<
Categories: विदेश

क्या है हवा भवन जहां लाइन में लगते थे बड़े-बड़े बिजनेसमैन, खालिदा जिया के शासन में था बांग्लादेश का ‘अल्टरनेटिव पावर सेंटर’; यहीं रची गई थी शेख हसीना को मारने की साजिश

Hawa Bhaban: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2001 से 2006 के बीच जब BNP-जमात-ए-इस्लामी पावर में थी तब हवा भवन बांग्लादेश में एक अल्टरनेटिव पावर सेंटर के तौर पर काम करता था.

Hawa Bhaban: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के एक्टिंग चेयरमैन तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना तय है क्योंकि 12 फरवरी को हुए संसदीय चुनाव में अनऑफिशियल नतीजों में BNP को 175 सीटें मिली हैं. 60 साल के रहमान तीन महीने पहले ही लंदन में 17 साल के देश निकाला से लौटे हैं. शेख हसीना के समय में लगी उम्रकैद की सज़ा और भ्रष्टाचार के मामलों में उन्हें बरी कर दिया गया था. मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार 15 से 18 फरवरी के बीच सत्ता ट्रांसफर कर सकती है. इसी बीच हवा भवन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. तो चलिए जानते हैं कि क्या है हवा भवन जहां खालिदा जिया के सरकार में असली फैसले लिए जाते थे.

अल्टरनेटिव पावर सेंटर की तरह काम करता था हवा भवन

‘द एज़्योर’ नाम का यह टावर आज ढाका के पॉश बनानी में एक लग्जरी मल्टी-स्टोरी टावर है जो ग्लास और स्टील से बना है और स्काईलाइन पर छाया हुआ है. लेकिन लगभग दो दशक पहले इसी प्लॉट पर हवा भवन था. यह किसी प्रोग्रेसिव चीज का सिंबल नहीं था बल्कि शर्म, मसल पावर और टेरर का सिंबल था. यह BNP चेयरपर्सन “डार्क प्रिंस” तारिक रहमान का बहुत विवादित पॉलिटिकल ऑफिस था. ढाका में US एम्बेसी, बांग्लादेश के एंटी-करप्शन कमीशन (ACC) और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2001 से 2006 के बीच (जब BNP-जमात-ए-इस्लामी पावर में थी) यह बांग्लादेश में एक “अल्टरनेटिव पावर सेंटर” के तौर पर काम करता था.

यहां लिए जाते थे असली फैसले

छह किलोमीटर से भी कम दूरी पर गणभवन था जहां से उस समय की प्राइम मिनिस्टर खालिदा जिया सरकार चलाती थीं. लेकिन उनके वारिस के नेतृत्व में हवा भवन पावर के पैरेलल नर्व सेंटर के तौर पर उभरा. डिप्लोमैट, इंटेलिजेंस अधिकारी, पत्रकार और यहां तक ​​कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अंदर के लोग भी बाद में इसे ऐसी जगह बताते थे जहां मंत्रालयों, कानूनों और संस्थाओं को दरकिनार करके असली फैसले लिए जाते थे. इसका इस्तेमाल 2004 के ढाका ग्रेनेड हमले की साजिश रचने के लिए भी किया गया था जो पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की चीफ शेख हसीना को मारने की कोशिश थी.

भारत के खिलाफ काम

रिपोर्ट्स के मुताबिक हवा भवन दक्षिण एशिया के सबसे बड़े हथियार तस्करी ऑपरेशन के सेंटर में था. 2004 की शुरुआत में इंटेलिजेंस एजेंसियों और सरकारी अधिकारियों की एक्टिव मदद से इसने भारत के अलगाववादी ग्रुप ULFA के लिए चटगांव के रास्ते हथियारों से भरा एक जहाज इम्पोर्ट करने में मदद की.

लाइन में लगते थे बिजनेसमैन

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री ऑफिस की तुलना में यहां फाइलें तेजी से आगे बढ़ती थीं. बिजनेसमैन लाइन में लगते थे. राजनीतिक दुश्मनों को मैनेज किया जाता था. सरकारी संस्थाओं को झुकाया जाता था. डार्क प्रिंस का हवा भवन अब फिजिकली मौजूद नहीं है. लेकिन बेहिसाब पावर, करप्शन और हिंसा का साया अभी भी बना हुआ है. 

तारिक रहमान को डार्क प्रिंस क्यों कहा जाता था?

