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भारत में क्या कर रहा था सीरिया-लीबिया जंग में तबाही मचाने वाला US नागरिक? 6 यूक्रेनीयों के साथ NIA ने किया गिरफ्तार

NIA के मुताबिक ये सभी लोग टूरिस्ट वीजा पर अलग-अलग तारीखों में भारत आए थे. इसके बाद वे गुवाहाटी पहुंचे और बिना जरूरी परमिट (RAP/PAP) के मिजोरम चले गए.एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने गैरकानूनी तरीके से म्यांमार में प्रवेश किया और वहां के सशस्त्र समूहों को ड्रोन चलाने, ड्रोन बनाने और जैमिंग तकनीक की ट्रेनिंग दी.

US Citizen Arrested In India: रूस की एजेंसियों ने भारत को जानकारी दी कि 6 यूक्रेनी नागरिक और 1 अमेरिकी नागरिक  म्यांमार में सक्रिय सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग दे रहे थे. इस जानकारी के आधार पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इन लोगों को गिरफ्तार किया. अब भारतीय एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और यूक्रेनी नागरिकों को मिजोरम तक पहुंचने और वहां से म्यांमार जाने में किसने मदद की. जांच में सामने आया है कि यह समूह 2024 से म्यांमार के दौरे कर रहा था. उन पर आरोप है कि वे वहां ड्रोन और जैमिंग उपकरण पहुंचा रहे थे और स्थानीय हथियारबंद समूहों को ट्रेनिंग दे रहे थे. US सिटीजन मैथ्यू 2011 के लीबिया सिविल वॉर और सीरिया गृह युद्ध में सत्ता के खिलाफ लड़ाई में विदेशी फाइटर के रूप में शामिल हुआ था. उसने रूस-यूक्रेन युद्ध में यूक्रेनी युवाओं को भी ट्रेनिंग दी है.

रूस ने साझा की जानकारी

हालांकि रूस ने भारत के साथ कौन-कौन सी जानकारी साझा की इसका पूरा खुलासा नहीं हुआ है. अधिकारियों के मुताबिक NIA की टीमें पिछले करीब 3 महीने से उत्तर-पूर्वी इलाकों में इन लोगों की तलाश में लगी थीं. इन सातों आरोपियों को 13 मार्च को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया. बाद में दिल्ली की एक अदालत ने सभी को 27 मार्च तक NIA की हिरासत में भेज दिया है.

14 लोगों के ग्रुप का हिस्सा थे ये लोग

बताया जा रहा है कि हिरासत में लिए गए छह यूक्रेनी उन 14 लोगों के ग्रुप का हिस्सा थे जो म्यांमार गए थे. ऊपर बताए गए अधिकारियों ने कहा कि अधिकारी अभी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि बाकी आठ अभी भी म्यांमार में हैं या भारत के रास्ते चले गए हैं. NIA के एक प्रवक्ता ने भी डिटेल में बताने से मना कर दिया और एक बयान में कहा “क्योंकि मामला जांच के शुरुआती स्टेज में है, इसलिए हम इस स्टेज पर आपके साथ डिटेल्स शेयर नहीं कर पाएंगे. इसे सही समय पर शेयर किया जाएगा.”

US एम्बेसी ने क्या कहा?

बुधवार को यूक्रेनियों का केस लड़ने वाले एक भारतीय वकील ने प्रोफेशनल ज़रूरतों का हवाला देते हुए केस से नाम वापस ले लिया. US एम्बेसी ने सिर्फ इतना कहा है कि उसे इस मामले की जानकारी है और उसने और कुछ कहने से मना कर दिया. US एम्बेसडर सर्जियो गोर ने बुधवार को सोशल मीडिया पर कहा कि उनकी “नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल के साथ बहुत अच्छी मीटिंग” हुई, जिसमें ज़रूरी सिक्योरिटी और जियोपॉलिटिकल मुद्दों पर बात हुई. उन्होंने कहा, “अमेरिका और भारत के बीच स्ट्रेटेजिक सहयोग लगातार आगे बढ़ रहा है.” 

यूक्रेन के एम्बेसडर ने क्या कहा?

यह तुरंत पता नहीं चल सका कि बातचीत में वैनडाइक के मामले पर बात हुई या नहीं. यूक्रेन के एम्बेसडर ओलेक्सांद्र पोलिशचुक ने एचटी को बताया कि उनका देश छह यूक्रेनियन के खिलाफ जांच में सहयोग करने के लिए तैयार है और चाहता है कि यह प्रोसेस “ऑब्जेक्टिव और फेयर” हो. पोलिशचुक ने कहा “गिरफ्तार किए गए यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ प्रोसेस खुला होना चाहिए. भारतीय पक्ष को यूक्रेनी एक्सपर्ट्स को शामिल करना चाहिए और यूक्रेन 2003 से लागू क्रिमिनल मामलों में आपसी कानूनी मदद पर ट्रीटी की शर्तों के तहत सहयोग करने के लिए तैयार है.” “हम किसी भी तरह से कोर्ट पर दबाव नहीं डाल रहे हैं और ज्यूडिशियल प्रोसेस ऑब्जेक्टिव और फेयर होना चाहिए.”

मैथ्यू एरॉन कौन है?

मैथ्यू एरॉन वैनडाइक बाल्टीमोर, मैरीलैंड USA के रहने वाले हैं. वह एक किराए के सैनिक, डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर, सिक्योरिटी एनालिस्ट और सन्स ऑफ़ लिबर्टी इंटरनेशनल (SOLI) नाम की संस्था के फाउंडर हैं. मैथ्यू ने एक वॉर कॉरेस्पोंडेंट और बिजनेसमैन के तौर पर भी काम किया है.

वह पहली बार 2011 में लीबिया के सिविल वॉर के दौरान मशहूर हुए जब वह मुअम्मर गद्दाफी के शासन के खिलाफ विद्रोही सेनाओं में शामिल हुए. इसके बाद उन्होंने इराक में ISIS के खिलाफ लड़ाई लड़ी, सीरिया में विद्रोहियों की मदद की और 2012 के रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान यूक्रेन में लोगों को ट्रेनिंग दी.

एजेंसी का आरोप है कि वैनडाइक म्यांमार से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था जो भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती थीं. हालांकि इस मामले की पूरी जानकारी अभी भी जांच के दायरे में है और एजेंसी आगे की जांच कर रही है.

NIA का क्या कहना है?

NIA के मुताबिक, ये सभी लोग टूरिस्ट वीजा पर अलग-अलग तारीखों में भारत आए थे. इसके बाद वे गुवाहाटी पहुंचे और बिना जरूरी परमिट (RAP/PAP) के मिजोरम चले गए.एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने गैरकानूनी तरीके से म्यांमार में प्रवेश किया और वहां के सशस्त्र समूहों को ड्रोन चलाने, ड्रोन बनाने और जैमिंग तकनीक की ट्रेनिंग दी.

क्या कहा गया पूछताछ में?

NIA के अनुसार आरोपियों ने पूछताछ में माना है कि उन्होंने म्यांमार में कई बार ट्रेनिंग दी और यूरोप से ड्रोन लाकर वहां पहुंचाए. हालांकि कुछ सूत्रों का कहना है कि अभी तक इन आरोपों के पुख्ता सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए हैं और जांच पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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