20-30 Chew Rule and Gut Health: क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप काम के दिन में इतने बिज़ी रहे हों या काम का बोझ इतना ज़्यादा हो कि आप काम पूरा करते हुए अपनी डेस्क पर ही खाना खा लें? अगर आपके साथ ऐसा हुआ है तो आप अकेले नहीं हैं. हम सभी मेंटल और फिजिकल असर के बारे में जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इतनी बिज़ी वर्क लाइफ आपके पेट पर भी असर डाल सकती है? भोजन को कितनी बार चबाना हमारे लिए अच्छा होता है इसके बारे में यहां जानकारी दी गई है?
इंडिया न्यूज से बातचीत में ग्वालियर के BHMS डॉ. तोरन यादव ने बताया कि ‘ध्यान से खाना’ बिज़ी प्रोफेशनल्स के लिए पेट की अच्छी हेल्थ का राज है. उन्होंने आज के तेज़-तर्रार वर्क कल्चर में, हम अक्सर ऑटोपायलट पर, मीटिंग्स के बीच, कॉल्स पर, या स्क्रीन स्क्रॉल करते हुए खाते हैं. लेकिन छोटे ध्यान से किए गए बदलाव जैसे खाना धीरे-धीरे चबाना, खाते समय मल्टीटास्किंग से बचना, या खाने से पहले थोड़ा ब्रेक लेना भी डाइजेशन को काफी बेहतर बना सकता है, ब्लोटिंग कम कर सकता है और लंबे समय तक पेट की हेल्थ को सपोर्ट कर सकता है.
ध्यान से खाना: पेट की हेल्थ का राज
न्यूट्रिशनिस्ट ने कहा कि कई प्रोफेशनल्स के लिए एक डिमांडिंग शेड्यूल से गट हेल्थ प्रॉब्लम होती हैं और इसके कुछ साइड इफेक्ट्स हैं. जैसे एसिडिटी, ब्लोटिंग, इर्रेगुलर पॉटी आदि. लेकिन क्या हो अगर इसका इलाज किसी कॉम्प्लेक्स डाइट या महंगे सप्लीमेंट्स में न होकर बस हमारे खाने के तरीके में हो? डॉक्टर के अनुसार, माइंडफुल ईटिंग करने से आपके शरीर का पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम एक्टिवेट होता है. यह इस तरह मदद करता है:
- यह गट को रिलैक्स करने और बेहतर काम करने में मदद करता है.
- आप न्यूट्रिएंट्स को ज़्यादा अच्छे से एब्जॉर्ब करते हैं.
- इन्फ्लेमेशन कम करता है.
- आप अपनी भूख और क्रेविंग पर ज़्यादा कंट्रोल महसूस करते हैं
डॉक्टर के अनुसार माइंडफुल ईटिंग के तरीके:
1. खाते समय स्क्रीन से बचें. डाइजेशन और पेट भरने के लिए अपने फोन या लैपटॉप के बजाय अपने खाने पर पूरा ध्यान दें.
2. हर बाइट को कम से कम 22 बार चबाएं. डाइजेशन मुंह से शुरू होता है और अच्छी तरह चबाने से खाना टूटने में मदद मिलती है, जिससे आपके गट पर लोड कम होता है.
3. खाने से पहले कुछ गहरी सांसें लें. यह आसान सी आदत शरीर के पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को एक्टिवेट करती है, जिससे यह बेहतर डाइजेशन के लिए ‘रेस्ट एंड डाइजेस्ट’ मोड में चला जाता है.
4. अपने लंच ब्रेक को एक मीटिंग की तरह शेड्यूल करें. अपने खाने के समय को वैसे ही प्रायोरिटी दें जैसे आप किसी ज़रूरी मीटिंग को देते हैं.
5. अवेयरनेस में छोटे-छोटे बदलाव पेट की हेल्थ, एनर्जी लेवल और मूड में बड़े बदलाव ला सकते हैं. माइंडफुल ईटिंग का मतलब परफेक्शन नहीं है बल्कि यह प्रेजेंट रहने के बारे में है.
रीडर्स के लिए नोट: यह आर्टिकल सिर्फ़ जानकारी के लिए है और प्रोफेशनल मेडिकल सलाह का सब्स्टीट्यूट नहीं है. किसी भी मेडिकल कंडीशन के बारे में कोई भी सवाल होने पर हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें. इंडिया न्यूज किसी तरह की कोई जिम्मेवारी नहीं लेता है.