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पैरों में गिड़गिड़ाने की नौबत पर आ गए थे जब मुगल और अंग्रेज…लेकिन एकजुट होकर भी भारत के इस राज्य को न बना सके गुलाम

Mughals & Britishshires: पैरों में गिड़गिड़ाने की नौबत पर आ गए थे जब मुगल और अंग्रेज लेकिन नहीं बना सके भारत के इस राज्य को गुलाम

BY: Prachi Jain • UPDATED :
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India News (इंडिया न्यूज), Mughals & Britishshires: भारत के इतिहास में मुगलों का शासन एक महत्वपूर्ण अध्याय है। बाबर से लेकर अकबर, जहांगीर और शाहजहां तक, मुगलों ने पीढ़ी दर पीढ़ी भारत पर राज किया और अपनी शक्ति का विस्तार किया। लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप में जो परिवर्तन हुआ, उसमें अंग्रेजों की भूमिका भी अनिवार्य रही। यह लेख मुगलों के शासन और अंग्रेजों के आगमन के बीच के घटनाक्रम को समझाने की कोशिश करेगा, साथ ही यह भी बताएगा कि गोवा पर पुर्तगालियों का कब्जा क्यों बना रहा, जबकि मुगलों और अंग्रेजों दोनों ने उसे कब्जा करने की कोशिश की।

मुगलों का साम्राज्य और उनकी ताकत

मुगल साम्राज्य ने भारत में एक लंबे समय तक शासन किया। बाबर, जो एक तैमूरी शासक था, 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में दिल्ली सल्तनत को हराकर भारत में मुगलों का साम्राज्य स्थापित किया। बाबर के बाद हुमायूं, फिर अकबर, और उसके बाद आने वाले मुगल सम्राटों ने अपनी शक्ति को और भी बढ़ाया। खासकर अकबर ने भारत में एक मजबूत साम्राज्य की नींव रखी। मुगलों के पास विशाल सेना थी और उनके शासन के दौरान सैन्य शक्ति का एक महत्वपूर्ण स्थान था।

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Mughals & Britishshires: पैरों में गिड़गिड़ाने की नौबत पर आ गए थे जब मुगल और अंग्रेज लेकिन नहीं बना सके भारत के इस राज्य को गुलाम

मुगल साम्राज्य अपनी सैन्य क्षमता और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए प्रसिद्ध था। उनके पास आधुनिक सैन्य उपकरण और ताकतवर सेना थी, जो उनके खिलाफ किसी भी बाहरी हमले को नाकाम कर देती थी। मुगलों का साम्राज्य धीरे-धीरे भारत के अधिकांश हिस्सों में फैलता गया। इस समय तक, भारत में एक मजबूत और संगठित शाही व्यवस्था स्थापित हो चुकी थी, जो लंबे समय तक कायम रही।

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अंग्रेजों का भारत में आगमन

हालांकि, मुगलों के साम्राज्य के तहत भारत में शांति और समृद्धि थी, लेकिन धीरे-धीरे अंग्रेजों ने भारतीय उपमहाद्वीप में अपनी मौजूदगी बढ़ानी शुरू की। 24 अगस्त 1608 को अंग्रेज व्यापार के उद्देश्य से भारत आए। वे पहले सूरत, गुजरात में पहुंचे और उन्होंने यहां मुगलों से व्यापार करने की अनुमति मांगी। मुगलों ने शुरू में उन्हें व्यापार करने की अनुमति दी, लेकिन उन्होंने यह नहीं सोचा था कि अंग्रेज इतने चतुर होंगे और धीरे-धीरे अपनी सेना भारत में बढ़ा लेंगे।

अंग्रेजों का मुख्य उद्देश्य व्यापार था, लेकिन वे धीरे-धीरे भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप करने लगे। उन्होंने अपने व्यापारिक और सैन्य रणनीतियों से मुगलों के खिलाफ संघर्ष किया और भारतीय उपमहाद्वीप में अपनी शक्ति स्थापित की। अंग्रेजों ने मुगलों के कमजोर होते ही अपनी सेना बढ़ाई और मुगलों को हराकर भारत पर अपना शासन स्थापित किया।

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गोवा और पुर्तगालियों का कब्जा

भारत में मुगलों और अंग्रेजों का संघर्ष चलता रहा, लेकिन एक ऐसा राज्य था जिस पर न तो मुगलों का और न ही अंग्रेजों का कभी कब्जा हो पाया—वह था गोवा। गोवा, जो कि अब भारत का हिस्सा है, पुर्तगालियों के नियंत्रण में था। पुर्तगालियों ने 1510 में गोवा पर कब्जा कर लिया था और इसके बाद भी वे लंबे समय तक वहां हुकूमत करते रहे।

मुगल साम्राज्य के दौरान, हालांकि मुगलों ने गोवा पर कब्जा करने की कई बार कोशिश की, वे कभी सफल नहीं हो सके। अंग्रेजों ने भी गोवा पर कब्जा करने का प्रयास किया, लेकिन पुर्तगालियों की स्थिति बहुत मजबूत थी और वे अपने कब्जे को बनाए रखने में सफल रहे।

पुर्तगाली शासन का अंत और गोवा की मुक्ति

भारत से मुगलों का शासन समाप्त हुआ और अंग्रेजों ने अपने साम्राज्य को स्थापित किया, लेकिन पुर्तगालियों ने गोवा में अपनी सत्ता बनाए रखी। भारत की आजादी के बाद भी, 1947 में जब भारत स्वतंत्र हुआ, तब भी गोवा पुर्तगालियों के कब्जे में था।

अंततः, 1961 में भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत गोवा पर आक्रमण किया और 19 दिसंबर 1961 को गोवा को भारत में शामिल कर लिया। इस दिन को गोवा में “मुक्ति दिवस” के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि भारतीय जनता ने अपने आखिरी उपनिवेश को भी स्वतंत्रता दिलाई।

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भारत में मुगलों का शासन, अंग्रेजों का आगमन, और गोवा पर पुर्तगालियों का कब्जा, इन सभी घटनाओं ने भारतीय इतिहास को एक नई दिशा दी। मुगलों का साम्राज्य एक मजबूत और व्यवस्थित शासन प्रणाली का उदाहरण था, जबकि अंग्रेजों ने अपनी रणनीति से भारत में अपनी सत्ता स्थापित की। हालांकि गोवा पर कभी भी मुगलों या अंग्रेजों का पूर्ण नियंत्रण नहीं हो पाया, लेकिन अंततः गोवा ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बाद स्वतंत्रता प्राप्त की।

यह कहानी भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो न केवल साम्राज्यवादी संघर्षों को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि हर शासन का एक अंत होता है, और एक दिन एक नया युग शुरू होता है।

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