि सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा के लिए जरूरी थी.
आर्थिक नीति पर बने सवाल
ये टैरिफ ट्रंप प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक नीतियों में से एक रहे हैं. इन्होंने न केवल अमेरिकी उद्योगों और उपभोक्ताओं को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक व्यापार संबंधों पर भी गहरा असर डाला है. नतीजतन, सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
क्या है देरी की वजह?
रिपोर्ट के अनुसार, इस स्थगन का मतलब है कि मामले को सुलझने में कम से कम एक और महीना लग सकता है. इसका एक मुख्य कारण यह है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट चार सप्ताह के अवकाश पर जाने की तैयारी कर रहा है. कोर्ट की आम प्रक्रियाओं को देखते हुए, टैरिफ पर फैसले के लिए अगली संभावित तारीख 20 फरवरी है. इस फैसले को लेकर, न सिर्फ अमेरिका, बल्कि दुनिया भर के देश इस मामले पर करीब से नज़र रख रहे है. अगर कोर्ट यह फैसला सुनाता है कि राष्ट्रपति ने टैरिफ लगाने में अपनी अथॉरिटी का गलत इस्तेमाल किया है, तो इसका भविष्य के अमेरिकी राष्ट्रपतियों की आर्थिक शक्तियों पर बड़ा असर पड़ सकता है. इसके अलावा, अगर ट्रंप का फैसला सही ठहराया जाता है, तो यह इमरजेंसी कानूनों के तहत राष्ट्रपतियों को और भी ज़्यादा पावर देने का रास्ता खोल सकता है.
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