डार्क प्रिंस नाम बांग्लादेशी मीडिया या विरोधी अवामी लीग के नेताओं से नहीं आया. यह वॉशिंगटन से आया. दिसंबर 2005 में उस समय की US चार्ज डीअफेयर्स जूडिथ ए चम्मास ने तारिक रहमान को “डार्क प्रिंस” बताया था और कहा था कि उनके पास जिया नाम, राजनीतिक चालाकी और हवा भवन के बिजनेस और BNP के राजनीतिक उम्मीदवारों से टोल वसूलने से कमाए गए ढेरों पैसे थे बांग्लादेशी डेली ढाका ट्रिब्यून ने 2023 में रिपोर्ट किया था.

पूर्व US एम्बेसडर जेम्स एफ मोरियार्टी ने और आगे बढ़कर तारिक को “बांग्लादेश में चोर सरकार और हिंसक राजनीति का प्रतीक” कहा और उन पर सरकारी कॉन्ट्रैक्ट, अपॉइंटमेंट और कानूनी राहत के बदले “खुलेआम और अक्सर रिश्वत मांगने” का आरोप लगाया 2011 की एक विकीलीक्स रिपोर्ट में कहा गया. उन्होंने US में उनकी एंट्री रोकने की भी सिफारिश की थी. वे केबल जिन्हें बाद में पब्लिक किया गया इस बात की रीढ़ हैं कि तारिक के हवा भवन के सालों को इंटरनेशनल लेवल पर कैसे याद किया जाता है.

तारिक रहमान के हवा भवन में भ्रष्टाचार कितना गहरा था?

2005 में लगातार पांचवें साल ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने बांग्लादेश को दुनिया का सबसे भ्रष्ट देश बताया. वर्ल्ड बैंक ने कथित तौर पर सरकारी भ्रष्टाचार का हवाला देते हुए तीन बड़े डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग कैंसिल कर दी. US एम्बेसी के केबल्स में दावा किया गया कि तारिक रहमान ने एक्सटॉर्शन, पोर्टफोलियो ट्रेडिंग और साथियों के ज़रिए रिश्वत के जरिए करोड़ों डॉलर की गैर-कानूनी दौलत जमा की. पूर्व US दूत जेम्स एफ मोरियार्टी की मानें तो तारिक और भ्रष्ट काम साथ-साथ चलते थे.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

Recent Posts

बीच सड़क बना कत्लगाह! पहले बेरहमी से पत्नी को पीटा, फिर SUV से कुचल… खौफनाक वारदात सुन कांप उठेगा कलेजा

Karnataka Crime News: कर्नाटक से सामने आई एक और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना…

Last Updated: March 26, 2026 23:35:35 IST

नए लेबर कोड से आपकी सैलेरी पर क्या पड़ेगा असर? वेतन, PF और ग्रेच्युटी से इनकम में होगा बदलाव

1 अप्रैल से बहुत से नियमों में बदलाव होने वाला है. इसी तरह से 1…

Last Updated: March 26, 2026 23:14:46 IST

KBC में 50 लाख जीतकर कमाया नाम, अब जेल पहुंचीं अमिता सिंह तोमर, जानें क्या है मामला

मध्य प्रदेश के श्योपुर में चर्चित महिला तहसीलदार को गिरफ्तार कर लिया गया है. उन…

Last Updated: March 26, 2026 22:35:34 IST

दुनिया की एक ऐसी टी20 लीग, जिसकी लाइव स्ट्रीमिंग भारत में कोई नहीं देख सकता, इंडिया में क्यों है बैन?

टी20 लीग्स का आनंद अब पूरी दुनिया में आसानी से उपलब्ध है. भारत में आप…

Last Updated: March 26, 2026 22:16:11 IST

Viral Video: बाइक छुड़वाने आई महिला पर अचानक आई देवी! नाची ऐसा की पुलिस ने चढ़ा दिया 50 रुपये का चढ़ावा

Navratri viral video: वीडियो में एक महिला को लयबद्ध तरीके से नाचते और झूमते हुए देखा…

Last Updated: March 26, 2026 22:19:03 IST

Indian Railway GK: क्या है PNR का फुल फॉर्म, ट्रेन में सफर करने से पहले जानें राज

अगर आपने ट्रेन में सफर किया है, तो कभी न कभी ऑनलाइन या काउंटर पर…

Last Updated: March 26, 2026 21:13:05 IST