India News (इंडिया न्यूज), Trump Venezuela Relations : ट्रंप ने अमेरिका का राष्ट्रपति बनते ही कई देशों के साथ टैरिफ वॉर शुरू कर दिया था। इसमें उसके पड़ोसी देश कनाडा और मैक्सिको भी शामिल हैं। अब ट्रंप ने ऐलान किया है कि वो उन देशों पर अतिरिक्त 25 परसेंट का टैरिफ लगाएंगे, जो वेनेजुएला से तेल खरीद रहे हैं। इस बयान के बाद से भारत और चीन जैसे देश टेंशन में हैं। अब सवाल ये खड़ा हो रहा है कि ऐसी क्या बात है जो ट्रंप वेनेजुएला को पसंद नहीं कर रहे हैं और ऐसा फैसला सुनाया है जिससे शायद वेनेजुएला को काफी नुकसान हो सकता है।
असल में ट्रंप को वेनेजुएला की सरकार पसंद नहीं है। ट्रंप वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को वे तानाशाह मानते हैं। उनकी नजर में ये देश अमेरिका के लिए मुसीबत खड़ी करता है, खासकर अवैध प्रवासियों और तेल के खेल से कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि ये कहानी सत्ता, पैसे और सीमा की जंग की है।
US Venezuela conflict : बाकि देशों को सैकेंडरी टैरिफ की धमकी, लेकिन खुद इस देश से तेल खरीद रहा हैं US
वेनेजुएला की ताकत उसका तेल है। 2017 में जब डोनाल्ड ट्रंप पहली बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने, तो उन्होंने मादुरो को सत्ता से हटाने की ठानी। मादुरो का शासन उनके लिए एक कांटा था। वे मानते हैं कि मादुरो ने अपने देश को आर्थिक गड्ढे में धकेल दिया और मानवाधिकारों को कुचल दिया। ट्रंप ने विपक्षी नेता जुआन गुआइदो (Juan Guaido) को समर्थन दिया, और मादुरो को हटाने के लिए जोर लगाया। लेकिन मादुरो का शासन टस से मस नहीं हुआ।
अब 2025 में ट्रंप ने नई चाल चली है। मादुरो को कमजोर करने के लिए ट्रंप तेल की धार को खत्म करके उनकी कमर तोड़ना चाहते हैं। इन दिनों उनके हाथ टैरिफ का एक जबरदस्त टूल लगा ही हुआ है, जिसे वह लगभग सभी देशों पर तान रहे हैं। भारत भी उससे अप्रभावित नहीं है।
24 मार्च 2025 को ट्रंप ने ऐलान किया था कि जो भी देश वेनेजुएला से तेल या गैस खरीदेगा, उस पर भारी टैक्स लगेगा। लेकिन अब सामने आया है कि जनवरी 2025 में अमेरिका ने खुद 8.6 मिलियन बैरल वेनेजुएला का तेल खरीदा। यदि एक 1 बैरल का भाव 5000 रुपये मानें तो लगभग 4,300 करोड़ रुपये का तेल खरीदा है। ट्रंप ने अपने देश की कंपनी शेवरॉन को छूट दी है, जो मई 2025 तक वहां काम करेगी। हालांकि, ट्रंप का सपना है कि अमेरिका विदेशी तेल पर कम निर्भर हो और चीन जैसे देशों को सबक सिखाए। वेनेजुएला का तेल खरीदने वाले देशों को दंड देना उसी कड़ी का हिस्सा नजर आता है।