US House of Representatives: फ्लाईदुबई की उड़ान में कॉकपिट हमले के दौरान यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी अब अमेरिकी कांग्रेस तक पहुंच गई है. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में उनके और फ्लाइट के क्रू व यात्रियों के सम्मान में प्रस्ताव पेश किया गया है. गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में अहम भूमिका निभाई थी, जबकि भारतीय दूतावास के मुताबिक उनकी सेहत में लगातार सुधार हो रहा है.
अमेरिकी कांग्रेस में स्मित मछार के साहस की चर्चा
US House of Representatives: फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में कॉकपिट हमले के दौरान यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार के साहस की चर्चा अब अमेरिकी कांग्रेस तक पहुंच गई है. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में उनके साथ फ्लाइट के क्रू और यात्रियों के साहस को सम्मान देने वाला प्रस्ताव पेश किया गया है. प्रस्ताव में स्मित मछार के असाधारण साहस की सराहना करते हुए हमले को अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन की सुरक्षा पर आतंकवादी हमला बताया गया है. दूसरी ओर, भारतीय दूतावास के मुताबिक स्मित की सेहत में लगातार सुधार हो रहा है. 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की FZ1073 उड़ान में करीब 174 लोग सवार थे. उड़ान के दौरान फर्स्ट ऑफिसर ने कॉकपिट में कैप्टन स्मित मछार पर इमरजेंसी क्रैश एक्स से हमला किया और विमान का कंट्रोल लेने की कोशिश की. गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद ऑफ-ड्यूटी पायलट, क्रू और यात्रियों ने मिलकर हमलावर को काबू किया और विमान को सुरक्षित उतारने में मदद की.
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में H.Res. 1612 नाम से प्रस्ताव पेश किया गया है. इसका शीर्षक कैप्टन स्मित मछार और फ्लाईदुबई फ्लाइट 1073 के क्रू व यात्रियों को सम्मान देने और विमान पर हुए कथित आतंकवादी हमले की निंदा करने से जुड़ा है. प्रस्ताव को सांसद जोश गोटहाइमर ने पेश किया और माइकल मैककॉल तथा डॉन बेकन इसके सह-प्रस्तावक हैं. 5 अक्टूबर को प्रस्ताव को हाउस कमेटी ऑन फॉरेन अफेयर्स के पास भेजा गया. इस प्रस्ताव में खास तौर पर कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी का उल्लेख किया गया है. इसमें कहा गया है कि गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने अपनी बची हुई ताकत से कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिससे ऑफ-ड्यूटी पायलट अंदर पहुंच सके और विमान को सुरक्षित उतारने में मदद कर सके.
अमेरिकी प्रस्ताव में 30 सितंबर की घटना का पूरा जिक्र किया गया है. दस्तावेज के मुताबिक, उड़ान के बीच फर्स्ट ऑफिसर ने कैप्टन पर हमला किया और फ्लाइट कंट्रोल हासिल करने की कोशिश की. इसी दौरान विमान ने 30 सेकंड से भी कम समय में 14,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई खो दी. इसके बाद स्मित मछार ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोला और बाकी लोगों के लिए अंदर आने का रास्ता बनाया. ऑफ-ड्यूटी पायलटों, केबिन क्रू और यात्रियों ने इसके बाद हमलावर को काबू करने में मदद की. विमान को सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया और सभी यात्री व क्रू सुरक्षित रहे. रॉयटर्स के मुताबिक विमान में 174 यात्री थे और किसी यात्री की जान नहीं गई.
अमेरिकी प्रस्ताव में कैप्टन स्मित मछार के साथ उन ऑफ-ड्यूटी पायलटों, केबिन क्रू और यात्रियों की भी सराहना की गई है, जिन्होंने हमले के बाद कॉकपिट को सुरक्षित करने और विमान को सुरक्षित उतारने में मदद की. प्रस्ताव में कैप्टन मछार और अन्य घायलों के जल्द पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना भी की गई है. साथ ही सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की सरकारों से घटना की पूरी और तेज जांच करने का आह्वान किया गया है.
प्रस्ताव में फ्लाईदुबई की उड़ान पर हुए हमले को आतंकवादी कृत्य और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन की सुरक्षा पर हमला बताया गया है. यह उल्लेख संयुक्त अरब अमीरात के अटॉर्नी जनरल के 3 अक्टूबर के उस बयान के बाद आया, जिसमें यूएई की जांच में फर्स्ट ऑफिसर के कृत्य को आतंकवादी हमला माना गया था. घटना के बाद हमलावर फर्स्ट ऑफिसर को हिरासत में लिया गया था और उसके मकसद व पृष्ठभूमि की अलग-अलग एजेंसियां जांच कर रही हैं. विमान पर हुए हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जांच जारी है.
हमले में कैप्टन स्मित मछार गंभीर रूप से घायल हुए थे. इसके बावजूद उन्होंने विमान में सवार लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी. उनके इसी फैसले को इस घटना में सबसे अहम माना जा रहा है. अमेरिकी प्रस्ताव में भी उनके इस कदम को असाधारण साहस के तौर पर दर्ज किया गया है. प्रस्ताव में कहा गया है कि उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर विमान में मौजूद हर व्यक्ति की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई.
घटना के बाद स्मित मछार को पहले सऊदी अरब के तबुक में इलाज मिला और बाद में उन्हें अबू धाबी स्थानांतरित किया गया. भारतीय दूतावास के मुताबिक उनकी हालत स्थिर है और वह अच्छी तरह रिकवर कर रहे हैं. भारतीय राजदूत दीपक मित्तल ने अस्पताल में स्मित और उनके परिवार से मुलाकात भी की थी. दूतावास ने बताया कि वह स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है और स्मित तथा उनके परिवार को जरूरी मदद उपलब्ध कराई जा रही है. उनकी हालत में सुधार को परिवार और शुभचिंतकों के लिए राहत की खबर माना जा रहा है.
फ्लाईदुबई की उड़ान में हुई इस घटना के बाद स्मित मछार की बहादुरी की भारत और विदेशों में लगातार चर्चा हुई है. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पेश प्रस्ताव ने इस घटना को एक औपचारिक विधायी मंच तक पहुंचा दिया है. अब इस प्रस्ताव की आगे की संसदीय प्रक्रिया पर नजर रहेगी. फिलहाल इसका संदेश स्पष्ट है कि स्मित मछार के साथ-साथ उस फ्लाइट के क्रू और यात्रियों के साहस को भी अमेरिकी स्तर पर दर्ज किया गया है.
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