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14 साल में 17 सरकारें, क्यों डगमागाती रहती है नेपाल की सत्ता? राजशाही के अंत से लेकर गठबंधन की राजनीति तक, जानें 2008 के बाद की अस्थिरता का इतिहास

नेपाल चुनाव 2026: 2008 में जब से नेपाल एक फेडरल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक बना है, तब से 17 सालों में यहां 14 सरकारें बनी हैं. किसी ने भी पांच साल का पूरा कार्यकाल पूरा नहीं किया है.चलिए विस्तार से जानें कि ऐसा क्यों हैं.

Nepal Election 2026: नेपाल चुनाव की गिनती चल रही है, और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है. बालेन शाह की पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, और 119 सीटों पर आगे चल रही है. झापा चुनाव क्षेत्र नंबर 5 में शुरुआती वोटिंग ट्रेंड्स में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार बालेंद्र शाह आगे चल रहे हैं. Gen-Z के पसंदीदा बालेंद्र शाह ने पूर्व PM ओली को बहुत पीछे छोड़ दिया है. राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी कोसी, मधेस, बागमती और लुंबिनी समेत लगभग सभी प्रांतों में आगे चल रही है. नेपाल के पूर्व PM पुष्प कमल प्रचंड-धन ने रुकुम ईस्ट-1 सीट जीत ली है.
कुछ महीने पहले भ्रष्टाचार और राजनीतिक नाकामियों के खिलाफ Gen Z के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों की वजह से प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा था. 2008 में जब से नेपाल एक फेडरल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक बना है, तब से 17 सालों में यहां 14 सरकारें बनी हैं. किसी ने भी पांच साल का पूरा कार्यकाल पूरा नहीं किया है.चलिए विस्तार से जानें कि ऐसा क्यों हैं.

नेपाल में राजशाही से रिपब्लिक तक का सफर

सदियों से, नेपाल पर राजाओं का राज रहा है. 1960 में, राजा महेंद्र ने पार्लियामेंट भंग कर दी और बिना पार्टी वाला पंचायत सिस्टम लागू कर दिया. मल्टी-पार्टी डेमोक्रेसी 1990 में ही बहाल हुई, जब एक बड़े आंदोलन ने राजा बीरेंद्र को राजनीतिक पार्टियों पर लगे बैन को हटाने के लिए मजबूर किया. 1996 में, नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने राजशाही को उखाड़ फेंकने के लिए हथियारबंद बगावत शुरू की. यह लड़ाई 10 साल तक चली और कहा जाता है कि इसमें 13,000 लोग मारे गए.
2001 में राजा बीरेंद्र की हत्या के बाद राजशाही को झटका लगा. 2005 में, राजा ज्ञानेंद्र ने सीधी सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया. 2006 में बड़े विरोध प्रदर्शनों की वजह से उन्हें पीछे हटना पड़ा. 2008 में, नेपाल ने अपनी 240 साल पुरानी राजशाही को ऑफिशियली खत्म कर दिया और एक रिपब्लिक बन गया. इसके बाद देश को एक नया संविधान लिखने और राज्य को रीस्ट्रक्चर करने के मुश्किल काम का सामना करना पड़ा.

नेपाल का 2015 का संविधान

नेपाल ने 2015 में एक नया संविधान अपनाया. इसने एक फेडरल सिस्टम बनाया और एक मिला-जुला चुनावी मॉडल पेश किया:
165 लॉमेकर सीधे (फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट) चुने जाते हैं.
110 प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन (PR) के ज़रिए चुने जाते हैं.
PR सिस्टम को महिलाओं, दलितों, मधेसियों, जनजातियों और दूसरे हाशिए पर पड़े ग्रुप्स को शामिल करने के लिए डिज़ाइन किया गया था. पार्टियों को यह पक्का करना होगा कि कम से कम एक-तिहाई लॉमेकर महिलाएं हों.
हालांकि इससे रिप्रेजेंटेशन में सुधार हुआ, लेकिन इससे संसद में अस्थिरता भी आई. 2008 के बाद से किसी भी एक पार्टी को साफ बहुमत नहीं मिला है. सरकारें गठबंधन के ज़रिए बनती हैं जो अक्सर कॉमन पॉलिसी एजेंडा के बजाय पावर-शेयरिंग डील पर टिकी होती हैं. जब गठबंधन टूटते हैं, तो सरकारें गिर जाती हैं.

