Delhi NCR Earthquake: दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 की रात भूकंप के झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक उत्तराखंड के चमोली क्षेत्र में 4.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसकी गहराई करीब 13 किलोमीटर बताई गई. दिल्ली, नोएडा और आसपास के इलाकों के साथ उत्तराखंड के कई हिस्सों में झटके महसूस किए गए. शुरुआती जानकारी के मुताबिक अभी तक किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं है.
दिल्ली-NCR में भूकंप के झटके
रात के समय भूकंप के झटके महसूस होने के बाद कई इलाकों में लोगों में घबराहट देखने को मिली. हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े नुकसान या जनहानि की जानकारी सामने नहीं आई है. अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. भूकंप के दौरान सबसे जरूरी बात यह है कि घबराकर तुरंत सीढ़ियों या लिफ्ट की ओर भागने के बजाय खुद को गिरने वाली चीजों से बचाया जाए. विशेषज्ञों की सलाह है कि झटके महसूस होने पर ‘ड्रॉप, कवर और होल्ड ऑन’ का तरीका अपनाएं.
अगर भूकंप के समय आप घर या किसी इमारत के अंदर हैं तो वहीं रहें और किसी मजबूत टेबल या डेस्क के नीचे जाकर सिर और गर्दन को सुरक्षित करें. टेबल उपलब्ध न हो तो किसी अंदरूनी दीवार के पास झुककर हाथों से सिर और गर्दन ढकें. खिड़कियों, शीशों, भारी फर्नीचर और ऐसी वस्तुओं से दूर रहें जो गिर सकती हैं. भूकंप के दौरान बाहर निकलने के लिए भागना सुरक्षित नहीं माना जाता, क्योंकि इमारतों से गिरने वाला मलबा और कांच चोट पहुंचा सकता है. दरवाजे को अपने आप सबसे सुरक्षित जगह मानना भी सही नहीं है.
अगर भूकंप के समय आप बिस्तर पर हैं तो वहीं रहना बेहतर है. तकिये से अपने सिर और गर्दन को ढक लें. अगर आपके आसपास कोई भारी वस्तु गिरने का खतरा हो तो सुरक्षित स्थिति में पहुंचने की कोशिश करें. झटके रुकने के बाद ही सावधानी से आगे बढ़ें. भूकंप के बाद फर्श पर टूटे कांच या दूसरी चीजें बिखरी हो सकती हैं, इसलिए बिना देखे न चलें. ऊंची इमारतों में लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी जाती है.
अगर भूकंप के समय आप बाहर हैं तो जहां हैं, वहीं खुले स्थान की ओर रहें और इमारतों, पेड़ों, बिजली के खंभों, स्ट्रीट लाइट और बिजली की तारों से दूरी बनाएं. गिरने वाली चीजों से बचने के लिए खुले इलाके में रहना सुरक्षित माना जाता है. अगर आप वाहन चला रहे हैं तो सुरक्षित तरीके से सड़क किनारे गाड़ी रोकें. पुल, ओवरपास, पेड़, बिजली की तारों या दूसरी ऐसी जगहों के नीचे गाड़ी खड़ी न करें जहां कुछ गिरने का खतरा हो. झटके खत्म होने तक वाहन के अंदर ही रहना बेहतर है.
भूकंप के दौरान सबसे ज्यादा चोटें गिरती चीजों, कांच और मलबे से लग सकती हैं. इसलिए झटके महसूस होते ही इमारत से बाहर निकलने के लिए दौड़ना हमेशा सुरक्षित विकल्प नहीं है. पहले सिर और गर्दन को सुरक्षित करना और मजबूत जगह में शरण लेना जरूरी है. 6 अक्टूबर की रात आए 4.9 तीव्रता के भूकंप के बाद शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं है. अधिकारी स्थिति पर नजर रख रहे हैं और आगे की जानकारी का इंतजार है. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की ओर से भी भूकंप संबंधी अपडेट जारी किए जा रहे हैं.
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