मिर्ज़ा फ़खरुल इस्लाम आलमगीर 1990 के दशक की शुरुआत में इरशाद-विरोधी आंदोलन के दौरान BNP में शामिल हुए और बाद में वो प्रधानमंत्री तारिक रहमान के मुख्य सहयोगी बन गए.
मिर्ज़ा फ़खरुल इस्लाम आलमगीर
बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) के पूर्व महासचिव मिर्ज़ा फ़खरुल इस्लाम आलमगीर गुरुवार को संसद में 255 वोट प्राप्त करके बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति चुने गए. देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक उनका पहुंचने से पहले वो पांच दशक तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे, जिसमें छात्र राजनीति और अध्यापन से लेकर सरकार और बीएनपी के वरिष्ठ नेतृत्व तक का सफर शामिल है.
बांग्लादेश के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समय पर उनका चुनाव हुआ है. मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद आलमगीर ने पदभार संभाला है. शहाबुद्दीन शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के दौरान चुने गए थे और उन्हें हसीना का लंबे समय से सहयोगी माना जाता था. उनका इस्तीफा बीएनपी के सत्ता में लौटने के कुछ महीनों बाद आया, जब नई सरकार और पूर्व राष्ट्रपति के बीच तनाव की खबरें सामने आ रही थीं.
राष्ट्रपति पद में परिवर्तन एक स्पष्ट राजनीतिक बदलाव का भी संकेत है. शहाबुद्दीन के अवामी लीग और शेख हसीना के साथ मजबूत संबंध थे, जबकि आलमगीर ने बांग्लादेश की राजनीतिक विभाजन रेखा के विपरीत कई वर्षों तक अपना पक्ष रखा है. वे बीएनपी के एक अनुभवी नेता हैं, जो हसीना की सरकार के लंबे समय तक विपक्ष में रहने के दौरान पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक रहे. बता दें कि आलमगीर दशकों से बीएनपी नेतृत्व का हिस्सा रहे हैं. वे 2011 में पार्टी के कार्यवाहक महासचिव बने और 2016 में औपचारिक रूप से महासचिव नियुक्त हुए. शहाबुद्दीन के विपरीत, उनका राजनीतिक करियर अवामी लीग के बजाय बीएनपी के इर्द-गिर्द बना है.
आलमगीर का जन्म 26 जनवरी 1948 को ठाकुरगाँव में हुआ था. उनके पिता, मिर्ज़ा रूहुल अमीन, संसद के पूर्व सदस्य थे. उनके राजनीतिक सफ़र की शुरुआत ढाका यूनिवर्सिटी से हुई, जहाँ वे तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान छात्र संघ में शामिल हुए. अयूब खान के ख़िलाफ़ 1969 के जन-आंदोलन के दौरान, वे संगठन की ढाका यूनिवर्सिटी इकाई के अध्यक्ष बने. उन शुरुआती सालों में वे उन छात्र आंदोलनों के केंद्र में रहे जो उस समय पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तान के सैन्य शासन को चुनौती दे रहे थे. सालों तक, जब BNP हसीना की अवामी लीग सरकार के विरोध में थी, तब आलमगीर पार्टी की मुख्य आवाज़ों में से एक थे. 12 फरवरी के संसदीय चुनाव में BNP की जीत के बाद, आलमगीर ठाकुरगाँव-1 से संसद लौटे और BNP चेयरमैन और प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार में मंत्री बने.
तारिक रहमान ने 13 अगस्त को आलमगीर को BNP का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया. नॉमिनेशन के बाद, आलमगीर ने BNP के सेक्रेटरी जनरल का पद छोड़ दिया और पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी से भी इस्तीफ़ा दे दिया. गुरुवार को संसद ने उन्हें राष्ट्रपति चुना; उन्होंने विपक्ष समर्थित उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को हराया. उनकी जीत की उम्मीद पहले से ही थी क्योंकि संसद में BNP के पास भारी बहुमत है.
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