2008 से नेपाल की सभी 14 सरकारों कि लिस्ट

नेपाल के रिपब्लिक बनने के बाद से सरकारों का क्रम इस तरह है:
पुष्प कमल दहल (प्रचंड) – 2008-2009 – आर्मी चीफ पर विवाद के बाद इस्तीफा दे दिया.
माधव कुमार नेपाल – 2009-2011
झाला नाथ खनल – 2011
बाबूराम भट्टाराई – 2011-2013
सुशील कोइराला – 2014-2015 – 2015 के संविधान को अपनाने की देखरेख की.
केपी शर्मा ओली – 2015-2016 (पहला टर्म)
पुष्प कमल दहल – 2016-2017 (दूसरा टर्म)
शेर बहादुर देउबा – 2017-2018
केपी शर्मा ओली – 2018-2021 (दूसरा टर्म) – एक मजबूत लेफ्ट गठबंधन का नेतृत्व किया लेकिन बाद में पार्टी के अंदर फूट का सामना करना पड़ा.
शेर बहादुर देउबा – 2021–2022 – सुप्रीम कोर्ट के पार्लियामेंट को फिर से शुरू करने के बाद अपॉइंट किया गया.
पुष्प कमल दहल – 2022 – 2024 – मेजॉरिटी बनाए रखने के लिए कई बार अलायंस बदले.
केपी शर्मा ओली – 2024 (रोटेशन डील के तहत चौथा टर्म शुरू)
ओली के अंडर कोएलिशन में फेरबदल – 2024-2025 ओली के 2025 में इस्तीफे के बाद सरकार गिर गई.

नेपाल को अभी कौन लीड कर रहे हैं?

नेपाल को अब सुशीला कार्की लीड कर रही हैं, जो एक पूर्व चीफ जस्टिस थीं और जिन्हें डिस्कॉर्ड पर अंतरिम प्राइम मिनिस्टर अपॉइंट किया गया था.

नेपाल में स्टेबल सरकारें क्यों नहीं रहीं?

बिना स्टेबिलिटी के कोएलिशन पॉलिटिक्स – किसी भी पार्टी को मेजॉरिटी नहीं मिलती. सरकारें कमजोर अलायंस पर डिपेंड करती हैं जो पार्टनर के सपोर्ट वापस लेने पर टूट जाती हैं.
पॉलिसी से ज़्यादा पावर-शेयरिंग – कई कोएलिशन इस बात पर बनते हैं कि प्राइम मिनिस्टर कौन बनेगा, न कि लॉन्ग-टर्म रिफॉर्म्स पर। पार्टी का बंटवारा – कम्युनिस्ट गुटों में फूट और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी जैसे नए ग्रुप के आने से वोट और बंट गए हैं.
लीडरशिप की दिक्कत – नेपाली पॉलिटिक्स में सीनियर नेताओं के एक छोटे ग्रुप का दबदबा है जो पावर बदलते रहते हैं। अंदरूनी झगड़े अक्सर टूट का कारण बनते हैं.
कमज़ोर संस्थाएँ – बार-बार कोर्ट के दखल, पार्लियामेंट के भंग होने और संवैधानिक झगड़ों ने अनिश्चितता को और गहरा कर दिया है.
लोगों की नाराज़गी – भ्रष्टाचार के आरोपों और धीमी आर्थिक ग्रोथ ने युवाओं के विरोध को हवा दी है. लगभग आधी आबादी 18 साल से कम उम्र की है, और कई युवा वोटर पारंपरिक पार्टियों से कटा हुआ महसूस करते हैं.
Shristi S

Shristi S has been working in India News as Content Writer since August 2025, She's Working ITV Network Since 1 year first as internship and after completing 3 months intership Shristi Joined Inkhabar Haryana of ITV Group on November 2024. She Worked in Inkhabar Haryana 9 months there she cover full Haryana news. Currently In India News her speciality is hard news, lifestyle, entertainment, Business.

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